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बीसीआइ ने दी विदेशी वकीलों और कानून फर्मों को भारत में वकालत करने की अनुमति

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बीसीआइ ने दी विदेशी वकीलों और कानून फर्मों को भारत में वकालत करने की अनुमति
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एबीएन सेंट्रल डेस्क। बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआइ) ने बुधवार को विदेशी वकीलों और कानून फर्मों को पारस्परिक आधार पर भारत में विदेशी कानून पर वकालत करने की अनुमति दे दी। रेसीप्रोकल लॉ ऐसे कानूनी दर्जे को कहा जाता है, जिसमें एक देश किसी दूसरे देश के नागरिक को अधिकार व विशेषाधिकार देता है, अगर ऐसा ही विशेषाधिकार पहले देश ने दे रखा है। इस तरह के कानूनों पर विदेशी वकील व फर्में बहस कर सकेंगी। 

इस नियम में साफ किया गया है कि विदेशी वकील या कानून फर्म इउक में पंजीकरण के बगैर वकालत नहीं कर सकेंगी। विदेशी वकीलों को सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर सलाह देने की अनुमति होगी और उन्हें भारतीय न्यायालयों और पंचाटों के समक्ष वकालत की अनुमति नहीं होगी। 

नियम में कहा गया है, अगर जरूरत पड़ती है तो बार काउंसिल आफ इंडिया भारत के कानून और न्याय मंत्रालय से इस सिलसिले में परामर्श ले सकती है। बीसीआइ ने अंतरराष्ट्रीय वकीलों व पंचाट प्रैक्टिशनरों को रूल्स फॉर रजिस्ट्रेशन ऐंड रेगुलेशन आफ फॉरेन लॉयर्स ऐंड फॉरेन लॉ फर्म्स इन इंडिया, 2022 (नियम) के तहत वकालत करने की अनुमति दी है। 

बीसीआइ के नियम में कहा गया है कि बार काउंसिल आफ इंडिया का विचार है कि विदेशी कानून, गैर याचिका वाले विविधीकृत अंतरराष्ट्रीय कानूनी मसलों और अंतरराष्ट्रीय पंचाट के क्षेत्र में विदेशी वकीलों को भारत में वकालत करने की राह खोलनी चाहिए। इससे कानूनी पेशेवरों की दीर्घावधि के हिसाब से राह खुलेगी और भारत के वकीलों को भी लाभ होगा। 

बीसीआइ ने कहा है कि अगर नियमन के दायरे में विदेशी वकीलों को वकालत की अनुमति दी जाएगी तो भारत को किसी नुकसान की संभावना नहीं है। इसमें कहा गया है कि इन नियमों से देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रवाह को लेकर उठ रही चिंता को भी दूर करने में मदद मिलेगी और भारत अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक न्यायाधिकरण का केंद्र बन सकेगा। इसे लेकर कानून के क्षेत्र के लोगों की प्रतिक्रिया सामान्यतया सकारात्मक है, वहीं कुछ हिस्सेदारों ने बुलेटप्रूफिंग को लेकर चिंता जताई है। 

इस कदम का स्वागत करते हुए सिरिल अमरचंद मंगलदास के मैनेजिंग पार्टनर सिरिल श्राफ ने कहा कि मेरा मानना है कि यह प्रगतिगामी कदम है। भारत का कानूनी बाजार बदलाव के लिए तैयार है और यह बढ़ेगा। मैं इसे खोले जाने का स्वागत करता हूं। 

वहीं एसऐंडए लॉ आफिसेज की ज्वाइंट मैनेजिंग पार्टनर गुणिता पाहवा ने कहा कि वह भारत के कानून के बाजार को विदेशी फर्मों और वकीलों के लिए खोलने का स्वागत करती हैं, लेकिन यह चरणबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए और इसके लिए उचित नियमन और दिशानिर्देश होने चाहिए, जिससे सभी हिस्सेदारों को काम करने के एक समान अवसर मिल सकें। 

देसाई ऐंड दीवानजी में सीनियर पार्टनर सिद्धार्थ मोदी ने कहा कि जहां विदेशी कानूनों से भारतीय कानूनों का आच्छादन होता है, बीसीआई व अन्य नियामकों को स्थिति साफ करने की जरूरत पड़ सकती है। 

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से भारत के कानून क्षेत्र में काम कर रहे लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। एएसएल पार्टनर्स में मैनेजिंग पार्टनर अभिनय शर्मा ने कहा कि एक बड़ा मसला नये कानून स्नातक के रोजगार का है। यह प्राथमिक रूप से भारत व अन्य देशों में अलग तरह के कानूनी प्रशिक्षण और शिक्षा को लेकर है। यह अंतर रोजगार पर असर डाल सकता है। 

बहरहाल, सिंघानिया ऐंड कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर रोहित जैन ने को नहीं लगता कि इसका कोई व्यापक असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नियमों में अहम बात यह है कि अनुमति पारस्परिकता के अधीन है। इसका आशय यह है कि काउंसिल पहले संबंधित नियमों की जांच करेगी, ताकि संबंधित देश के साथ पारस्परिकता का पता लगाया जा सके। 

दीर्घावधि के हिसाब से हम मझोली और छोटी फर्मों के एकीकरण या अधिग्रहण की स्थिति देख सकते हैं। लेकिन अभी की स्थिति में- सब चंगा सी।

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