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लोहरदगा : बीएड कॉलेज की राष्ट्रीय संगोष्ठी में शिक्षा और जलवायु जागरूकता पर जोर

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लोहरदगा : बीएड कॉलेज की राष्ट्रीय संगोष्ठी में शिक्षा और जलवायु जागरूकता पर जोर
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एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोहरदगा के बीएड कॉलेज में शनिवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका विषय था- एनईपी 2020: जलवायु जागरूकता के माध्यम से शिक्षा का रूपांतरण। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। संगोष्ठी का उद्देश्य नई शिक्षा नीति 2020 के तहत पर्यावरणीय चेतना को शिक्षा के साथ जोड़ने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करना था। 

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और सम्मान के साथ हुई। बीएड कॉलेज के प्राचार्य एवं शिक्षकों ने पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र देकर मुख्य अतिथि सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों का अभिनंदन किया। कॉलेज परिसर में आयोजित इस संगोष्ठी में शिक्षकों, छात्र-छात्राओं एवं शिक्षा जगत से जुड़े कई विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। 

अपने संबोधन में धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 देश के भविष्य को दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जलवायु परिवर्तन एक गंभीर वैश्विक चुनौती बन चुका है, जिसका प्रभाव सीधे तौर पर मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ रहा है। ऐसे में शिक्षा के माध्यम से जलवायु जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। 

उन्होंने आगे कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में पर्यावरणीय शिक्षा को व्यवहारिक रूप से लागू करने की जरूरत है, ताकि छात्र-छात्राएं न केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्राप्त करें, बल्कि अपने दैनिक जीवन में भी पर्यावरण संरक्षण के उपायों को अपनाएं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों को जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में विशेष प्रयास करें। 

संगोष्ठी में विधायक प्रतिनिधि निशिथ जायसवाल, बीएस कॉलेज के प्रोफेसर शशि गुप्ता सहित कई शिक्षाविदों ने भी अपने विचार साझा किये। वक्ताओं ने कहा कि नई शिक्षा नीति में समग्र विकास पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण को भी एक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए शिक्षा संस्थानों की भूमिका अहम है। 

कार्यक्रम में महिला टीचर ट्रेनिंग कॉलेज, लोहरदगा के बीएड एवं एमएड के सभी शिक्षकगण उपस्थित रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भी संगोष्ठी में भाग लिया और विषय से संबंधित विभिन्न प्रश्नों एवं सुझावों के माध्यम से अपनी जिज्ञासा व्यक्त की। संगोष्ठी के दौरान जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि किस प्रकार शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। 

उन्होंने छात्रों को पेड़-पौधे लगाने, जल संरक्षण करने और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने जैसे छोटे-छोटे कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस संगोष्ठी ने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच को प्रोत्साहित किया, बल्कि जलवायु जागरूकता के महत्व को भी रेखांकित किया। आयोजकों ने उम्मीद जतायी कि इस प्रकार के कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किये जायेंगे, जिससे समाज में जागरूकता का स्तर और अधिक बढ़ सके।

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