- तीसरी की छोड़, बीआरसी तक भी नहीं पहुंच सकी हैं किताबें
- स्कूली शिक्षा सचिव को भी झूठी रिपोर्ट दे रहे हैं अधिकारी
टीम एबीएन, रांची। राज्य के विभिन्न जिलों में गर्मी की छुट्टी के बाद सरकारी स्कूल गुरुवार से खोल दिये गये। बच्चों को पहली से 7वीं तक की कक्षाओं में प्रमोशन भी दे दिया गया। उनके हाथ किताबें नहीं आयी। नतीजा स्कूल के साथ ही बच्चे बे‘किताब’ बैठे रहे। हां, कुछ फटी-चिटी पुरानी किताबों के सहारे बच्चों का पहला दिन कटा।
परंतु दूसरे दिन शुक्रवार को वह बे‘किताब’ कैसे पढ़ेंगे? क्या सिर्फ खाना खाने के लिए स्कूल जायेंगे? शिक्षकों का कहना है कि राज्य स्तर से अब तक नये सत्र के लिए किताबें नहीं आयी है। ऐसे में बच्चों को पुरानी किताबों से ही काम चलाना होगा। हालांकि उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए राज्य के कई जिलों में किताबें पहुंच गयी हैं। इन विद्यालयों के लिए तीसरी से 11वीं कक्षा तक की किताबें भेजी गयी हैं।
विभाग को दी जा रही है झूठी रिपोर्ट
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता सचिव को राज्य के विभिन्न जिलों में किताब भेजे जाने की झूठी रिपोर्ट भेजी जा रही है। राज्य के कुछ जिलों में तीसरी कक्षा को छोड़ किताबें नहं पहुंची है। ऐसे में स्कूलों को किताब उपलब्ध कराने की बात बेमानी लगती है।
मुख्यालय से भेजी जानी हैं किताबें
शैक्षणिक सत्र 2023-24 में कक्षा एक से आठवीं तथा कक्षा नौवीं से 12वीं तक के लिए किताबें मुख्यालय से भेजी जानी हैं। इसके लिए झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद रांची की ओर से सात जून को पत्र जारी किया गया था, लेकिन अब तक किताबें राज्य के किसी भी जिले में नहीं पहुंची है।
इन बच्चों को देनी है प्राथमिकता
सरकार के स्तर स्कूलों में किताब बांटने के लिए कुछ प्राथमिकताएं तय की गयी है। इसके अनुसार जिन छात्र-छात्राओं को अधिकतम अंक प्राप्त हुए है, जो पहली बार विद्यालय में नामांकित हुए हैं और जिन छात्र-छात्राओं की कक्षा में उपस्थिति सर्वोत्तम रही है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर किताबें देने की योजना है।
ऐसा बात नहीं है कि किताबें बच्चों को नहीं मिली है। किताबें स्कूल में पहुंचा दी गयी है। शुक्रवार को इसकी डिटेल्स रिपोर्ट उपलब्ध करा दूंगा। -के रवि कुमार, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता सचिव, झारखंड।