- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के अद्यतन कार्य प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा
- गोदाम निर्माण कार्यों में स्थानीय आदिवासी समुदाय को प्राथमिकता और सहयोग दिया जाए
- उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की रिक्तियों को भरें
- मदिरा परिवहन वाहनों को आधुनिक तकनीक से जोड़ें
- मदिरा विनिर्माण नीति का करें गठन
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज झारखंड मंत्रालय में अधिकारियों की उपस्थिति में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के अद्यतन कार्य प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने बैठक में विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के कार्य प्रगति, राजस्व संग्रहण सहित राज्य में अवैध शराब निर्माण, भंडारण एवं तस्करी पर रोक लगाए जाने को लेकर की जा रही कार्रवाई की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य में अवैध मदिरा निर्माण, परिवहन, बिक्री एवं तस्करी पर पूरी कठोरता के साथ अंकुश लगाई जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अवैध रूप से हो रहे मदिरा निर्माण न केवल सरकारी राजस्व को प्रभावित करती है, बल्कि मदिरा सेवन करने वाले लोगों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न करती है। अतएव यह जरूरी है कि अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के विरुद्ध त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई हर हाल में सुनिश्चित की जाए। बैठक में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद मौजूद रहे।
बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के राजस्व संग्रहण की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया। बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग ने निर्धारित 3,885.11 करोड़ रुपये के लक्ष्य को पार करते हुए 4,013.53 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया।
वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4,500 करोड़ रुपये राजस्व संग्रहण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अधिकारियों ने जानकारी दी कि जुलाई 2026 के मध्य तक विभाग ने 1,376 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह कर लिया है, जो वार्षिक लक्ष्य का 30.57 प्रतिशत है।