- सीएम हेमंत सोरेन को ईडी का तीसरा समन! सांसद निशिकांत दुबे के ट्वीट ने मचाई सनसनी
टीम एबीएन, रांची। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के ट्वीट ने एक बार फिर से सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है चाय 9 सितंबर? इसको लेकर ऐसा माना जा रहा है कि यह सीएम हेमंत सोरेन को ईडी द्वारा तीसरे समन के बारे में है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को तीसरी बार समन जारी कर दिया है। हालांकि इसकी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हो पायी है। लेकिन यह बताया जा रहा है कि सीएम को इस बार 09 सितंबर को ईडी के दफ्तर बुलाया गया है।
सांसद ने किया ट्वीट
जमीन घोटाले में पूछताछ के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी के द्वारा तीसरी बार समन जारी किये जाने की सूचना है। सूत्रों के अनुसार 9 सितंबर को मुख्यमंत्री को ईडी दफ्तर आने के लिए समन दिया गया है। राज्य में परिवर्तन निदेशालय के द्वारा चल रही कार्रवाई को लेकर अक्सर ट्वीट करने वाले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक बार फिर ट्वीट किया है कि चाय 9 सितंबर।
निशिकांत के ट्वीट के साथ ही लोग यह मान कर चल रहे हैं कि मुख्यमंत्री को 9 सितंबर को ही बुलाया गया है। इससे पहले जब मुख्यमंत्री को दूसरा समन जारी किया गया था, उसे लेकर भी निशिकांत दुबे ने ट्वीट किया था जो बिल्कुल सटीक निकला था।
सीएम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा है खटखटाया
ईडी ने रांची जमीन घोटाले में मुख्यमंत्री को पूछताछ के लिए पहली बार 14 अगस्त को बुलाया था, लेकिन मुख्यमंत्री पहले समन पर उपस्थित नहीं हुए। इस दौरान उन्होंने एक पत्र ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर देवव्रत झा को भेजा था, जिसमें उन्होंने ईडी की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कानून की शरण में जाने की बात कही थी। वहीं ईडी से समन वापस लेने की मांग की थी।
जिसके बाद ईडी ने भी सीएम को जवाबी पत्र भेजते हुए दूसरा समन भेज दिया था, जिसमें उन्हें 24 अगस्त को आने को कहा गया था। लेकिन उस दिन भी सीएम उपस्थित नहीं हुए और उन्होंने इस मामले में राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
ईडी भी पहुंची सुप्रीम कोर्ट
दूसरी तरफ जमीन घोटाले मामले में ईडी के दो-दो समन के विरुद्ध मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया तो ईडी भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गयी है।
मुख्यमंत्री ने सर्वोच्च न्यायालय में ईडी के अधिकार को चुनौती दी है, जिसके खिलाफ ईडी ने भी केविएट फाइल कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि उनके बिना ईडी के पक्ष को जाने कोई भी आदेश पारित न किया जाये।