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झारखंड में राज्यसभा चुनाव का मैच फिक्स

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झारखंड में राज्यसभा चुनाव का मैच फिक्स
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त्रिवेणी दास 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। रांची में राजनीति के बड़े-बड़े महाज्ञानी, धुरंधर और पंडित पत्रकार राज्यसभा चुनाव तथा उम्मीदवार के संदर्भ में गच्चा खा गये। जबकि कल 8 जून को नामांकन की अंतिम तिथि में यह साफ हो गया कि इंडिया गठबंधन की ओर से झामुमो के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा एवं तथाकथित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अंबानी सेठ के करिंदा परिमल नाथवाणी चुनाव के मैदान में रह गये हैं तब भी धुरंधर लोग गच्चा के गड़हा में ही ऊबक-डूबक रहे हैं। अलजेब्रा वाला गणित का सवाल सुलझ नहीं रहा है। 

इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायकों की ताकत है। 28 गुना 2 बराबर 56 के अर्थमैटिक से झामुमो और कांग्रेस के दोनों उम्मीदवार की जीत पक्की होनी चाहिए। जहां तक पावर की बात है, तो हेमंत सोरेन इस समय झारखंड में सबसे पावरफुल आदमी हैं। उधर वाला सेठ यदि पैसे की ताकत रखता है तो सरकार में बैठे लोगों की तिजोरी की ताकत को कम कैसे समझा जा सकता है? 

सवाल है कि आखिर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष 6 एवं 7 जून की तारीख को ही झारखंड के लिए क्यों निर्धारित की? कांग्रेस से भाजपा में आये गौरव वल्लभ इसी दरम्यान रांची क्यों आये? उन्हें दिल्ली से कौन भेजा? उन्होंने नामांकन पत्र क्यों खरीदा? इसी तारीख के मध्य परिमल नाथवाणी रांची आते हैं।नामांकन पत्र खरीदते हैं और भारतीय जनता पार्टी अपनी संख्या-बल का रोना रोते हुए उन्हें समर्थन दे डालती है। 

राजद के 4, कम्युनिस्ट के 2 और सरयू राय 1, जयराम महतो 1 कुल जोड़ 8; हॉर्स ट्रेडिंग का बाजार सजा है। पटना में बैठे तेजस्वी यादव मैनेज्ड हो सकते हैं क्या? दिल्ली में कम्युनिस्ट के नेता मैनेज्ड हो सकते हैं क्या? लोकल लेवल पर मैनेजमेंट के आॅर्गेनिक केमिस्ट्री का फॉर्मूला कौन तोड़ पायेगा? 

क्योंकि इंडी गठबंधन 24 के आंकड़ा के ऊपर अटका हुआ है। मैच के मैदान के चारों कोना के प्लेयर ने अपना-अपना मैच फिक्स तो कर लिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि टारगेट के 2 गोल कौन टीम दाग पता है? (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं।)

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