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झारखंड हाईकोर्ट ने रिव्यू याचिका खारिज की

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झारखंड हाईकोर्ट ने रिव्यू याचिका खारिज की
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  • नियुक्ति में कम अंक वालों को मौका मिलने का दावा साबित नहीं कर सके अभ्यर्थी, हाईकोर्ट ने रिव्यू याचिका खारिज की
  • 555 दिनों की देरी माफ करने का पर्याप्त कारण नहीं मिला
  • सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी खारिज होने के करीब 16 महीने बाद दाखिल की थी समीक्षा याचिका

टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाले अभ्यर्थी नागेंद्र नाथ परिहारी की समीक्षा याचिका खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने 555 दिनों की देरी माफ करने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि देरी के लिए पर्याप्त कारण नहीं बताया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने का दावा भी याचिकाकर्ता दस्तावेजों के साथ साबित नहीं कर सके।

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मामले में याचिकाकर्ता ने एकल पीठ के आठ जनवरी 2024 के आदेश के खिलाफ एलपीए संख्या 48/2024 दायर की थी। खंडपीठ ने 23 अप्रैल 2024 को अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की, जिसे 14 अगस्त 2024 को खारिज कर दिया गया। 

इसके करीब 16 महीने बाद 17 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट में समीक्षा याचिका दाखिल की गई। याचिकाकर्ता की ओर से देरी का कारण बताते हुए कहा गया कि कम अंक पाने वाले कुछ अभ्यर्थियों को ईबीसी-I और बीसी-II श्रेणियों में नियुक्ति मिलने की जानकारी के बाद उन्हें दोबारा उम्मीद जगी। बीमारी और पूर्व अधिवक्ता से हलफनामे जुटाने में समय लगने का भी हवाला दिया गया।

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खंडपीठ ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने कहा कि कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति के दावे के समर्थन में न तो कोई दस्तावेज पेश किया गया और न ही यह बताया गया कि याचिकाकर्ता को इसकी जानकारी कब मिली। बीमारी से संबंधित स्पष्टीकरण भी अस्पष्ट और सत्यापन योग्य नहीं पाया गया। 

सुनवाई के दौरान झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से बताया गया कि पहले जिला स्तर पर चयन किया जाता था। अदालत ने चयन की उस पद्धति को निरस्त किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से अनुसूचित जिलों के अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को प्रभावित नहीं करने के लिए सीमित संरक्षण दिया था।

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खंडपीठ ने कहा कि देरी माफी के आवेदन पर विचार करते समय मामले के गुण-दोष में विस्तार से जाना उचित नहीं है। हालांकि, उपलब्ध आदेशों के आधार पर याचिकाकर्ता का मजबूत प्रथमदृष्टया मामला भी स्पष्ट नहीं हुआ। अदालत ने देरी माफी का आवेदन खारिज कर दिया। इसके साथ ही समीक्षा याचिका भी निष्प्रभावी होने के कारण निष्पादित कर दी गई।

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