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निर्वाचन आयोग के नोटिस पर बोले बसंत सोरेन के अधिवक्ता- याचिका चुनाव समिति के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं

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निर्वाचन आयोग के नोटिस पर बोले बसंत सोरेन के अधिवक्ता- याचिका चुनाव समिति के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं
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टीम एबीएन, रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन के अधिवक्ता ने सोमवार को दावा किया कि खनन कंपनी में सहस्वामित्व के आधार पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के विधायक की आयोग्यता की मांग को लेकर उनके खिलाफ दायर याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। अधिवक्ता ने इस मामले की सुनवाई को लेकर निर्वाचन आयोग के न्यायिक क्षेत्राधिकार संबंधी सवाल उठाए। आयोग ने हाल ही में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9ए के तहत बसंत सोरेन को नोटिस दिया था, जो एक सरकारी अनुबंध के लिए एक विधायक की अयोग्यता से संबंधित है। इस तरह के मामलों की सुनवाई करते समय निर्वाचन आयोग एक अर्द्ध न्यायिक निकाय के रूप में कार्य करता है। दुमका से विधायक बसंत सोरेन को भेजे गए निर्वाचन आयोग के नोटिस का संबंध बोकारो जिले में स्थित एक खनन कंपनी में उनके कथित सहस्वामित्व से है। इस बाबत आरोप लगाये जा रहे थे कि यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9ए का उल्लंघन है। निर्वाचन आयोग के समक्ष सुनवाई के बाद बसंत सोरेन का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता सोनल कुमार सिंह ने संवाददाताओं से कहा, हमने यह कहते हुए अधिकार क्षेत्र पर प्रारंभिक आपत्ति जताई कि याचिका (एक विधायक के रूप में उनकी अयोग्यता की मांग की गई) सुनवाई योग्य नहीं है। अधिवक्ता ने कहा कि आयोग ने अधिकार क्षेत्र पर सुनवाई के लिए समय दिया है, मामले की सुनवाई अगली तारीख पर होगी जिस पर अभी फैसला नहीं हुआ है।
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