हम मंगल और चांद पर चले गये, पर देश स्वच्छ नहीं कर पाये : पद्म भूषण डॉ बिंदेश्वर पाठक
टीम एबीएन, रांची। 07 अगस्त को स्कूल आफ मास कम्युनिकेशन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेस दस्तावेज का शुभारंभ हुआ। इसका विषय National conference on Marginalised literature ,Cinema and Media है। इस कांफ्रेंस में मुख्य अतिथि सुलभ इंटरनेशनल के पद्मभूषण डॉ बिंदेश्वर पाठक हैं।
डॉ पाठक के साथ ही उद्घाटन सत्र में राज्यपाल के अकादमिक एडवाइजर प्रो डा ई बाला गुरुसामी, ओएसडी राज्यपाल संजीव राय, अवधेश नारायण सिंह, कुलपति रांची विश्वविद्यालय प्रो डा अजीत कुमार सिन्हा, पद्मश्री मुकुंद नायक, मास कम्युनिकेशन के निदेशक प्रो डा बीपी सिन्हा ने भी अपने विचार रखे। मुकुंद नायक के कलाकारों की टीम ने झारखंड की परंपरा के अनुसार सबों का स्वागत किया।
मास कम्युनिकेशन परिसर में आगमन पर डॉ बिंदेश्वर पाठक, प्रो ई बालागुरुसामी कुलपति आरयू तथा अन्य मेहमानों का ढोल मांद और नृत्य के साथ स्वागत किया। इसके बाद सभागार में कुलगीत और छात्रा सुष्मिता ने गणेश वंदना पर नृत्य प्रस्तुत किया।
सभी मेहमानों और आरयू पदाधिकारियों ने द्वीप प्रज्ज्वलन किया। इसके बाद सबों का शौल और पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया। डा बिंदेश्वर पाठक के साथ आये उनके सहयोगियों और अन्य राज्यों से आये अतिथियों का भी निदेशक प्रो डॉ बी पी सिन्हा और स्टेफी मुर्मू ने सम्मानित किया।
कुलपति आरयू डॉ सिन्हा ने अपने स्वागत भाषण में डा बिंदेश्वर पाठक के कार्यों पर प्रकाश डाला और उनके रांची विश्वविद्यालय के मास कम्युनिकेशन विभाग में आने के लिये आभार जताया।
राज्यपाल के अकादमिक एडवाइजर और शिक्षाविद् प्रो डा ई बालागुरुसामी ने कहा कि यह अफसोस की बात है कि हम चीन से बड़ी आबादी वाले देश हैं, पर सैनिटेशन और स्वच्छता में आज भी संतोषजनक स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने डॉ पाठक के प्रयासों और सुलभ इंटरनेशनल के कार्यों की सराहना की?
अवधेश नारायण ने विस्तार से डा. बिंदेश्वर पाठक के सुलभ इंटरनेशनल की यात्रा और उनके युवावस्था से लेकर वर्तमान तक के संघर्षों के बारे में विस्तार से बताया।
मुख्य अतिथि डॉ बिंदेश्वर पाठक ने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था हमें आजादी ही नहीं स्वच्छ भारत भी चाहिए। मैं गांधी जी का फौलोवर हूं पर अंधानुगामी नहीं हूं।मैंने गांधी जी के मौलिक बातों को आत्मसात किया है।मेरा मानना है कि जो दूसरे की मदद करने का प्रयास करता है वह गांधीवादी है।
आज भी भारत में आधे जलमल का ट्रीटमेंट नहीं होता। हम दिल्ली तक के सीवेज का ट्रीटमेंट नहीं कर पाये। हम मंगल ग्रह और चांद पर चले गये, पर देश स्वच्छ नहीं कर पाये। देश आजाद हो गया पर महिलाएं माथे पर मैला ढोते रहीं।
गांधी जी ने कहा था कि भारतीय अंग्रेजों की गोली खा लेंगे पर अछूतों के साथ भोजन नहीं कर सकते। हमें इस सोच से निकलना ही होगा। मैला ढोने की प्रथा, खुले में शौच जाने की प्रथा एक समस्या रही है। सरकार भी कहती थी कि भंगी मुक्ति का कार्य अकेले उसके वश की बात नहीं औरों को भी आगे आना होगा। तभी मैं एक संस्था बना कर अपने साथियों के साथ आगे आया।
बगैर कागज और कानूनी प्रक्रियाओं के बने मेरे संस्था को तब सहयोग मिला और तब मुझे काम करने में ज्यादा बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ा। प्रारंभ में कुछेक कर्मठ आइएस और राजनेताओं ने मेरी मदद की और मार्गदर्शन भी किया। सुलभ ने आज तक एक पैसे का कहीं दुरुपयोग नहीं किया।
पहली गुरु मेरी मां है। मेरी मां कहती थी कि भूखा सो जाना पर कभी बेइमानी मत करना।कोई भी व्यक्ति जीवन मूल्य को भूल कर जिंदगी नहीं जी सकता। ऐसा करने वाले को अंतत: पछताना पड़ता है। कांफ्रेस के पहले दिन स्कूल आफ मास कम्युनिकेशन का विभागीय समाचार पत्र अभिव्यक्ति भी प्रस्तुत किया गया। इसे विभाग के छात्र ही प्राध्यापक मनोज शर्मा के नेतृत्व में प्रकाशित करते हैं।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में डाक्यूमेंट्री तथा शार्ट फिल्मों का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का संचालन रांची विश्वविद्यालय के वोकेशनल की डिप्टी डायरेक्टर डा स्मृति सिंह ने किया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ स्टेफी टेरेसा मुर्मू और कुमार संभव ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वरीय पदाधिकारियों, समेत मास कम्युनिकेशन विभाग के शिक्षक, कर्मी और सैकड़ों छात्र उपसस्थित रहे।