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गुमला बना झारखंड का वन अधिकार मॉडल

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गुमला बना झारखंड का वन अधिकार मॉडल
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सांसद सुखदेव भगत ने बसिया के लोहड़ी गांव को दिया पहला सीएफआरआर पट्टा

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। वन संरक्षण और आदिवासी सशक्तिकरण के क्षेत्र में गुमला जिले ने पूरे झारखंड में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। लोहरदगा लोकसभा के सांसद सुखदेव भगत के हाथों बसिया प्रखंड के लोहड़ी गांव को जिले का पहला सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन अधिकार पत्र प्रदान किया गया। 

सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत अभी तक गांवों को व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार (सीएफआरआर) दिये जाते थे। लेकिन सीएफआरआर उससे भी बड़ा अधिकार है। इसमें गांव की ग्राम सभा को अपने पारंपरिक वन क्षेत्र के संरक्षण, प्रबंधन, जैव-विविधता के संरक्षण और वन उपज के सतत उपयोग का पूरा कानूनी अधिकार मिल जाता है। 

अब वन विभाग नहीं, बल्कि ग्राम सभा तय करेगी कि जंगल को कैसे बचाना है। लोहड़ी गांव को यह पट्टा मिलने के बाद अब वहां के आदिवासी ग्रामीण अपने जंगल की अवैध कटाई रोक सकेंगे, वन्य जीवों की रक्षा कर सकेंगे और महुआ, केंदू पत्ता, लाख जैसे वनोपज का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन कर अपनी आजीविका बढ़ा सकेंगे। सांसद सुखदेव भगत ने कहा जल, जंगल, जमीन पर पहला हक आदिवासियों का है। 

वन अधिकार अधिनियम कांग्रेस की देन है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे वन समिति बनाकर वनों की आग, अवैध कटाई और वन्य जीवों के शिकार पर रोक लगायें। इस कार्यक्रम में गुमला उपायुक्त, उप विकास आयुक्त, जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी, कल्याण पदाधिकारी, सांसद प्रतिनिधि, सांसद के निजी सचिव, वन समिति के सदस्य सहित अनेक लोगों उपस्थित थे।

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