- टॉपर का हौसला तोड़ने में लगा रांची विवि का पत्रकारिता विभाग
- पैरवी वाले और अयोग्य को पढ़ाने का अवसर
- पीएचडी और गोल्ड मेडलिस्ट आउट
- मास कॉम में अतिथि शिक्षकों को रखने में निदेशक की मनमानी
- टॉपर कीर्ति चौहान को भी क्लास लेने का अवसर नहीं मिला
अजय/ बासुकीनाथ की विशेष रिपोर्ट
टीम एबीएन, रांची। रांची के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में अतिथि और विजिटिंग शिक्षकों को रखने में युनिवर्सिटी के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ायी जा रही है। निदेशक बसंत कुमार झा ने अपने संपर्क के योग्यता पूरी नहीं करने वाले अपने और पैरवी वालों को यहां तक कि साधारण मास्टर डिग्री वाले युवाओं को भी गेस्ट लेक्चरर बना रखा है। वहीं नेट, पीएचडी किये अतिथि शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
रांची विवि में पीजी टॉपर को उसके विषय में अतिथि शिक्षक के रूप में एक साल तक पढाने का अवसर दिया जाता है। आरयू के मास कॉम विभाग में भी यह परिपाटी चली आ रही थी। लेकिन इस वर्ष के मास कॉम पीजी टॉपर छात्रा कीर्ति चौहान के विभाग में पढाने के लिए आवेदन देने के बाद भी निदेशक ने यह अवसर नहीं दिया।
कीर्ति चौहान ने एबीएन न्यूज 24 को बताया कि उसने प्रयास किया है और आवेदन भी दिया है, लेकिन अब तक क्लास नहीं दिया गया है। रांची यूनिवर्सिटी की वीसी डॉ प्रो सरोज शर्मा ने कहा कि वे बाहर हैं और लौटने के बाद इस विषय पर विचार करेंगी।
वोकेशनल कोर्सेस में गेस्ट लेक्चरर रखने के लिए रांची युनिवर्सिटी का नियम है कि गेस्ट लेक्चरर के लिए उम्मीदवार का बायोडाटा युनिवर्सिटी से अप्रूव होने के बाद ही उसे पढाने दिया जायेगा। उम्मीदवार नेट/पीएचडी होना चाहिए। कुछेक मामलों में वरिष्ठता और अनुभव भी मान्य हैं। लेकिन मास कॉम निदेशक अपनी मर्जी से बिना युनिवर्सिटी अप्रूवल के कई गेस्ट लेक्चरर रख रहे हैं।
कुछ गेस्ट लेक्चरर ऐसे हैं जो नेट पीएचडी नहीं हैं। वहीं पिछले एक साल में कई नेट पीएचडी किये अतिथि शिक्षकों को हटा दिया गया है। डायरेक्टर ने कुछ पत्रकार मित्रों को गेस्ट लेक्चरर बना रखा है जो पत्रकार तो हैं, पर पढाने के काम के अनुभवी नहीं हैं। इससे छात्रों में भी निराशा है। विवि भी डायरेक्टर बसंत झा की इस मनमानी पर खामोश है। पत्रकारिता विभाग से राज्य का शैक्षनिक सम्मान जुड़ा है।