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संत अल्बर्ट्स कॉलेज, रांची वार्षिक राष्ट्रीय शोध पर संगोष्ठी

संत अल्बर्ट्स कॉलेज, रांची वार्षिक राष्ट्रीय शोध पर संगोष्ठी
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विषय था- आशा के तीर्थयात्री: एक नवीनीकृत दृष्टि और मिशन की ओर 

टीम एबीएन, रांची। संत अल्बर्ट्स कॉलेज, रांची में वार्षिक राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष संगोष्ठी का विषय था आशा के तीर्थयात्री: एक नवीनीकृत दृष्टि और मिशन की ओर। जिसमें विद्वानों, शोधकर्ताओं, अतिथिगगणों, शिक्षकों और छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस अवसर पर सेवार्थं  कॉलेज द्वारा प्रकाशित वार्षिक पत्रिका का भी विमोचन किया गया। कार्यकर्म की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन व कॉलेज के रेक्टर फादर अजय कुमार खलखो के स्वागत संबोधन से हुआ।  

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो डॉ फादर सुधीर कुमार मिंज, एसजे, रेक्टर, सेंट जेवियर्स आॅटोनॉमस कॉलेज, रांची थे। अपने प्रेरणादायक भाषण में उन्होंने संगोष्ठी के विषय पर प्रकाश डालते हुए आशा, प्रतिबद्धता और नवीनीकरण की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने संदेश में कहा- स्वयं ईसा मसीह आशा के आधार स्तंभ रहे हैं, और उनके शिष्यों तथा प्रारंभिक ख्रीस्तियों ने पवित्र आत्मा की प्रेरणा से इस आशा को अपने जीवन में अपनाया। इतिहास गवाह है कि कलीसिया हमेशा किसी न किसी रूप में आशा की किरण बनी रही है। 

उसने सामाजिक उत्थान और आध्यात्मिक विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हमारे पूर्वजों ने जीवन में हताशा, असहायता और संघर्ष का अनुभव किया। उनकी आध्यात्मिक और सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मिशनरियों ने समर्पित होकर कार्य किया और आशा के तीर्थयात्री बने। उन्होंने इस यात्रा में अनेकों को जोड़ा और उनके जीवन में नया प्रकाश लाया।आज भी कलीसिया पवित्र आत्मा की प्रेरणा से समाज के उत्थान और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। पवित्र आत्मा की पुकार को सुनते हुए हम भी प्रेम, शांति और आशा के तीर्थयात्री बनें तथा नि:स्वार्थ सेवा के द्वारा इस मिशन को आगे बढ़ायें। उनकी गहन विचारधारा ने उपस्थित जनसमूह को नयी दृष्टि और ऊर्जा से भर दिया। 

संगोष्ठी के प्रमुख वक्ताओं में प्रो डॉ फादर जॉन क्रास्टा,  दिल्ली से डॉ सिस्टर लीना फर्नांडिस एसएमआई, प्रो डॉ सुमन कुमार एक्का, जमशेदपुर से फादर वलेरियन लोबो, प्रो डॉ राजू फेलिक्स क्रास्टा और संत अन्ना मदर हाउस से सिस्टर रंजीता मिंज डीएसए शामिल थे। संगोष्ठी में उपरोक्त विषयांतर्गत- द्वितीय वाटिकन महासभा के कुछ भाग, यूखरिस्तीय संस्कार आशा के प्रतिक, महिला नेतृत्व, घरेलू कलिसयाई समुदाय तथा छोटानागपुर में किये गये प्राम्भिक मिशन कर्यो पर प्रस्तुत किया गया। उनके गहन शोध पत्रों और विचारोत्तेजक प्रस्तुतियों ने प्रतिभागियों को विषय की व्यापक समझ प्रदान की और सार्थक चर्चा को प्रोत्साहित किया। 

इस संगोष्ठी को सफल बनाने में संयोजकों की अहम भूमिका रही। डॉ फादर राजू फेलिक्स क्रास्टा (निदेशक, सेंट अल्बर्ट्स इंस्टिट्यूट आॅफ फिलॉसफी) और प्रो डॉ सुमन कुमार एक्का (अध्यक्ष, फैकल्टी आॅफ थियोलॉजी, रांची) ने अपने कुशल नेतृत्व और अथक परिश्रम से कार्यक्रम को एक प्रभावशाली मंच प्रदान किया। संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों को सफलतापूर्वक संचालित करने में  फादर गुलशन मिंज और फादर आलोक टोप्पो को विशेष का योगदान रहा। उनके प्रभावी संचालन से विचार-विमर्श अधिक सारगर्भित और प्रवाहमय बना। 

इसके अलावा, फादर अजय कुमार खलखो  (रेक्टर), फादर एंथ्रेस सोरेंग और उनकी टीम   जिनका योगदान इस संगोष्ठी को सफल बनाने में महत्वपूर्ण रहा। इस अवसर पर शिक्षकों, आयोजन समिति, तकनीकी दल, स्वयंसेवकों और छात्रों के अथक प्रयासों को भी सराहा गया, जिनकी मेहनत और समर्पण ने इस कार्यक्रम को सफल और यादगार बनाया। 

अंत में, फादर प्रफुल बड़ा ने सभी प्रतिभागियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया गया, जिनकी उत्साही उपस्थिति और सक्रिय भागीदारी ने संगोष्ठी को और अधिक अर्थपूर्ण बनाया। फादर फेबियन कुल्लू ने मंच का सफल सञ्चालन किया।  इस संगोष्ठी के माध्यम से प्राप्त नयी दृष्टि और प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए, सभी ने आशा के तीर्थयात्री के रूप में ज्ञान, विकास और एक उज्जवल भविष्य की दिशा में अग्रसर रहने का संकल्प लिया।

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