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रांची : सरहुल पूर्व संध्या पर संस्कृति का महापर्व

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रांची : सरहुल पूर्व संध्या पर संस्कृति का महापर्व
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टीम एबीएन, रांची। जिले में सरहुल पर्व की पूर्व संध्या पर आयोजित भव्य सांस्कृतिक समारोह ने शहर को पारंपरिक रंगों में सराबोर कर दिया। सरना नवयुवक संघ की केंद्रीय समिति के तत्वावधान में रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की झलक पेश की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही, जहां पारंपरिक वेशभूषा, संगीत और नृत्य ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। 

समारोह की खास बात यह रही कि इसमें झारखंड की विभिन्न जनजातीय भाषाओं और संस्कृतियों का संगम देखने को मिला। कुड़ुख, हो, मुंडारी, संथाली और नागपुरी भाषाओं के लोकनृत्यों की प्रस्तुति ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। कलाकारों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर जब मंच संभाला, तो पूरा परिसर उत्साह और उमंग से भर उठा। 

हर प्रस्तुति में प्रकृति, परंपरा और सामुदायिक जीवन की झलक साफ दिखाई दी, जो सरहुल पर्व के मूल भाव को जीवंत कर रही थी। आयोजकों ने बताया कि सरहुल झारखंड का प्रमुख आदिवासी पर्व है, जो प्रकृति और सरना धर्म की आस्था से जुड़ा हुआ है। इस पर्व के माध्यम से प्रकृति, विशेषकर साखू (साल) वृक्ष की पूजा की जाती है और अच्छे मौसम, समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की जाती है। 

इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए हर साल सरहुल से पहले इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि नई पीढ़ी अपनी परंपराओं से जुड़ सके। रांची विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित यह समारोह सरहुल के स्वागत में एक शानदार पहल साबित हुआ, जिसने न केवल लोगों का मनोरंजन किया, बल्कि झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

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