बोर्ड परीक्षा के समय विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य में योग, प्राणायाम और ध्यान की वैज्ञानिक भूमिका : योगाचार्य महेश पाल
एबीएन कैरियर डेस्क। बोर्ड परीक्षा केवल प्रश्नपत्रों की परीक्षा नहीं होती, यह विद्यार्थियों के मन, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन की भी परीक्षा होती है। योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आती है, वैसे-वैसे बच्चों के चेहरे से मुस्कान गायब होने लगती है, नींद कम हो जाती है, मन हर समय डर और आशंका से भरा रहता है। अगर नंबर कम आ गए तो क्या होगा? अगर पेपर खराब हो गया तो? सब मुझसे आगे निकल गए तो? ऐसे विचार धीरे-धीरे बच्चे के मन पर हावी होने लगते हैं।
यही स्थिति आगे चलकर तनाव, घबराहट, अवसाद और कई शारीरिक समस्याओं का कारण बनती है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो परीक्षा के डर की स्थिति में बच्चे का मस्तिष्क लगातार फाइट ओर फ्लाइट मोड में चला जाता है। इस अवस्था में शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रिनेलाइन जैसे तनाव हार्मोन अधिक मात्रा में निकलने लगते हैं। इन हार्मोन का सीधा प्रभाव बच्चे की याददाश्त, एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ता है।
यही कारण है कि कई बार बच्चा घर पर सब कुछ याद होने के बावजूद परीक्षा कक्ष में जाकर भूल जाता है। दरअसल, यह भूलना नहीं होता, बल्कि तनाव के कारण मस्तिष्क का सही ढंग से कार्य न कर पाना होता है। आज की शिक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ी समस्या यह है कि परीक्षा को सफलता या असफलता का अंतिम पैमाना मान लिया गया है। बच्चा यह मानने लगता है कि उसके पूरे जीवन का मूल्यांकन कुछ घंटों की परीक्षा से हो जाएगा।
यही सोच धीरे-धीरे उसके आत्मविश्वास को कमजोर करती है। लगातार बना रहने वाला मानसिक दबाव सिरदर्द, पेट दर्द, उल्टी, भूख न लगना, नींद न आना, चिड़चिड़ापन और कई बार गंभीर मानसिक रोगों को जन्म देता है। डब्ल्यूएचओ भी यह मानता है कि लंबे समय तक रहने वाला तनाव बच्चों के मानसिक विकास में बाधा बन सकता है।
ऐसे समय में योग, प्राणायाम और ध्यान केवल परंपरागत अभ्यास नहीं रह जाते, बल्कि यह एक वैज्ञानिक उपचार पद्धति के रूप में सामने आते हैं। योग शरीर और मस्तिष्क के बीच संतुलन स्थापित करता है। जब बच्चा नियमित रूप से योगासन करता है, तो उसकी रीढ़ सीधी होती है, श्वसन प्रणाली बेहतर होती है और मस्तिष्क तक आक्सीजन की आपूर्ति बढ़ती है। इससे मस्तिष्क के वे हिस्से सक्रिय होते हैं जो एकाग्रता और स्मरण शक्ति से जुड़े होते हैं।
प्राणायाम का प्रभाव इससे भी गहरा होता है। जब बच्चा अनुलोम-विलोम या गहरी श्वास-प्रश्वास करता है, तो मस्तिष्क के दोनों हिस्सों तार्किक और भावनात्मक के बीच संतुलन बनता है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि नाड़ीशोधन और भ्रामरी प्राणायाम से पैरासिम्पेथैटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है, जो शरीर को शांत अवस्था में लाता है। इससे हृदय गति नियंत्रित होती है, रक्तचाप संतुलित रहता है और मन स्थिर होने लगता है।
भ्रामरी और नाड़ी शोधन प्राणायाम विशेष रूप से परीक्षा भय और घबराहट को कम करने में सहायक माना गया है, क्योंकि इससे मस्तिष्क में शांति से जुड़े रसायनों का स्राव बढ़ता है। ध्यान का महत्व परीक्षा काल में और भी अधिक हो जाता है। ध्यान के समय मस्तिष्क में अल्फा ब्रेन वेव्स उत्पन्न होती हैं, जो गहन एकाग्रता और मानसिक स्थिरता से जुड़ी होती हैं। नियमित ध्यान करने वाला बच्चा नकारात्मक विचारों से जल्दी बाहर निकल पाता है।
उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह परिस्थितियों को अधिक सकारात्मक दृष्टि से देखने लगता है। कई अंतरराष्ट्रीय शोध यह सिद्ध कर चुके हैं कि ध्यान करने वाले विद्यार्थियों में तनाव का स्तर कम होता है और परीक्षा प्रदर्शन बेहतर होता है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि न्यूरो-साइंस आधारित मानसिक प्रशिक्षण है। परीक्षा के समय कुछ महत्वपूर्ण योगिक अभ्यास जिसमें और प्राणायाम के बारे में जिसमें ताड़ासन, भुजंगासन, वज्रासन यह अभ्यास रीढ़ को सीधा रखते हैं, मस्तिष्क में आक्सीजन सप्लाई बढ़ाते हैं, नाड़ी शोधन प्राणायाम मस्तिष्क के दोनों भागों (लेफ्ट-राईट हेमिसफेयर) में संतुलन याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाता है, भ्रामरी प्राणायाम एंक्सिटी और फियर को कम करता है।
हर्ट रेट को नियंत्रित करता है, आज्ञाचक्र पर ध्यान सवासन और योगनिद्रा ध्यान करने से अल्फा बे्रन वेव्स सक्रिय होती हैं। नकारात्मक विचार कम होते हैं,आत्मविश्वास बढ़ता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोध के अनुसार नियमित ध्यान से तनाव में 40% तक कमी देखी गयी। 5 मिनट की परीक्षा से पूर्व योग अभ्यास मे 1 मिनट गहरी श्वास-प्रश्वास, 2 मिनट अनुलोम-विलोम 1 मिनट भ्रामरी, 1 मिनट सकारात्मक संकल्प मैं शांत हूं, मैं सक्षम हूं, मैं सफल हूं, परीक्षा जीवन का मूल्यांकन नहीं, बल्कि ज्ञान की अभिव्यक्ति है।
योग, प्राणायाम ध्यान और व्यवस्थित दिनचर्या पर्याप्त नींद संतुलित और सात्विक आहारचार्य के माध्यम से विद्यार्थी न केवल परीक्षा का सामना आत्मविश्वास से कर सकते हैं, बल्कि जीवनभर के लिए मानसिक संतुलन और स्वास्थ्य भी पा सकते हैं। यह भी समझना आवश्यक है बच्चों को अनजाने में कहे गए वाक्य पड़ोसी के बच्चे ने इतना स्कोर किया, इस बार तो अच्छे नंबर लाने ही होंगे बच्चे के मन पर गहरा असर डालते हैं। जबकि आवश्यकता इस बात की है कि बच्चे को यह महसूस कराया जाये कि उसकी मेहनत, उसका प्रयास सबसे महत्वपूर्ण है, केवल अंक नहीं।
यदि परीक्षा के समय बच्चों को रोज कुछ समय योग, प्राणायाम और ध्यान के लिए दिया जाए, यदि उन्हें यह समझाया जाये कि परीक्षा डरने की चीज नहीं बल्कि अपने ज्ञान को व्यक्त करने का माध्यम है, तो निश्चित रूप से उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सकारात्मक परिवर्तन आयेगा। ऐसा बच्चा न केवल परीक्षा बेहतर ढंग से दे पायेगा, बल्कि जीवन की हर चुनौती का सामना भी आत्मविश्वास से कर सकेगा।
अंतत: यह कहा जा सकता है कि स्वस्थ मन के बिना स्वस्थ भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती। बोर्ड परीक्षा के समय योग, प्राणायाम और ध्यान को अपनाना कोई अतिरिक्त कार्य नहीं, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक आवश्यक कदम है।