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टैक्स स्लैब और मिडिल क्लास

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टैक्स स्लैब और मिडिल क्लास
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अजय दीप वाधवा 

एबीएन बिजनेस डेस्क। आयकर का नयी कर व्यवस्था इस वर्ष फरवरी में पेश किये गये बजट 2023 में वित्त मंत्री ने टैक्स व्यवस्था में बदलाव किया और अप्रैल 2023 माह से नयी टैक्स प्रणाली (रिजाइम) को ही मुख्य कर प्रणाली बनाने की घोषणा की थी। इसके तहत 3 लाख रुपये तक की सालाना कमाई वाले टैक्सपेयर्स को टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है।

अर्थात उसे कोई आय कर नहीं देना होगा; जबकि 15 लाख रुपये तक सालाना कमाई वाले करदाताओं को नई कर व्यवस्था 2023 का चुनाव करने पर सीधे 37,500 रुपये की बचत होगी। मिडिल क्लास को राहत देते हुए बजट 2023 में वित्त मंत्री ने नई कर व्यवस्था को रिवाइज करते हुए टैक्स स्लैब की संख्या को घटाकर 5 कर दिया और टैक्स रेट्स में भी बदलाव किया।                 

रिवाइज नई कर व्यवस्था 2023 में टैक्स रेट्स इस प्रकार हैं :- 

  • 0-3 लाख  आय पर शून्य कर
  • 3-6 लाख आय पर  5% आय कर
  • 6-9 लाख आय पर 10%
  • 9-12 लाख आया पर 15%
  • 12-15 लाख आय पर  20%
  • 15 लाख से अधिक  आय पर 30%      

नई कर व्यवस्था को रिवाइज करने से पहले सालाना 15,00,000 लाख रुपये की कमाई करने वाले टैक्सपेयर्स को अनुमानता 1,87,500 रुपये टैक्स देना होता था, लेकिन, रिवाइज नयी कर व्यवस्था 2023 के बाद अब टैक्सपेयर्स को केवल 1,50,000 रुपये टैक्स देना होगा। इसका मतलब है कि अब टैक्सपेयर्स को सीधे 37,500 रुपये की बचत हो सकती है। 

इसी तरह 9,00,000 रुपये की सालाना आय वालों को केवल 45 हजार रुपए टैक्स देना होगा जो की उसकी आय का केवल 5 प्रतिशत है। रिवाइज नई टैक्स व्यवस्था के अनुसार इससे पहले तक 5,00,000 रुपये तक की सालाना आय पर कोई भी टैक्स नहीं देना होता था, लेकिन, अब यह सीमा बढ़ाकर 7,00,000 रुपये कर दी गयी है।  

वेतन भोगी वर्ग अपने वेतन से स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा भी नई व्यवस्था में उठा सकेंगे। रिवाइज नई टैक्स व्यवस्था के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 रुपये होगा, जो पहले शून्य होता था। 

पहले ओल्ड टैक्स व्यवस्था चुनने का विकल्प मौजूद था पर अब यह साफ किया गया है कि रिवाइज नयी आयकर व्यवस्था को डिफॉल्ट टैक्स व्यवस्था रखा गया है, पर  टैक्सपेयर्स ओल्ड टैक्स व्यवस्था का विकल्प भी चुन सकते हैं। (लेखक झारखंड की राजधानी रांची के प्रख्यात कॉस्ट अकाउंटेंट और कर विशेषज्ञ हैं।)

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