टीम एबीएन, रांची। एक्सआईएसएस, रांची ने ज़ेवियर यूनिवर्सिटी रांची के भविष्य पर चर्चा के लिए सोसाइटी ऑफ जीसस, रोम के उच्च शिक्षा सचिव, डॉ जोसेफ क्रिस्टी एसजे का स्वागत किया। जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सर्विस (एक्सआईएसएस), रांची, ने सोसाइटी ऑफ जीसस, रोम के उच्च शिक्षा सचिव, डॉ जोसेफ क्रिस्टी एसजे का स्वागत शुक्रवार को अपने संस्थान परिसर में किया।
डॉ क्रिस्टी का दौरा संस्थान के जेवियर यूनिवर्सिटी रांची (एक्सयुआर) के प्रस्तावित परिवर्तन पर केंद्रित था। सत्र की शुरुआत संस्थान के निदेशक, डॉ जोसफ मारियानुस कुजूर एसजे द्वारा संस्थान के 70 सालों के विरासत और समाज पर छोड़े गए प्रभाव पर एक प्रेजेंटेशन के साथ हुई।
उन्होंने शिक्षा, रिसर्च और सोशल वर्क के माध्यम से झारखंड और उसके बाहर के हाशिए पर पड़े समुदायों को सशक्त बनाने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई और सोशल वर्क एवं मैनेजमेंट एजुकेशन, लीडरशिप डेवलपमेंट और प्रोफेशनल नेटवर्क में एक्सआईएसएस के अग्रणी योगदान पर प्रकाश डाला।
डॉ जोसेफ क्रिस्टी एसजे, एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद हैं जो एक्सएलआरआई जमशेदपुर और लिबा चेन्नई में निदेशक के पदों पर रह चुके है और वर्तमान में इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ जेसुइट यूनिवर्सिटीज़ के अध्यक्ष भी हैं। डॉ क्रिस्टी ने संस्थान की सात दशक की यात्रा की सराहना करते हुए इसे देश के इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर" बताया।
जेसुइट उच्च शिक्षा संस्थानों के समक्ष वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, दुनिया भर में 175 से ज़्यादा संस्थानों और 8 लाख से ज़्यादा छात्रों के साथ, हमारी ज़िम्मेदारी बहुत बड़ी है। हमें छात्रों को ऐसे मानसिकता से गढ़ना है जो पीपल और प्लेनेट की परवाह करते हैं। कोविड की महामारी के बाद छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य एक प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है, जिसपर सभी को तत्परता से ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने सोसाइटी ऑफ जीसस के सुपीरियर जनरल फादर आर्तुरो सोसा एसजे के दुनिया में कार्यरत सभी जेसुइट् शिक्षण संस्थानों से किये गए आग्रह को रेखांकित किया जिसमें वे संघर्षरत क्षेत्रों में रह रहे छात्रों की शिक्षा पर विशेष जोर देने की बात करते है।
डॉ क्रिस्टी ने उच्च शिक्षा में प्रवेश ले रहे छात्रों को लेकर कहा, 21-25 वर्ष की आयु के ये सभी छात्र पहले से ही अपनी अलग विचार प्रक्रियाएँ लेकर आते हैं, और हालाँकि उन्हें नया रूप देना मुश्किल है, लेकिन जेसुइट शिक्षकों के रूप में यह हमारा कर्तव्य है कि हम यह प्रयास अवश्य करें।
इसके बाद एक प्रश्नोत्तर सत्र हुआ जहाँ फैकल्टी सदस्यों ने संस्थान के भविष्य, विकसित होती मैनेजमेंट एजुकेशन और छात्रों की बदलती मानसिकता पर उनके विचार जाने। सहायक निदेशक, डॉ प्रदीप केरकेट्टा एसजे ने फादर क्रिस्टी के साथ साथ सभी को धन्यवाद ज्ञापन दिया और संस्थान के यूनिवर्सिटी में विस्तार के लिए आशा व्यक्त की।
इस सत्र में डीन अकादमिक, डॉ अमर एरॉन तिग्गा, वित्त अधिकारी फादर अशोक कंडुलना, सभी कार्यक्रमों के प्रमुख, फैकल्टी सदस्य और प्रोजेक्ट ऑफिसर्स उपस्थित थे, और सत्र का समन्वयन डॉ प्रत्यूष रंजन ने किया।