अजय दीप वाधवा
एबीएन बिजनेस डेस्क। छोटे व्यापारियों के लिए जीएसटी में कंपोजिशन स्कीम है, जिसे अपनाने पर व्यापारी को अपने सभी लेन-देनों का अलग-अलग डिटेल नहीं देना पड़ता। उन्हें अपने पूरे कारोबार का सिर्फ एक निश्चित प्रतिशत टैक्स चुकाना पड़ता है। वस्तुओं के कारोबार का 1% चुकाना पड़ता है और सेवाओं के कारोबार पर, उनकी कैटेगरी के हिसाब से 5 से 6% तक चुकाना पड़ता है।
सामान्य श्रेणी को राज्यों के ऐसे कारोबारी, जिनका सालाना टर्न ओवर 1.5 करोड़ रुपये या इससे कम है, वे कंपोजिशन स्कीम अपना सकते हैं। पर विशेष श्रेणी के राज्यों (उतरी भारत के 8 राज्य, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश) के ऐसे कारोबारी, जिनका सालाना टर्नओवर 75 लाख रुपये या इससे कम है, वे भी कंपोजिशन स्कीम अपना सकते हैं। सेवा क्षेत्र में सालाना 50 लाख रुपए से कम टर्नओवर वाले व्यवसायी कंपोजिशन स्कीम अपना सकते हैं।
कुल टर्नओवर की गणना के लिए, एक पैन नंबर के तहत, होने वाले सभी कारोबारों को शामिल किया जाएगा। क्योंकि एक व्यक्ति या संस्थान के अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग कारोबारों को एक ही पैन के आधार पर अलग-अलग जीएसटी नंबर जारी किए जाते हैं। कंपोजिशन स्कीम अपनाने वाले कारोबारी, टैक्स की रसीद / टैक्स इनवॉइस जारी नहीं कर सकते क्योंकि इन्हें अपने ग्राहकों से टैक्स लेने का अधिकार नहीं होता। इसकी बजाय कंपोजिशन कारोबारियों को अपनी जेब से टैक्स चुकाना पड़ता है। इन्हें अपने बिल पर ऊपर की तरफ इस बात का उल्लेख भी करना होता है कि वे कंपोजिशन टैक्सेबल पर्सन है और जीएसटी लेने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
इसके अलावा, इन कारोबारियों के साथ और प्रतिबंध और शर्तें भी होती हैं, जैसे वे अपनी खरीदारियों पर चुकाए गए जीएसटी के बदले में इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए क्लेम नहीं कर सकते हैं, जीएसटी के दायरे से बाहर की वस्तुओं का कारोबार नहीं कर सकते जैसे कि शराब आदि, रिवर्स चार्ज सिस्टम के तहत होने वाले सौदों पर नॉर्मल रेट्स के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा, ऐसे कारोबारियों को अपने सभी बिलों और जारी की जाने वाली नोटिस पर कंपोजिशन टैक्सेबल पर्सन का उल्लेख करना अनिवार्य है, अपनी दुकान या आॅफिस के बाहर लगे साइनबोर्ड पर भी कम्पोजिशन टैक्सेबल पर्सन का उल्लेख होना चाहिए।
अगर किसी कारोबारी के अलग-अलग कई तरह के कारोबार है, तो सभी तरह के कारोबारों का टर्नओवर जोड़कर कंपोजिशन के लिए निर्धारित लिमिट से अधिक नहीं होनी चाहिए ; जैसे कि एक ही मालिक के ग्रॉसरी, इलेक्ट्रॉनिक, टेक्सटाइल वगैरह का व्यवसाय है तो सब का टर्नओवर मिला कर कम्पोजिशन स्कीम की सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। छोटे व्यवसायियों को इस स्कीम का लाभ लेना चाहिए क्योंकि इसके अंर्तगत कागजात कम रखने होते हैं और मासिक जीएसटी रिटर्न के स्थान पर त्रैमासिक रिटर्न ही भरना होता है। (लेखक राजधानी रांची के सुप्रसिद्ध कर सलाहकार हैं।)