Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
होम देश झारखंड खेल समाचार राज काज कानून व्यवस्था करियर बिजनेस वर्ल्ड हेल्थ विचार ज्ञान विज्ञान समाज वन और पर्यावरण मनोरंजन बिहार विज्ञापन
राज काज

इस्तीफा नहीं देकर पांच को शक्ति परीक्षण करेंगे सीएम हेमन्त सोरेन

शेयर करें: WhatsApp Facebook X
इस्तीफा नहीं देकर पांच को शक्ति परीक्षण करेंगे सीएम हेमन्त सोरेन
विज्ञापन
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में राजनीतिक संकट के बीच एक तरफ सीएम हेमंत सोरेन ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल इस्तीफा नहीं देने जा रहे, बल्कि उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि वह पांच सितंबर को प्रस्तावित विधानसभा की बैठक में भी मौजूद रहेंगे। इससे पहले UPA प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल रमेश बैस से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल पर हार्स ट्रेडिंग को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए जल्द से जल्द निर्णय लेने की मांग की। बता दें कि खनन लीज अपने नाम कराने के मामले में एक तरफ सीएम हेमंत सोरेन विपक्ष के निशाने पर हैं। वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग ने इसी मामले में जांच के बाद उनके राजनीतिक भविष्य का निर्धारण करने वाला सील बंद लिफाफा राजभवन भेज दिया है। अब इस लिफाफे में बंद चुनाव आयोग की सिफारिश पर राज्यपाल को फैसला करना है। उधर, झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने कांग्रेस के तीन विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराने के मामले की सुनवाई पांच सितंबर तक के लिए टाल दी है। आइये, हम यह जानने का प्रयास करते हैं इस पूरे घटनाक्रम की दस बड़ी बातें :- 1. मुख्यमंत्री और खनन मंत्री रहते हेमंत पर पद का दुरुपयोग करते हुए खनन लीज अपने नाम कराने का आरोप है। इस मामले में भाजपा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9 (ए) का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए लगातार हमलावर है। भाजपा की शिकायत पर चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए मामले की जांच की और विस्तार से रिपोर्ट तैयार किया है। 2. चुनाव आयोग ने 25 अगस्त को अपनी गोपनीय रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में राजभवन भेज दी। इस रिपोर्ट में चुनाव आयोग ने भाजपा द्वारा लगाए आरोपों की पुष्टि करते हुए राज्यपाल से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा से सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की। 3. चुनाव आयोग ने भले ही अपनी रिपोर्ट गोपनीय तरीके से सीलबंद लिफाफे में राजभवन भेजी, लेकिन रिपोर्ट राजभवन पहुंचने से पहले ही लीक हो गई। इस रिपोर्ट में साफ हो गया कि अब हेमंत सोरेन की विधानसभा से विदाई तय है, उन्हें कुछ समय के लिए चुनाव लड़ने से भी रोका जा सकता है। 4. रिपोर्ट लीक होने के साथ ही झारखंड का राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया। एक तरफ हेमंत सोरेन अपनी सरकार बचाने की जुगत में लग गए, कई बार पार्टी नेताओं के अलावा गठबंधन दलों के साथ बैठक भी की। इन बैठकों में संभावित विकल्पों पर विचार विमर्श किया गया। 5. चुनाव आयोग की रिपोर्ट आने के बाद भी राजभवन ने कोई फैसला नहीं दिया, बल्कि राजभवन से कहा गया कि राज्यपाल इस रिपोर्ट और सिफारिश पर विधिक राय लेने के बाद ही कोई कदम उठायेंगे, इसके चलते झारखंड की राजनीति में सस्पेंस और बढ़ गया। 6. राजभवन से निर्णय में देरी की दशा में विधायकों की खरीदफरोख्त की आशंका के मद्देनजर 26 अगस्त को यूपीए के विधायकों की मुख्यमंत्री आवास पर अहम बैठक हुई। इस बैठक में ताजा घटनाक्रम पर विचार विमर्श किया गया।।इसमें यह भी तय करने का प्रयास किया गया कि हेमंत सोरेन नहीं तो कौन, हालांकि इस बैठक में कोई निर्णय नहीं हो सका। 7. 27 अगस्त को भी गठबंधन के विधायकों की सीएम आवास पर बैठक हुई। इसके बाद सभी विधायक CM सोरेन की अगुवाई में एकजुटता दिखाते हुए लतरामु डैम पहुंच गये, जहां पूरे दिन मौज मस्ती करने के बाद देर रात वापस रांची पहुंच गये थे। 8. एक सितंबर की देर शाम झारखंड में कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक के बाद UPA गठबंधन का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल रमेश वैस से मिलने राजभवन पहुंचा। इस मुलाकात के बाद कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने बताया कि सीएम इस्तीफा नहीं देंगे। दो दिन के अंदर विधिक राय लेकर राज्यपाल स्थिति स्पष्ट कर देंगे। 9. बंधु तिर्की ने बताया कि राज्यपाल के समक्ष मीडिया में लीक हो रही खबरों के संबंध में भी सवाल किया गया है। इसी के साथ यूपीए विधायकों ने एक संयुक्त बयान जारी कर सवाल उठाया कि क्या राजभवन निर्णय लेने में देरी कर खरीद-फरोख्त को बढ़ावा नहीं दे रहा? आखिर वह कौन सी कानूनी सलाह है जो राज्यपाल खुद लेने में सक्षम नहीं है? 10. झारखंड कैबिनेट ने पांच सितंबर को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि विधानसभा के इस सत्र के दौरान सरकार शक्ति परीक्षण कर सकती है। कैबिनेट बैठक में सरकारी कामकाज और वीआईपी/वीवीआईपी की यात्रा की सुविधा के लिए एक महीने के लिए चार्टर विमान किराए पर लेने को मंजूरी भी दी गई।
विज्ञापन