झारखंड में मातृ मृत्यु दर पर समीक्षा, 5 जिलों में 100 प्रतिशत रिपोर्टिंग
एबीएन हेल्थ डेस्क। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग झारखंड के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आज नेपाल हाउस में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर पर एक रणनीतिक समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। बैठक में राज्य में मातृ मृत्यु की स्थिति, रिपोर्टिंग प्रक्रिया तथा मृत्यु के कारणों की विस्तार से समीक्षा की गयी।
बैठक के दौरान जिलावार प्रदर्शन की समीक्षा में पाया गया कि खूंटी, लोहरदगा, रामगढ़, साहिबगंज और सिमडेगा जिलों ने एचएमआईएस पोर्टल पर मातृ मृत्यु की 100 प्रतिशत रिपोर्टिंग की है। वहीं बोकारो, दुमका, पूर्वी सिंहभूम, रांची और पश्चिम सिंहभूम जिलों में लक्ष्य से अधिक रिपोर्टिंग दर्ज की गयी। अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलों को रिपोर्टिंग की गुणवत्ता और सटीकता बनाये रखने तथा बेहतर प्रगति लाने का निर्देश दिया।
मातृ मृत्यु के कारणों के विश्लेषण में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आये। प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव 15.5 प्रतिशत मामलों में प्रमुख कारण पाया गया, जबकि उच्च रक्तचाप या एक्लेम्पसिया 12.5 प्रतिशत तथा संक्रमण (सेप्सिस) 6.9 प्रतिशत मामलों में मृत्यु का कारण रहा।
बैठक में निर्देश दिया गया कि सभी जिलों में प्रत्येक मातृ मृत्यु मामले की वर्बल आॅटोप्सी अनिवार्य रूप से करायी जाये और रिपोर्टिंग की गुणवत्ता में सुधार किया जाये। बैठक में शिशु मृत्यु के कारणों की भी समीक्षा की गयी, जिसमें सेप्सिस संक्रमण, श्वास संबंधी समस्या, निमोनिया और प्री-मैच्योर जन्म प्रमुख कारण पाये गये।
शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए संस्थागत प्रसव की गुणवत्ता सुधारने, लेबर रूम में कार्यरत नर्सों को प्रशिक्षित करने तथा सभी प्रसव संस्थानों में बेबी वार्मर मशीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
इसके अलावा सभी प्रसव कराने वाले स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित आईईसी प्रचार-प्रसार सामग्री उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया, ताकि गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ायी जा सके।
बैठक के अंत में अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि सभी जिलों में मातृ एवं शिशु मृत्यु के प्रत्येक मामले का गहन विश्लेषण कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाये।