टीम एबीएन, रांची। बच्चों की खुशी के आगे विवाह विच्छेद का मुकदमा लड़े रहे पति-पत्नी को झुकना पड़ा। अधिवक्ता मध्यस्थ नीलम शेखर एवं पीसी उरांव के प्रयास से विवाह विच्छेद का मुकदमा लड़े रहे पति-पत्नी अब एक साथ रहकर नयी जिंदगी शुरू करने पर राजी हो गये। वहीं दो वर्षीय बेटी को मां के साथ अब पिता का प्यार मिलेगा। बेटी मां-पिता को एक साथ पाकर लिपट कर खुशी का इजहार मध्यस्थता केंद्र में किया। जी हां मंगलवार को पांच दिवसीय विशेष मध्यस्थता अभियान के दूसरे दिन 14 मुकदमों में सुलह कराया गया। जिसमें चार मुकदमें बच्चों की खुशी से जुड़े हुए थे।
केस नंबर 1.
रांची निवासी विजय कुमार प्रजापति एवं नवादा निवासी पत्नी प्रियंका के बीच मामूली मतभेद को लेकर आगे की जिंदगी अलग रहकर बीतने को लेकर पति ने विवाह विच्छेद का मुकदमा किया था। जबकि पत्नी ने भरण-पोषण को लेकर मुकदमा किया था। फैमिली कोर्ट जज ने मामले में सुलह को लेकर मध्यस्थता केंद्र भेज दिया था। साथ ही मध्यस्थ नीलम शेखर को नामित किया गया। दोनों की शादी अप्रैल 2018 में हुई थी। दोनों को एक बेटी है। सुलह के बाद पुराने वाद-विवाद पर विराम लगाते हुए बेटी के साथ खुशनुमा जीवन व्यतीत करने पर राजी हुए। दोनों अपनी बेटी का भविष्य को साथ मिलकर संभालेंगे। बेटी की हर जरूरत को पूरा करेंगे। सभी तरह की कड़वाहट अब नहीं रखेंगे। सुलह में दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं की भी भूमिका अहम रही।
केस नंबर 2.
मध्यस्थ प्रकाश चंद्र उरांव ने तीनों बच्चों को माता-पिता का प्यार एक साथ दिलाने में सफल रहे। सुलह के माध्यम से उन्होंने पुनिया उरांव एवं सूरज उरांव को एक किया। दोनों पति-पत्नी विवाह विच्छेद का मुकदमा लड़ रहे थे। दोनों को तीन बच्चे हैं। आपसी मनमुटाव के कारण दोनों पति-पत्नी पिछले एक साल से अलग-अलग रह रहे थे। सुलह के बाद अब एक साथ रहेंगे। साथ ही पुनिया उरांव को सूरज पांच हजार रुपये प्रति माह खर्च भी देगा।