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रैंकिंग में पिछड़े झारखंड के यूनिवर्सिटीज को केंद्रीय अनुदान नहीं

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रैंकिंग में पिछड़े झारखंड के यूनिवर्सिटीज को केंद्रीय अनुदान नहीं
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टीम एबीएन, रांची। झारखंड के विश्वविद्यालय विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में लगातार पिछड़ रहे हैं। राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में उच्च शिक्षा के लिए मूलभूत सुविधाएं नहीं है। शिक्षा व्यवस्था शिक्षकों की कमी की मार झेल रही है। शिक्षकों की कमी के कारण स्कूल कॉलेज विश्वविद्यालयों में क्लासेस खाली जा रहे हैं। प्रैक्टिकल रिसर्च जैसी गतिविधियां नगण्य हो गई है। लेकिन, इस दिशा में विभाग का विशेष ध्यान नहीं है। ऐसे में झारखंड के विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर के ग्रेडिंग से भी दूर हो रहे हैं। रैंकिंग में यहां के विश्वविद्यालय और टेक्निकल कॉलेज फिसड्डी हो गए हैं। एनआईआरएफ रैंकिंग में झारखंड के सरकारी विद्यालय कहीं नहीं है। नैक की भी स्थिति राज्य के विश्वविद्यालयों में अच्छी नहीं है और इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह शिक्षकों की कमी को ही बतायी जा रही है। विश्वविद्यालय प्रबंधक की मानें तो वे इस मामले में मजबूर महसूस करते हैं। शिक्षक नियुक्ति करने वाली संस्थाएं किसी की नहीं सुनती हैं। अब तक 112 कॉलेजों को ग्रेडिंग दी है, जिसमें से 3 कॉलेज को ही अ ग्रेड मिले हैं। जबकि चार कॉलेज को इ++, 11 कॉलेज को इ+, 61 कॉलेज को इ और 33 कॉलेज को उ ग्रेड दिए गए हैं। नैक से अ ग्रेड प्राप्त कॉलेजों में निर्मला कॉलेज रांची, जमशेदपुर वूमंस कॉलेज और घाटशिला कॉलेज शामिल हैं। हालांकि इन कॉलेजों की भी नैक मूल्यांकन की अवधि खत्म हो चुकी है। अब इन्हें दोबारा नैक मूल्यांकन कराना है। कॉलेज प्रबंधक जिसकी तैयारी में जुट गए हैं।
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