जेएसएससी जेई पेपर लीक का आरोपी निकला आईआईटी का पूर्व छात्र, 15 लाख रुपये में बेचता था प्रश्नपत्र
टीम एबीएन, रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की कनीय विद्युत अभियंता नियुक्ति परीक्षा से जुड़े पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। झारखंड डिप्लोमा स्तर संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (जेई भर्ती)-2021 के पेपर लीक का मुख्य सूत्रधार परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसी मेसर्स बिंसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड का पूर्व निदेशक अरुण कुमार उर्फ अरुण शर्मा निकला है। आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका अरुण प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर डेटा लीक करने वाले पूरे सिंडिकेट में अहम भूमिका निभा रहा था।
रांची पुलिस ने अपर न्यायायुक्त की विशेष अदालत में दाखिल केस डायरी में इस पूरे मामले का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, अरुण कुमार ने एजेंसी के निदेशक पद से इस्तीफा देने के बावजूद उसका वास्तविक संचालन अपने हाथ में रखा था। आरोप है कि उसने अभ्यर्थियों से 15-15 लाख रुपये या इससे अधिक रकम लेकर उन्हें लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए थे।
मुंबई से गिरफ्तार हुआ था मुख्य आरोपी
रांची पुलिस ने अरुण कुमार को सात अगस्त को मुंबई से गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में भी प्रश्नपत्र लीक करने, ओएमआर शीट में हेराफेरी और दूसरी गड़बड़ियों में उसकी संलिप्तता सामने आई। इसके बाद सीआईडी ने जेपीएससी परीक्षा से जुड़े मामले में भी अरुण कुमार को आरोपी बनाया। सीआईडी ने 13 से 17 अगस्त तक उससे गहन पूछताछ की थी। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि अरुण कुमार ने कथित तौर पर अवैध तरीके से अपनी एजेंसी बिंसिस टेक्नोलॉजी को जेपीएससी की परीक्षाओं के संचालन का ठेका दिलाया था।
रांची पुलिस ने नामकुम थाने में वर्ष 2022 में दर्ज मुकदमे की केस डायरी में अरुण कुमार की भूमिका का विस्तार से ब्योरा दिया है। पुलिस के अनुसार, अरुण कुमार ने 26 अगस्त 2019 को बिंसिस टेक्नोलॉजी के निदेशक पद से आधिकारिक रूप से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, जांच में पाया गया कि उसका इस्तीफा केवल दिखावा था। पद छोड़ने के बाद भी एजेंसी के वास्तविक कामकाज पर उसी का नियंत्रण बना हुआ था।
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के तत्कालीन सचिव अशोक कुमार खेतान और परीक्षा नियंत्रक सह उप सचिव मधुमिता कुमारी के बयानों से भी इस बात की पुष्टि हुई है। दोनों अधिकारियों ने अपने बयान में बताया कि कनीय विद्युत अभियंता नियुक्ति परीक्षा से जुड़ी हर उच्चस्तरीय गोपनीय बैठक में अरुण कुमार एजेंसी के तत्कालीन निदेशक अजित कुमार के साथ शामिल होता था।
प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर परिणाम तैयार करने तक एजेंसी के पास थी जिम्मेदारी
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने बिंसिस टेक्नोलॉजी को परीक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम सौंपे थे। इनमें प्रश्नपत्रों की छपाई, परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की बायोमीट्रिक और फोटोग्राफिक कैप्चरिंग, ओएमआर शीट की स्कैनिंग, डेटा प्रोसेसिंग और अंतिम परिणाम तैयार करने तक की जिम्मेदारी शामिल थी। पुलिस के अनुसार, अरुण कुमार इन सभी प्रक्रियाओं में शामिल था। आरोप है कि उसने अपनी इस पहुंच का गलत फायदा उठाया और तीन जुलाई 2022 को होने वाली परीक्षा से पहले ही सीलबंद प्रश्नपत्र व्हाट्सएप के जरिये लीक कर दिया।
इस तरह परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी अभिषेक कुमार और अभ्यर्थी पंकज कुमार मंडल ने पुलिस पूछताछ में कई अहम खुलासे किए थे। उनके मुताबिक, अरुण कुमार और उसके सिंडिकेट ने अभ्यर्थियों से 15-15 लाख रुपये या उससे अधिक रकम लेकर उन्हें हल किया हुआ प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया था।
पुलिस के अनुसार, परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को गोपनीय ठिकानों पर ले जाया गया था। वहां उन्हें लीक हुए प्रश्नपत्र के उत्तर रटवाये गये, ताकि वे परीक्षा में उन्हीं सवालों के जवाब दे सकें। जांच में सामने आये इन तथ्यों के आधार पर पुलिस ने केस डायरी में अरुण कुमार को पूरे पेपर लीक सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार बताया है।