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म्युचुअल फंड : वित्त वर्ष 2023 में बाजार में झोंके 1.73 लाख करोड़

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म्युचुअल फंड : वित्त वर्ष 2023 में बाजार में झोंके 1.73 लाख करोड़
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  • विदेशी संस्थागत निवेशकों ने वित्त वर्ष 2023 में 35,000 करोड़ रुपये निकाले 

अभिषेक कुमार 

एबीएन बिजनेस डेस्क। म्युचुअल फंडों ने वित्त वर्ष 2023 में शेयरों में 1.73 लाख करोड़ रुपये झोंके हैं। फंडों की तरफ से यह निवेश तब आया, जब भारतीय शेयर बाजार की हालत खराब थी और विदेशी निवेशक तेजी से बिकवाली कर रहे थे। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष के 12 में से 11 महीनों में म्युचुअल फंडों ने शेयर बाजार में शुद्ध लिवाली की। 

पिछले वित्त वर्ष में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 35,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वित्त वर्ष 2022 में एफआईआई शुद्ध बिकवाल रहे थे और उन्होंने बाजार से 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयर बेचे थे। 

स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अंबरीश बलिगा ने कहा कि जब एफआईआई तेजी से निवेश निकाल रहे थे तब म्युचुअल फंडों द्वारा किए गए निवेश की बदौलत बाजार वित्त वर्ष 2022-23 में मजबूती से डंटा रहा।

म्युचुअल फंडों में ज्यादातर रकम खुदरा निवेशकों से आती है। इसलिए तत्काल रकम निकलने की आशंका कम रहती है, जिससे बाजार को स्थिरता एवं मजबूती मिलती है। कुल मिलाकर देसी संस्थागत निवेशकों ने वित्त वर्ष 2023 में 2.56 लाख करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे। डीआईआई में म्युचुअल फंड भी आते हैं। 

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक एवं मुख्य निवेश अधिकारी चोकालिंगम कहते हैं कि देसी स्रोतों से लगातार रकम आने से विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बावजूद बाजार में बहुत बड़ी गिरावट नहीं आई।

मगर हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि देसी निवेशकों की तुलना में विदेशी निवेशकों से आने वाली रकम के प्रति हमारा बाजार ज्यादा संवेदनशील रहता है। यही वजह है कि देसी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारी निवेश के बाद भी बाजार का प्रदर्शन फीका ही रहा। 

वित्त वर्ष 2023 में शेयर बाजार से शायद ही कोई प्रतिफल मिला। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स और नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी लगभग सपाट रहे। डीआईआई द्वारा भारी भरकम निवेश के बावजूद दुनिया भर में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी, रूस-यूक्रेन युद्ध, महंगाई और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बैंकिंग संकट जैसे कारकों से शेयरों का प्रदर्शन प्रभावित हुआ। 

पिछले वित्त वर्ष में अनिश्चितता और निवेशकों के कमजोर उत्साह के बावजूद खुदरा निवेशकों ने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स के जरिये निवेश जारी रखा। पहले 11 महीनों में एसआईपी के जरिये कुल 1.40 लाख करोड़ रुपये की निवेश आया। यह वित्त वर्ष 2022 में एसआईपी के जरिये आए कुल निवेश से 14 प्रतिशत अधिक रहा। 

नुवामा वेल्थ के अध्यक्ष एवं प्रमुख राहुल जैन कहते हैं कि बाजार में निवेश संबंधी रुझान में बदलाव दिख रहा है। निवेशक अब बाजार में छोटी अवधि के दांव लगाने में अधिक दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। 

अधिक से अधिक निवेशक समझने लगे हैं कि शेयरों में निवेश से बड़ा मुनाफा हासिल करना है तो लंबे समय तक निवेश बनाए रखना होगा। यही वजह है कि बैंक जमा, सोना और रियल एस्टेट के बजाय लोग शेयरों में निवेश को तरजीह दे रहे हैं। 

एसआइपी से आने वाली ज्यादातर रकम इक्विटी योजनाओं में जाती है। आंकड़ों के अनुसार 10 एसआइपी में केवल 1 की रकम डेट योजना में जाती है।

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