अजय दीप वाधवा
एबीएन बिजनेस डेस्क। कुछ वर्ष तक यह माना जाता था कि भारत की आधी अर्थव्यवस्था काली कमाई की है। कई बैंकिंग विशेषज्ञों का यह मानना था कि शायद इसी कारण रिजर्व बैंक आफ इंडिया भारत की मुद्रा आपूर्ति की प्रणाली को सफलतापूर्वक नियंत्रित नहीं कर पाता; क्योंकि पूर्ण मुद्रा आपूर्ति का लगभग आधा भाग बैंकिंग प्रणाली में आता ही नहीं है।
उसका लेन देन बेकिंग प्रणाली के बाहर ही हो जाता है और यह बहुत हद तक सही भी है। आप किसी भी बड़े लेन देन, जैसे संपति आदि की खरीद बिक्री, के बारे में किसी से भी बात करें, वो वह पहले यह जानना चाहेगा कि इस लेन देन में नकद का क्या प्रतिशत होगा, क्योंकि यह नकद राशि काले पैसे का हिस्सा होती है।
भारत में रिश्वत मांगने और देने में अधिकांश लोगों को कोई शर्म भी अब महसूस नहीं होती। वास्तव में रिश्वत मांगने एक ढंग से भीख मांगना है क्योंकि दोनों में एक व्यक्ति दूसरे से पैसा मांगता है; पर अब रिश्वत लेने वाले इस हीन भावना से ऊपर उठ चुके हैं।
हाल के वर्षों में भारत सरकार ने इस काले धन पर चोट करने कोशिश की है। नोट बंदी, इनकम टैक्स की पूछ ताछ और एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) की रेड इसी दिशा में उठाये गये कदम हैं।
इसी दिशा में एक कदम और उठाते हुए भारत सरकार ने 3 मई 2023 को एक आदेश निकाला की अब चार्टेड एकाउंटेंट, कॉस्ट एंड मैनेजमेंट एकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी अगर अपने क्लाइंट की तरफ से अवैध वित्तीय या पूंजीगत संपति लेन देन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होते हैं।
इसे रोक पाने में या इसकी सूचना देने में असफल होते है तो वो भी इसमें दोषी माने जायेंगे। इस आदेश के तहत अब सीए, सीएमए और सीएस को अपने मुवक्किल की तरफ से किए जाने वाले चल / अचल संपत्ति के कारोबार, वित्तीय प्रतिभूति की खरीद बिक्री आदि अनेक लेने देन पर नजर रखनी होगी और किसी भी संभावित लेन देन के पूर्व नियमों के पालन का ध्यान रखना होगा।
हालांकि यह आदेश बहुत कड़ा है और इसका निर्दोष सीए/ सीएमए/ सीएस पर विपरीत प्रभाव पड़ने की पूरी संभावना है पर इस आदेश को लाने के पीछे सरकार का एक अनुभव भी रहा है। अभी हाल के वर्षों में जितने बड़े राजनीतिज्ञों या नौकरशाहों के यहां अवैध संपति एकत्र करने के लिए छापे पड़े है, उनमें अधिकांश में यह पाया गए कि उनकी अवैध कमाई का लेखा-जोखा कोई न कोई अकाउंटेंट कर रहा था और ये अकाउंटेंट न सिर्फ लेखा-जोखा कर रहे थे बल्कि अपने घरों या कार्यालयों में उस अवैध कमाई की नकदी का एक बड़ा हिस्सा रख भी रहे थे।
कुछ लोगों का तो यह भी मानना रहा है कि इतनी बड़ी अवैध कमाई को कहीं निवेशित करने या छुपाने का कार्य बिना प्रोफेशनल अकाउंटेंट के हो ही नहीं सकता। कुछ सरकारी वर्ग का यह भी मानना है कि अवैध और काली कमाई को कर प्रणाली से बचाने के उपाय बिना प्रोफेशनल अकाउंटेंट के हो ही नहीं सकता।
यह सारे आरोप सही नहीं भी हो सकते हैं पर सरकार ने इस दिशा में एक कदम और उठा लिया है और अब सीए/सीएमए/ सीएस को अपने क्लाइंट लेन देन और अधिक ध्यान देने के लिए मजबूर कर दिया है। (लेखक राजधानी रांची के प्रख्यात कर एवं निवेश सलाहकार हैं।)