अजय दीप वाधवा
एबीएन बिजनेस डेस्क। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर आयकर के मामले में अभी इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल, दिल्ली ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह निर्णय आय कर के कई निर्णय को प्रभावित कर सकता है। इस निर्णय को जानने के पहले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर आय कर के संबंधित नियम को समझ लें।
जब भी हम अपने मकान या जमीन आदि को बेचते हैं, तो इस पर कैपिटल गेन की गणना की जाती है। अगर यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन होना है तो उस पर हमें रियायती दर से आय कर देना होता है। जिस वित्तीय वर्ष में हमें यह लाभ होता है उस वित्तीय वर्ष के एक वर्ष पूर्व या उसके दो वर्षों के बाद तक अगर हम उस आय से कोई मकान या फ्लैट खरीदते हैं तो हमें उस लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर आय कर नहीं देना होता है।
अगर हम मकान खरीदने के स्थान पर उस आय से अगले तीन वर्षों तक कोई मकान का निर्माण करते हैं, तब भी उस आय पर हमें आय कर नहीं देना होता है। पर उपरोक्त लाभ को लेने की एक शर्त यह भी है कि हमें जिस वर्ष लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ है और अगर उस वित्तीय वर्ष के अंत तक अगर हम मकान खरीद या बना नहीं पाते हैं तो हमें उस आय की राशि को किसी बैंक की लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के विशेष खाते में जमा कर देना पड़ता है।
अब हम इस केस को देख लेते है जिसमें ट्रिब्यूनल का निर्णय आया है। इसमें कर दाता को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ, पर उस ने वित्तीय वर्ष के अंत तक इस राशि को विशेष बैंक अकाउंट में जमा नहीं किया। पर उस कर दाता ने इस लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की राशि से अगले दो वर्ष के अंदर नया मकान खरीद लिया।
आयकर विभाग ने पर इस कर दाता को विक्रय के लॉन्ग टर्म लाभ पर छूट देने से मना कर दिया क्योंकि कर दाता ने लाभ राशि को वित्तीय वर्ष के अन्त तक विशेष खाते में जमा नहीं किया था।
कर दाता ने अपनी भूल को स्वीकार करते हुए ट्रिब्यूनल में अपील दायर की। ट्रिब्यूनल ने अपने निर्णय में कर दाता को राहत देते हुए निर्णय दिया कि चूंकि कर दाता ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की राशि से दो वर्षों के अंदर नया घर खरीद लिया था, तो उसे इस लाभ पर आय कर नहीं लगने का लाभ मिलना चाहिए।
भले ही उसने इस राशि को संबंधित वित्तीय वर्ष के अंत तक किसी बैंक के विशेष खाते में जमा नहीं किया था। ट्रिब्यूनल का यह निर्णय आने वाले समय में कई आय कर दाताओं को राहत दे सकता है और साथ ही ऐसे निवेश के निर्णय को भी प्रभावित कर सकता है। (लेखक झारखंड की राजधानी रांची के प्रख्यात कर विशेषज्ञ हैं।)