झारखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति की जायेगी या नहीं, हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन सरकार से पूछा
टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में लोकायुक्त का पद चार सालों से खाली रहने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। जस्टिस आनंद सेन की बेंच ने मंगलवार को एक याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार से पूछा कि राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति की जायेगी या नहीं? कोर्ट ने इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव को दो सप्ताह में स्पष्ट जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इस संबंध में अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने याचिका दाखिल की है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि एक स्कूल के प्रबंधन से संबंधित विवाद में अभय कुमार मिश्रा से तत्कालीन डीएसपी प्रभात रंजन बरवार ने रुपये की मांग की थी। उन्होंने रुपये मांगने की बात को मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया था। इसके बाद उनकी ओर से इस संबंध में लोकायुक्त के पास वर्ष 2020 में शिकायत दर्ज करायी गयी थी।
लोकायुक्त के आदेश पर इस मामले की जांच तत्कालीन आईजी और डीआईजी ने की थी। दोनों अधिकारियों की ओर से कहा गया था कि मोबाइल रिकॉर्डिंग से रुपये की लेन-देन की बात सामने आ रही है, लेकिन इसकी फॉरेंसिक जांच कराना उचित होगा। यह भी कहा गया कि जिस समय की रिकॉर्डिंग की बात कही जा रही है, वह (प्रभात रंजन बरवार) उस दौरान हटिया डीएसपी नहीं थे, इसलिए मामला झूठा प्रतीत हो रहा है।
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर की गई है ये मांग
मामले की सुनवाई की प्रक्रिया के बीच में ही लोकायुक्त के निधन होने से पद रिक्त हो गया। प्रार्थी की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में मांग की गयी है कि इस मामले की जांच सीआईडी या एसीबी से करायी जाए या फिर लोकायुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया जाये।
सुनवाई के दौरान अदालत ने लोकायुक्त के अधिवक्ता से पूछा कि लोकायुक्त कार्यालय में अभी कितने मामले लंबित हैं? इस पर बताया गया कि लोकायुक्त का पद रिक्त होने की वजह से हजारों मामले लंबित हैं। इसके बाद अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को लोकायुक्त की नियुक्ति के संबंध में स्पष्ट जवाब देने को कहा है।