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2050 तक खुशहाल झारखंड सरकार का सपना : हेमंत सोरेन

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2050 तक खुशहाल झारखंड सरकार का सपना : हेमंत सोरेन
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वर्ष 2050 तक खुशहाल झारखंड बनाना अबुआ सरकार का संकल्प है  

टीम एबीएन, रांची। हमारे नौजवान साथियों के लिए भी अलग-अलग तरीके से उन्हें आगे बढ़ाने के लिए हम कार्ययोजना बना कर काम कर रहे हैं और 2050 तक राज्य को खुशहाल झारखंड बनाने की ओर भी बढ़ रहे हैं।  कल अबुआ सरकार का भी 1 साल पूरा होने वाला है। कल लगभग 10 हजार नौजवानों को हम नौकरी देने जा रहे हैं।

नौकरी 25 साल हो गये हैं हमारे राज्य को। हम लोग रजत पर्व मना रहे हैं अपने युवा झारखंड का। अब इस राज्य के हमारे होनहार नौजवानों और सभी वर्गों को अपने कंधे इतने मजबूत करने होंगे कि हमारे नेतृत्वकर्ताओं का जो सपना था उसे पूरा किया जा सके। हर क्षेत्र में हमें आगे बढ़ना होगा। हमें इस विषय पर भी काम करना है कि गांव का किसान, गांव की अर्थव्यवस्था कैसे खुशहाल रहे। 

आज उसी कड़ी में आपके परिवार की आधी से जिम्मेदारी हमने अपने कंधे पर भी उठा रखी है। यहां की आधी आबादी को, उनके अपने पैरों पर खड़े करने का, और हमारी आने वाली पीढ़ी को और मजबूती प्रदान करने के लिए काम शुरू कर दिया गया है। आज हमारी महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं को बढ़ी तेजी से अपना रही हैं और स्वावलंबी बन रही हैं। 

यह कहने में कोई गलत नहीं होगा कि वीर पुरुखों के खून से सींचा हुआ है यह प्रदेश। आज अमर वीर शहीद दादा जी का शहादत दिवस है, हम सभी के लिए कई मायने में आज यह अलग दिन भी है। क्यूंकि हम सभी के मार्गदर्शक रहे, दिशोम गुरु शिबू सोरेन हमारे बीच नहीं हैं। उनके नहीं रहने से एक युग का अंत हो गया है।

एक लंबे सफर को मंजिल तक पहुंचाकर, हमें ताकत देते हुए, हक-अधिकार को पहचानने की शक्ति देते हुए, वे विदा हो गये। अब जिम्मेवारी हम लोगों के लिए और बड़ी है। अब जीवन के आगे की लड़ाई हमें खुद लड़नी है। अब हम लोगों को पूरी एकजुटता के साथ इस राज्य के सर्वांगीण विकास में अपनी भागीदारी निभानी होगी। 

पूजनीय दादाजी अमर वीर शहीद मास्टर सोबरन सोरेन जी के 68वें शहादत दिवस पर शत-शत नमन...। हमारे इस राज्य में अलग-अलग जगहों पर कई ऐसे वीर सपूत जन्में जिन्होंने यहां के आदिवासी-मूलवासी; जल, जंगल, जमीन और हक-अधिकार के लिए हम लोगों का नेतृत्व किया और संघर्ष तथा बलिदान भी दिया। जो लोग यहां के लोगों के हक-अधिकार छीनते थे उनके खिलाफ हमारे वीर पुरखों ने हमेशा अपनी आवाज बुलंद भी रखी।

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