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दावा: पीएफ के नये नियमों से टैक्स का झंझट खत्म, अब निवेश व रिटर्न पाना होगा और आसान

दावा: पीएफ के नये नियमों से टैक्स का झंझट खत्म, अब निवेश व रिटर्न पाना होगा और आसान
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ईपीएफओ ने कहा कि बजट में सरकार के बदलाव कर्मचारियों और कंपनियों दोनों के लिए फायदेमंद होंगे, क्योंकि अब नियम एक जैसे हैं, जिसे समझने में भी आसान होगी 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने केंद्रीय बजट 2026-27 में पीएफ से जुड़े टैक्स नियमों को आसान और सरल बनाने के प्रस्ताव का स्वागत किया है। मंगलवार को जारी बयान में कहा गया कि ये बदलाव कर्मचारियों और कंपनियों दोनों के लिए फायदेमंद होंगे, क्योंकि अब नियम एक जैसे और समझने में आसान हो जायेंगे। 

पहले इनकम टैक्स के नियम और कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, 1952 में काफी फर्क था। खासकर प्राइवेट पीएफ ट्रस्ट्स के लिए टैक्स छूट की पात्रता, निवेश के तरीके और एम्प्लॉयर के योगदान की सीमा अलग-अलग थी। इस वजह से कंपनियों और कर्मचारियों को काफी उलझन होती थी और कई बार अनावश्यक कानूनी झंझट भी बढ़ जाते थे। 

छूट के नियम अब एक जैसे होंगे 

बजट में अब नियम ये हैं कि इनकम टैक्स एक्ट, 2025 की स्केड्यूल क के तहत मान्यता पाने वाले प्रोविडेंट फंड्स को केवल तभी मान्यता मिलेगी जब उन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम की धारा 17 के तहत छूट हासिल कर ली हो। धारा 17 के तहत कंपनियां मासिक ईपीएफ रिटर्न फाइल करने और कर्मचारियों के खातों को मेंटेन करने से छूट मांग सकती हैं। इसका मतलब है कि अब टैक्स छूट और कानूनी छूट एक ही आधार पर मिलेगी, जिससे दोहरी व्यवस्था खत्म हो जायेगी। 

निवेश के नियम ईपीएफाओ के अनुसार होंगे 

पहले इनकम टैक्स के नियमों में पीएफ फंड्स के निवेश का तरीका अलग था और सरकारी सिक्योरिटीज में 50% की सख्त सीमा लगी थी। अब ये सीमा हटा दी गई है। आगे निवेश के नियम पूरी तरह ईपीएफओ के फ्रेमवर्क और उससे जुड़े नियमों के हिसाब से होंगे। इससे पीएफ फंड्स को ज्यादा लचीलापन मिलेगा और वे बेहतर रिटर्न के लिए सही जगह निवेश कर सकेंगे। 

एम्प्लॉयर के योगदान पर नयी सीमा 

अब एम्प्लॉयर का पीएफ में योगदान सालाना 7.5 लाख रुपये तक सीमित रहेगा। इस सीमा तक का योगदान टैक्स-फ्री होगा, लेकिन इससे ज्यादा होने पर अतिरिक्त राशि पर टैक्स लगेगा और उसे परक्विजिट माना जायेगा। पहले योगदान पर कुछ प्रतिशत वाली सीमाएं और एम्प्लॉयी-एम्प्लॉयर के बराबर योगदान की शर्तें थीं, जो अब हटा दी गई हैं। 

ईपीएफओ ने कहा है कि बजट के इन बदलावों से पीएफ से जुड़े नियम अब पूरी तरह कानून के अनुसार हो गये हैं। इससे कर्मचारियों, कंपनियों और ट्रस्ट्स को राहत मिलेगी और झंझट कम होंगे। यह कदम रिटायरमेंट सेविंग्स को मजबूत और आसान बनाने के लिए बहुत अहम है।

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