एबीएन बिजनेस डेस्क। कोका कोला चर्चा में है, चर्चा की वजह है वो खास तरह की बोतल जिसे कंपनी ने में मार्केट में उतारा है। कंपनी ने दिवाली के मौके पर ऐसी बोतल पेश की है जिसका ढक्कन ब्लूटूथ के जरिये अनलॉक किया जा सकता है। कोका कोला उन ब्रांड में शामिल है जिसने सॉफ्ट ड्रिंक की दुनिया में रिकॉर्ड बनाया। आज यह कंपनी दुनिया के 200 देशों में 200 से ज्यादा ब्रांड बेच रही है। कोका कोला की शुरुआत 1886 को अटलांटा में हुई। इसकी शुरुआत की फार्मासिस्ट जॉन पेम्बर्टन ने। अपनी लैब में जॉन ने दवा से जुड़े प्रयोग करने के दौरान सोडे से खास तरह लिक्विड बनाया। इसे तैयार करने के बाद कुछ लोगों को इसका स्वाद चखने के लिए दिया तो उन्होंने बहुत पसंद आया। इस तरह कोका कोला का फॉर्मूला खोजा गया, लेकिन आज भी इसका फॉर्मूला तिजोरी में बंद है।
कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, 8 मई 1886 ही वो दिन था जब पहली बार लोगों ने कोका कोला का स्वाद चखा। शुरुआती दौर में इसे बोतल में नहीं, बल्कि गिलास में सर्व किया जाता था। रोजाना इसके नौ गिलास ही बिकते थे। धीरे-धीरे लोगों की जुबान पर इसका स्वाद चढ़ने लगा। इस सॉफ्ट ड्रिंक को नाम देने का काम किया जॉन के अकाउंटेंट फ्रैंक रॉबिनसन ने। उनका मानना था कि अगर कंपनी का नाम "सी" से रखा जाए तो कंपनी को फायदा होगा।
चौंकाने वाली बात है कि यह कंपनी सिर्फ इसका सीरप बनाती है। इसमें पानी और शुगर दूसरी जगह मिलाया जाता है। पिछले 136 सालों के सफर में कंपनी अपना सीरप बॉटलिंग पार्टनर को बेचती है। वो पार्टनर इसमें पानी, स्वीटनर, सोडा के साथ बोतल में पैक करके मार्केट तक पहुंचाता है। समय के साथ कंपनी ने अलग-अलग तरह के सॉफ्ट ड्रिंक भी तैयार किए लेकिन कोका कोला के टेस्ट में बदलाव नहीं किया। वर्तमान में कंपनी के फैंटा, थम्सअप और स्प्राइट समेत 200 ब्रैंड मार्केट में मौजूद हैं।
कोका कोला का सीरप कैसे तैयार होता है और उसकी रेसिपी क्या है, यह आज तक सीक्रेट है जिसकी सटीक जानकारी सिर्फ कंपनी के एक-दो लोगों के पास ही है। कोका कोला के फॉर्मूले की ओरिजनल कॉपी अटलांटा के सन ट्रस्ट बैंक में रखी गई है। बैंक कभी उसे किसी के साथ साझा न करे, इसके लिए कंपनी ने उसे अपने 48.3 मिलियन शेयर दे रखे हैं। इतना ही नहीं, ट्रस्ट के उच्चाधिकारियों को कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल किया गया है।
कंपनी को अपनी सॉफ्ट ड्रिंक्स के लिए जितनी पॉपुलैरिटी मिली उतना ही इसकी खामियों को भी गिनाया गया। इसे दुनियाभर में सबसे ज्यादा पॉल्यूशन फैलाने वाली कंपनी के तौर पर भी जाना गया। 2020 में इसे यह नाम दिया गया। अमेरिकी एनजीओ की रिपोर्ट कहती है, कंपनी की पैकिंग से हर साल 29 लाख टन का कचरा दुनियाभर में फैलता है।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि जिस कंपनी को दुनिया की सबसे बड़ी प्रदूषक कंपनी के तौर पर जाना जाता है, वो संयुक्त राष्ट्र में जलवायु परिवर्तन कॉन्फ्रेंस की स्पॉन्सर रही है। कंपनी की स्पॉन्सरशिप पर सवाल उठ रहे हैं। कंपनी के इस दोहरे रवैये के कारण सोशल मीडिया परउसे ट्रोल किया जा रहा है।
भारत में कोका कोला की पहली एंट्री 1956 में हुई। कंपनी ने तेजी से कारोबार बढ़ाना शुरू किया क्योंकि तब व्यापार को लेकर कानून बहुत सख्त नहीं था। 1974 में तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने फॉरेन एक्सचेंज एक्ट को लागू किया। इसके बाद में कंपनी ने भारत में कारोबार बंद कर दिया। 1993 में उदारीकरण की नीतियों के कारण एक बार फिर कंपनी ने भारत में एंट्री की और देश में एक नामी ब्रांड बनकर उभरा।