टीम एबीएन, रांची। जेवियर समाज सेवा संस्थान (एक्सआईएसएस), रांची और स्विच आन फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान निकालने और स्थिरता की दिशा में सामूहिक कार्रवाई को प्रेरित करने के लिए मूव फॉर अर्थ सिम्पोजियम 2024 का आयोजन शुक्रवार को संस्थान परिसर में किया।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण से सम्बंधित विषयों की तत्काल आवश्यकता को पहचानते हुए झारखंड राज्य के हितधारकों ने इस सिम्पोजियम में भाग लिया, जिसका उद्देश्य सकारात्मक बदलाव के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना था। इस आयोजन में सरकार, उद्योग, गैर सरकारी संगठनों, शिक्षा जगत और अन्य सहित कई क्षेत्रों से सक्रिय भागीदारी देखी गयी।
सिम्पोजियम की शुरुआत उद्घाटन सत्र में विकास और नवीनीकरण के प्रतीक पौधों को पानी देने से हुई, जिसके बाद सम्मानित वक्ताओं ने संबोधन दिये। एक्सआईएसएस के निदेशक डॉ जोसफ मारियानुस कुजूर एसजे ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि एक्सआईएसएस को स्विच आन फाउंडेशन के साथ पर्यावरण से संबंधित इस साझेदारी पर गर्व है।
इस प्रयास से हम अर्थशास्त्र, सामाजिक और पर्यावरण के तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों को लक्षित करते हैं और अब हमें परिवर्तन के प्रबंधक बनना चाहिए। एक आदिवासी राज्य के रूप में, हम पर्यावरण संरक्षण के तरीकों को बेहतर जानते हैं क्योंकि वे कई शताब्दियों से चलन में हैं और अब बेहतर भविष्य के लिए उनका प्रयोग पर्यावरण की सुरक्षा के लिए शुरू करना होगा, जिससे समाज वह आवश्यक बदलाव आये जो हमारे आने वाली पीढ़ी को जीवन का वरदान दे।
इस कार्यक्रम पर अपने विचार देते हुए, स्विचआन फाउंडेशन के प्रबंध निदेशक, श्री विनय जाजू ने कहा- मूव फॉर अर्थ सिम्पोजियम के माध्यम से, हम सरकार, उद्योगों, गैर सरकारी संगठनों, छात्रों, शिक्षाविदों, किसानों, एसएचजी सहित विभिन्न हितधारकों को शामिल करके समुदायों के भीतर स्थिरता को बढ़ावा देना चाहते हैं।
हरित उद्यमियों का झारखंड के पर्यावरण के लिए व्यावहारिक चर्चा में शामिल होना आवश्यक है। इस सिम्पोजियममें पर्यावरण के कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, टिकाऊ कृषि, परिपत्र अर्थव्यवस्था और स्वच्छ हवा पर केंद्रित है, जो एक स्थायी झारखंड के लिए महत्वपूर्ण है।
इस बीच, मुख्य अतिथि, डॉ महुआ माझी, सांसद, राज्यसभा ने कहा, झारखंड के सतत विकास के लिए एक्सआईएसएस और स्विचआन फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित मूवफॉर द अर्थ सिम्पोजियम को देखना वास्तव में उत्साहजनक है। पर्यावरण आज संकट में है और इसके लिए जागरूकता पैदा करने और समाधानों और कार्यों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता की आवश्यकता है।
पर्यावरणीय मुद्दों और संबंधित विषयों पर चर्चा और विचार-विमर्श करने के लिए लगभग 250 प्रतिभागी और 20 वक्ता इस कार्यक्रम में शामिल हुए। तकनीकी सत्रों में स्थिरता के लिए बाजरा, अपशिष्ट प्रबंधन और व्यवहार परिवर्तन, और डीकाबोर्नाइजिंग उद्योग और कॉर्पोरेट स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
इन सत्रों ने गहन चर्चा के लिए एक मंच प्रदान किया, जहां विशेषज्ञों और उद्योग जगत के एक्सपर्ट्स ने अपने विचार इस कार्यशाला के दौरान रखे। सिम्पोजियम के दौरान चंद्र शेखर, आईएएस, सचिव, ग्रामीण विकास, ने सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोगात्मक प्रयासों के महत्व पर जोर दिया।
सिम्पोजियम में एक ग्रीन पिचथॉन भी आयोजित किया गया, जहां ग्रीन टेक्नोलॉजीज को बढ़ावा देने वाले नवीन विचारों को एक प्रतिष्ठित जूरीपैनल के सामने प्रस्तुत किया गया। इस सिम्पोजियम में एक प्रदर्शनी सह बिक्री भी आयोजित की गयी थी जहां किसान उत्पादक समूहों और छात्रों ने अपने प्रदर्शन के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा, स्वस्थ जीवन और स्वस्थ भोजन की आदतों का प्रदर्शन किया।
अंजनी ई-कचरा पुनर्चक्रण, कोरू फाउंडेशन, स्वाभिमान संस्थान, शिविका शिल्पकारी सहकारी सहयोग समिति लिमिटेड, वैष्णवी इंजीनियरिंग, पलाश-एसएचजीसे किसान उत्पादक बने संगठन, सरायपुर महिला समिति, महिलाओं के लिए तोरपा ग्रामीण विकास सोसायटी, कोलेबिरा किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड, अराउज परिवार नामक संगठन और स्वाभिमान परियोजना ने अपने स्थानीय उत्पादों जैसे इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट रीसाइक्लिंग, पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद जैसे कंघी, टूथब्रश, डायरी, बांस उत्पाद, स्थानीय निर्मित एलईडीस्ट्रीट लाइट, बाजरा आधारित स्नैक्स, वन शहद, पैक इमली, पीठा, चावल, और किचेन गार्डन का प्रदर्शन किया। स्टॉल में मॉडल, जलवायु स्मार्ट कृषि, शून्य बजट प्राकृतिक खेती सहित अन्य चीजें भी शामिल थे।
इस बीच, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, गोला पॉलिटेक्निक और केकेपॉलिटेक्निक, धनबाद के छात्रों ने सीवेज अपशिष्ट प्रबंधन विधि, माइक्रोबियल ऊर्जा उत्पादन, सोलरवेंडर लाइट, किकस्कूटर और गियरलेस पावर ट्रांसमिशन का प्रदर्शन किया।
यह आयोजन पर्यावरण अनुकूल और संबद्ध उत्पादों की प्रदर्शनी सह बिक्री थी। समापन सत्र में सिम्पोजियम की प्रमुख जानकारियों पर प्रकाश डाला गया और पुरस्कारों एवं सम्मानों के साथ उत्कृष्ट योगदान को प्रतिभागियों के बीच वितरित किया गया।
सिम्पोजियम में संस्थान के डीन एकेडमिक्स, डॉ अमर एरोनतिग्गा, ग्रामीण प्रबंधन कार्यक्रम के प्रमुख, डॉ अनंत कुमार के साथ सभी फैकल्टीसदस्यऔर प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों के साथ-साथ एक्सआईएसएस के अन्य फैकल्टी सदस्यों और स्विच आॅन फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
डॉ राज श्री वर्मा, सहायक प्रोफेसर, एक्सआईएसएस ने धन्यवाद ज्ञापन में आभार व्यक्त किया और सिम्पोजियम को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया के लिए सभी को धन्यवाद दिया।