एबीएन बिजनेस डेस्क। टायर बनाने वाली कंपनी एनएफ ने रिकॉर्ड बनाया है। हाल में कंपनी के शेयर्स ने 1 लाख रुपये के आंकड़े पार पहुंचकर इतिहास रच दिया। एमआरएफ को भले ही टायर बनाने की कंपनी के तौर पार जाना जाता है, लेकिन कभी यह कंपनी बच्चों के लिए गुब्बारा बनाने के लिए फेमस थी।
1946 में शुरू हुई कंपनी एमआरएफ का पूरा नाम है मद्रास रबर फैक्ट्री। मैमन मपिल्लई ने इसकी नींव आजादी से पहले रखी। वहीं मपिल्लई जो सड़कों गुब्बारे बेचा करते थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि गुब्बारे से शुरू हुए सफर के जरिये वो बुलंदिया छू लेंगे। ईसाई परिवार में जन्में मापिल्लई के पिता सफल कारोबारी थे, लेकिन जिन हालातों में कंपनी की शुरुआत हुई वो काफी चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
जब त्रावणकोर के राजा आजादी की लड़ाई में शामिल हुए तो उन्होंने मपिल्लई के पिता की प्रॉपर्टी को जब्त कर लिया। नतीजा, पिता का कारोबार ठप हो गया। हालांकि हालातों से लड़ते हुए एक गुब्बारा बनाने वाली कंपनी शुरू की गयी।
कंपनी के शुरुआती दौर में मपिल्लई ने खुद एक-एक दुकान पर जाकर गुब्बारा बेचना शुरू किया। आजादी के बाद हालात बदले और कारोबार को नई तरह विस्तार करने की योजना बनायी। 1954 में रबर उत्पादन की ट्रेनिंग लेने के बाद इससे जुड़ा कारोबार शुरू किया।
1962 में रबर के टायर बनाने शुरू किये। देश में एमआरएफ के टायरों को पॉपुलैरिटी मिलनी शुरू हुई। साल 1964 कंपनी के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसी साल कंपनी ने टायर अमेरिका एक्सपोर्ट करने शुरू किये।
समय के साथ कंपनी ने विस्तार किया। 1989 में एमआरएफ ने स्पोर्ट्स में एंट्री की। 1989 में खिलौने बनाने वाली दिग्गज कंपनी हैसब्रो इंटरनेशनल यूएसए के साथ हाथ मिलाया। 1993 में बिजनेस के क्षेत्र में योगदान के लिए मपिल्लई को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। मपिल्लाई यह सम्मान पाने वाले पहले दक्षिण कारोबारी रहे हैं।
कंपनी ने 1973 में पहला रेडियल टायर बनाया। इसके बाद कंपनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। एमआरएफ की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, पहली बार 2007 में एमआरएफ ने एक अरब अमेरिकी डॉलर का कारोबार करके रिकॉर्ड बनाया। अगले 4 सालों में कारोबार बढ़कर 4 गुना तक पहुंच गया।
कंपनी वर्तमान में वाहनों, हवाईजहाज के साथ लड़ाकू विमान सुखोई के लिए भी टायर बना रही है। दुनिया के 65 देशों में एमआरएफ के उत्पादों की पहुंच है। एमआरएफ की कंपनी ने समय-समय पर अपने निवेशकों को मालामाल किया है।
एनएसई की वेबसाइट के मुताबिक, 1991 कंपनी के एक शेयर की कीमत मात्र 11 रुपये थी। यह पहला मौका नहीं है जब कंपनी के शेयर 1 लाख के पार पहुंचे। फरवरी 2021 में भी कंपनी के शेयर्स ने 1 लाख रुपए की कीमत का आंकड़ा पार किया। इसके बाद कंपनी कई बार अपने रेवेन्यू के कारण चर्चा में रही।