- देशभर से शामिल हुए 102 बच्चे
टीम एबीएन, रांची। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली में छात्र, छात्राओं, शिक्षक और अभिभावकों के साथ परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान पूरे देश से 102 बच्चे इसमें भाग लिये। वहीं झारखंड से मात्र दो छात्रा जो जमशेदपुर से सरोजिनी और नंदिनी प्रधानमंत्री के परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम में भाग लेने दिल्ली पहुंची। प्रधानमंत्री से उनकी बात हुई। छात्रों ने अपने परीक्षा के दौरान होने वाले तनाव पर प्रधानमंत्री से सुझाव लिया।
छात्राओं ने प्रधानमंत्री के साथ की बात : छात्राओं ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परीक्षा को तनाव मुक्त को लेकर की सुझाव दिये। उन्होंने कहा साथ ही साथ सोशल मीडिया का उपयोग सही तरीके से कर इसका फायदा लेने का सुझाव दिया। सबसे बड़ा सुझाव टाइम मैनेजमेंट करने को कहा। प्रधानमंत्री को अपने बीच पाकर छात्र-छात्राएं काफी खुश दिख रही थी। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री से हम लोगों ने भी कई प्रश्न पूछे जिनका बखूबी से प्रधानमंत्री ने जवाब दिया। लग नहीं रहा था कि वह प्रधानमंत्री हम से बात कर रहे हैं, एक दोस्त की तरह हमें कई सुझाव दिया।
प्रधानमंत्री ने तनाव मुक्त का दिया सुझाव : शिक्षक ने कहा कि आज इस कार्यक्रम में शामिल होकर मैं खुद लग रहा था कि शिक्षक नहीं मैं स्टूडेंट बन गयी हूं। एक छोटे से संबोधन में प्रधानमंत्री ने बच्चों का तनाव मुक्त कर दिया और किस तरह एक इंतिहान नहीं हमारी जिंदगी के इम्तिहान को आगे बढ़े उसका मूल मंत्र दिया। वहीं उन्होंने शिक्षक और अभिभावकों को जो सुझाव दिया कि बच्चों को एक दोस्त की तरह मिलकर उनकी परेशानी जाने और उससे निजात दिलाए तभी जाकर बच्चे आगे अच्छा और बेहतर काम कर सकेंगे।
जमशेदपुर में परीक्षा पर चर्चा को हुआ लाइव प्रसारण : जमशेदपुर गोलमुरी स्थित केरला समाजम स्कूल सभागार में फुल स्क्रीन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा पर चर्चा का लाइव प्रसारण देखा गया। इस मौके पर जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो स्कूल के सभी शिक्षक और स्कूली छात्र शामिल हुए। सभी ने प्रधानमंत्री का परीक्षा पर चर्चा विषय को ध्यान से सुना और समझा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाये जा रहे इस तरह कि अभियान की सराहना की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। छात्रों ने कहा कि इस तरह के जो कार्यक्रम प्रधानमंत्री के द्वारा चलाया जा रहा है जिससे देश के छात्र-छात्राओं में परीक्षा के प्रति जो भय का माहौल बना रहता था।