एसआर डीएवी पुंदाग में राष्ट्रीय एकता दिवस सह कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए परामर्श सत्र का आयोजन
एबीएन कैरियर डेस्क। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल,पुंदाग में राष्ट्रीय एकता दिवस श्रद्धा भाव से मनाया गया। इस वर्ष इस समारोह का थीम नक्सल मुक्त भारत रखा गया था। झारखंड पब्लिक स्कूल्स, जोन- जेके एआरओ सह एसआर डीएवी पुंदाग के प्राचार्य डॉ तापस घोष ने शिक्षक तथा विद्यार्थियों के साथ भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके अतुलनीय योगदान को याद करते हुए सभा को संबोधित किया।
साथ ही विद्यार्थियों के भावनात्मक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन एवं शैक्षणिक तैयारी के महत्व को ध्यान में रखते हुए कक्षा एवं कक के विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों के लिए एक विशेष परामर्श सत्र (काउंसलिंग सेशन) का आयोजन किया गया। इस अवसर पर रांची के कांके स्थित रिनपास से आये दो विशिष्ट विशेषज्ञों ने अपने विचार एवं महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
रिनपास के प्रोजेक्ट तरंग में कार्यरत, आरसीआई पंजीकृत क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट एवं प्रोजेक्ट रिसर्च आॅफिसर राहुल शर्मा ने किशोरावस्था में होने वाले मानसिक तनाव, व्यवहार संबंधी चुनौतियों तथा भावनात्मक स्वास्थ्य के महत्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को मानसिक एवं भावनात्मक चुनौतियों को समझने तथा उनसे सकारात्मक ढंग से निपटने के लिए प्रेरित किया।
वहीं, रिनपास की सीनियर रिसर्च फेलो एवं पीएच.डी. शोधार्थी सुश्री आयशा आरिफ ने विशिष्ट अधिगम अक्षमता तथा अन्य तंत्रिका-विकास संबंधी स्थितियों, जैसे एडीएचडी एवं आॅटिज्म स्पेक्ट्रम डिसआॅर्डर के विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने बच्चों की व्यक्तिगत सीखने की क्षमताओं एवं आवश्यकताओं को समझने की आवश्यकता पर बल दिया।
मौके पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ. तापस घोष ने अपने संबोधन में किशोर विद्यार्थियों की भावनात्मक एवं मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं को समझने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मविश्वास से परिपूर्ण, भावनात्मक रूप से संतुलित एवं जिम्मेदार व्यक्तित्व का निर्माण करना भी है।
उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के साथ खुलकर संवाद करें, उनकी समस्याओं एवं भावनाओं को समझें तथा ऐसा सहयोगपूर्ण वातावरण प्रदान करें, जहां बच्चे स्वयं को सुना जाना, समझा जाना , सम्मानित एवं प्रोत्साहित महसूस कर सकें।
यह संवादात्मक सत्र विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। इसके माध्यम से उन्होंने किशोरावस्था की समस्याओं, व्यक्तिगत अधिगम आवश्यकताओं तथा शैक्षणिक दबाव एवं भावनात्मक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के उपायों को समझा।
इस आयोजन ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति विद्यालय की प्रतिबद्धता को पुन: रेखांकित किया। विद्यालय का उद्देश्य है कि प्रत्येक विद्यार्थी को उचित मार्गदर्शन, समझ, संवेदनशीलता एवं सहयोग प्राप्त हो, ताकि वह अपनी क्षमताओं को पहचानकर जीवन में सफलता की ओर अग्रसर हो सके। क्योंकि प्रत्येक बच्चा समझे जाने, सहयोग पाने और सफलता के लिए सशक्त बनाए जाने का हकदार है।