बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन: स्वच्छ ऊर्जा का भविष्य विषय पर कार्यशाला का आयोजन
टीम एबीएन, मेसरा/ रांची। बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा 20 से 24 जनवरी 2025 तक ग्रीन हाइड्रोजन: स्वच्छ ऊर्जा का भविष्य विषय पर एक सप्ताह की कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला संस्थान की प्लेटिनम जुबली समारोह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और स्वच्छ ऊर्जा समाधान के रूप में ग्रीन हाइड्रोजन की अद्भुत क्षमता को उजागर करने पर केंद्रित है।
उन्नत राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (अठफऋ) और भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन प्रौद्योगिकियों, भंडारण की चुनौतियों, अनुप्रयोगों और नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों में इसके योगदान पर चर्चा करना है। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके उत्पादित ग्रीन हाइड्रोजन को ऊर्जा संक्रमण और उद्योगों, परिवहन और विद्युत क्षेत्रों के डीकाबोर्नाइजेशन के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।
उद्घाटन सत्र का नेतृत्व बिट्स मेसरा के कुलपति प्रो इंद्रनील मन्ना ने किया, जिन्होंने संस्थान की स्वच्छ ऊर्जा समाधानों में योगदान की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ नरसिंगा राव, जो आईआईटी हैदराबाद में संबद्ध प्रोफेसर हैं, ने ग्रीन हाइड्रोजन के औद्योगिक विकास और अनुसंधान-आधारित प्रयासों पर अपने विचार साझा किए। डॉ पी शन्मुगम, जो सीएसआईआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं, ने ऊर्जा क्षेत्र में ग्रीन हाइड्रोजन की भूमिका पर अपने बहुमूल्य अनुभव साझा किए।
इस कार्यशाला के प्रमुख विषयों में शामिल हैं:
- ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए सोलर और विंड ऊर्जा आधारित इलेक्ट्रोलिसिस की उन्नत विधियाँ।
- हाइड्रोजन के भंडारण और परिवहन के लिए रणनीतियां।
- स्टील, सीमेंट और केमिकल इंडस्ट्री में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग।
- ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत ढाँचे और वैश्विक सहयोग।
कार्यशाला में अकादमिक जगत, अनुसंधान संगठनों और ऊर्जा क्षेत्र के प्रतिष्ठित वक्ता और विशेषज्ञ शामिल हैं। तकनीकी सत्रों का नेतृत्व डॉ एके रॉय, प्रमुख, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, और डॉ अनिल कुमार, मुख्य संयोजक एवं प्रोफेसर, डीटीयू-दिल्ली, कर रहे हैं। डॉ ओम प्रकाश, संयोजक और डॉ लखबीर सिंह बराड़, सह-संयोजक, ने डॉ निर्मल कुमार, डॉ अर्कदेब मुखोपाध्याय, डॉ सुशांत घुकू, डॉ सौरव चक्रवर्ती और डॉ फैसल रहमानी, आयोजन सचिवों के साथ मिलकर इस कार्यशाला का सफलतापूर्वक समन्वय किया है। यह कार्यक्रम ज्ञान-साझाकरण और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इंटरैक्टिव चर्चाओं और पैनल वाद-विवाद को भी शामिल करता है। यह कार्यशाला छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों को ग्रीन हाइड्रोजन की संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। साथ ही, यह बिट्स मेसरा की नवाचार और स्थायी ऊर्जा समाधान को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।