टीम एबीएन, रांची। झारखंड पंचायत चुनाव के प्रत्याशी बिना जाति प्रमाण पत्र के चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। निर्वाचन आयोग के द्वारा दिए गये नामांकन पत्र के साथ ही जाति प्रमाण पत्र की मूल प्रति लगाना होगा। ऐसे में झारखंड में पंचायत चुनाव में आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए इन वर्गों को जाति प्रमाणपत्र के लिए मारामारी मची है। इसके लिए अंचल अधिकारियों के कार्यालय में आवेदन की भरमार है। चुनाव में आरक्षित वर्गों को आरक्षण का लाभ लेने के लिए प्रमाणपत्र जमा करना होगा और इसके लिए खतियान का प्रमाण देना आवश्यक है। इसके लिए भूमि अभिलेख, रिकार्ड आफ राइटस और भूमि निबंधन कागजात में नाम होना चाहिए। यही योग्यता पिछड़ी जाति की दो अनुसूचियों में दर्ज जातियों के लिए भी है। हालांकि राज्य में हो रहे पंचायत चुनाव में फिलहाल पिछड़ी जाति को आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है।
आॅनलाइन की जगह आॅफलाइन भी दिया जा रहा प्रमाणपत्र : बता दें, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी को नामांकन पत्र के साथ जाति प्रमाण पत्र की मूल प्रति लगाना अनिवार्य होगा। पहले जाति प्रमाणपत्र आनलाइन भरने की व्यवस्था थी। लेकिन, इसमें मिल रही शिकायतों को देख आफलाइन भी प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया में थोड़ा वक्त भी मिलता है। फिलहाल आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने को इच्छुक अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र के लिए सर्वाधिक आवेदन मिले हैं।
डइउ को सरकार ने मान लिया सामान्य सीट : झारखंड सरकार ने ओबीसी सीट को सामान्य सीट में मान लिया है। ओपेन कैटेगरी सीट होने की वजह से इसमें अब सभी लोग चुनाव लड़ पायेंगे। सिर्फ वोटर लिस्ट में नाम होना जरूरी है। बता दें, झारखंड में चार चरणों में पंचायत चुनाव हो रहा है। इन चरणों के उम्मीदवारों को भी जाति प्रमाण पत्र बनाना होगा, इसके लिए मूल निवासी होने का प्रमाण भी देना होगा। इसलिए अंचल कार्यालयों में इन दिनों जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए भीड़ जुटी है।