एबीएन सेंट्रल डेस्क। रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने 15 लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर लिमिटेड सीरीज के उत्पादन की खरीद को मंजूरी दे दी है, जिसकी कीमत 3,887 करोड़ रुपए है। साथ ही कहा कि बुनियादी ढांचे के लिए 377 करोड़ रुपए की भी मंजूरी दी है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर लिमिटेड सीरीज प्रोडक्शन (एलएसपी) एक स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित अत्याधुनिक आधुनिक लड़ाकू हेलिकॉप्टर है, जिसमें लगभग 45 फीसदी स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है जो एसपी संस्करण के लिए बढ़कर 55 फीसदी से अधिक हो जाएगी। पिछले साल नवंबर महीने में आत्मनिर्भर भारत की तरफ एक और कदम बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय वायुसेना को लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर सौंपा था। इन एयरक्राफ्ट्स को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने बनाया है। बताया जा रहा है कि ये एयरक्राफ्ट जमीन से लेकर आसमान तक किसी भी टारगेट को तबाह करने में सक्षम है। ये हेलिकॉप्टर कई मायनों में खास बताया जा रहा है। इसे दुनिया का सबसे हल्का अटैक हेलिकॉप्टर करार दिया जा रहा है जो 15 से 16 हजार फीट की उंचाई तक उड़ान भर सकता है। एचएएल ने इसे 13 सालों की कड़ी मेहनत के बाद बनाया है। ये हवा से हवा और हवा से जमीन में मार करने वाली मिसाइलों से भी लैस है। लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर में 20 एमएम गन, 70 एमएम रॉकेट है। मिशन के दौरान हेलिकॉप्टर को 180 डिग्री पर खड़ा किया जा सकता है या फिर उल्टा भी किया जा सकता है। इसे हवा में ही 360 डिग्री पर घुमाया भी जा सकता है। ये हेलिकॉप्टर किसी भी मौसम और नाइट आॅपरेशन में सक्षम है। इसका वजन 6 टन बताया जा रहा है।
क्यों अलग है लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर : साल 1999 में हुए कारगिल वॉर के समय भारत को शुरूआती दौर में दुश्मन से मुंह की खानी पड़ी थी, क्योंकि उस समय दुश्मन ऊंचाई पर था। रात में लड़ाई लड़ी जाती थी और दिन में पूरी योजना बनाई जाती। देश के पास लाइट कॉम्बेट हेलिकॉप्टर न होने की वजह से काफी खामियाजा भुगतना पड़ा।