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रायगढ़ में दो साल में होगा 50 मिलियन टन कोयले का उत्पादन

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रायगढ़ में दो साल में होगा 50 मिलियन टन कोयले का उत्पादन
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रवि रंजन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अगले दो सालों में मांड-रायगढ़ कोल फील्ड पुरानी माइंस के साथ नई माइंस डेवलप करने पर काम चल रहा है। वर्तमान में 12.25 मिलियन टन कोयला प्रतिवर्ष निकाला जा रहा है जो अगले साल तक 21 मिलियन टन हो जाएगा। नई खदानें शुरू होने के बाद यह करीब 50 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक हो जायेगा।

वर्तमान में रायगढ़ में छाल माइंस 3.5 एमटी, बरौद 3.5 एमटी, जामपाली 3 एमटी और बिजारी 2.25 एमटी प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता है। सभी खदानों का माइनिंग प्लान रिनीवल हो रहा है। एसईसीएल ने बरौद को 10 एमटी, जामपाली को 4.5 एमटी और छाल को 6 एमटी प्रतिवर्ष बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेज दिया है। कोयला उत्पादन के क्षेत्र में इन दिनों बड़ी हलचल मची हुई है। चारों पुरानी माइंस का उत्पादन ही अकेले 20.5 एमटी हो जाएगा जो वर्तमान से करीब दो गुना है।

देश में साल दर साल बिजली की मांग में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इसे पूरा करने के लिए कोयले के अलावा कोई बड़ा विकल्प नहीं है। इसलिए कोल इंडिया तेजी से कोयला खदानों का विकास करने पर काम कर रहा है। एसईसीएल रायगढ़ क्षेत्र में भी खदानों की क्षमता वृद्धि के साथ नई माइंस को डेवलप करने पर काम चल रहा है।

 अचानक से उत्पादन क्षमता को दोगुना करने के पीछे आगामी वर्षों में बिजली की बढ़ती मांग ही है। इसके साथ तीन तई खदानें पेलमा, दुर्गापुर और पोरडा-चिमटापानी भी शुरू हो जाएंगी जिसके लिए भूअर्जन प्रारंभ हो चुका है।

तीन खदानों में ही 31 एमटी उत्पादन : इसके अलावा कोल मिनिस्ट्री ने एसईसीएल को पेलमा 15 एमटी, दुर्गापुर 6 एमटी और पोरडा-चिमटापानी 10 एमटी क्षमता वाली तीन माइंस भी आवंटित की थी। पेलमा का एमडीओ हो चुका है जबकि बाकी दोनों की प्रक्रिया चल रही है। भूअर्जन भी जल्द प्रारंभ होना है। इन तीनों खदानों को अगले दो साल में शुरू किया जाना है।

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