- धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जयंती एवं जनजातीय गौरव महोत्सव-2023 के अवसर पर खूंटी में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शामिल हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
- भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर धरती आबा के खूंटी स्थित पैतृक गांव उलिहातु पहुंचे प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री
- भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों से प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने की मुलाकात
और क्या बोले मुख्यमंत्री...
- आशा और उम्मीद है कि आज का कार्यक्रम आदिवासियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा
- विस्थापितों के लिए कार्ययोजना तैयार की जाये
- मैं आदिवासी हूं, मुझे इसपर गर्व है
एबीएन न्यूज नेटवर्क, खूंटी/रांची। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री का बिरसा मुंडा की जन्म स्थली उलिहातु आगमन एवं कार्यक्रम का आयोजन पूरे देश को जोड़ेगा। उलिहातू की इस पावन भूमि में आप पहली बार आये हैं।आशा और उम्मीद है कि आज के कार्यक्रम से आदिवासी समाज आगे बढ़ें। प्रधानमंत्री जी आपका जो संदेश होगा वह आदिवासियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। बिरसा मुंडा पूरे देश के आदिवासियों के भगवान हैं। झारखंड हमेशा से वीरों की भूमि रही है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण प्रधानमंत्री जी ने रांची स्थित भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय में देखा है। ये बातें मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कही।
मुख्यमंत्री धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जयंती एवं जनजातीय गौरव महोत्सव-2023 के अवसर पर खूंटी में आयोजित कार्यक्रम में जनसभा को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री जी, आदिवासी मुख्यमंत्री होने के नाते ना सिर्फ झारखण्ड, बल्कि पूरे देश के आदिवासियों की तरफ से, आदिवासी धर्म कोड की चिर प्रतीक्षित मांग पर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह करता हूं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके सहयोग से आने वाले दिनों में आदिवासी सहित समाज के लोगों का गौरव के साथ कल्याण सुनिश्चित हो पायेगा।
आदिवासी हक और अधिकार की लड़ाई लड़ता है
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड आदिवासी बहुल राज्य है। मैं भी आदिवासी समुदाय से आता हूं, और मुझे आदिवासी होने पर गर्व है। आदिवासी हक और अधिकार की लड़ाई लड़ता आया है। फिर वह लड़ाई महाजनों के विरुद्ध हो या अंग्रेजों के। लेकिन दुर्भाग्य है कि इतिहासकारों ने इन्हें उचित जगह नहीं दिया।
विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह सबसे पिछड़ा है। अगर ये नहीं बचे तो अन्य आदिवासी विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह में आ जायेंगे। आज हम चांद में पहुंच चुके हैं, लेकिन समाज के अंदर जो अंतर दिख रहा है, उसे अबतक मिट जाना चाहिए।
जंगल में बसने वालों को विस्थापन झेलना पड़ता है
मुख्यमंत्री ने कहा- प्रधानमंत्री जी, झारखंड कई मायनों को लेकर आगे बढ़ा है। चाहे खनिज संपदा हो या किसी अन्य विषय को लेकर हो। प्रधानमंत्री जी आग्रह है, यहां बड़े पैमाने पर आदिवासी जो जंगलों में बसते हैं उन्हें विस्थापन का दंश झेलना पड़ता है।
खनिज सम्पदाओं को निकालने के लिए बड़े पैमाने में कई वर्षों से इनका विस्थापन होता रहा है। इस क्षेत्र में बसने वाले लोगों के प्रति भी ऐसी विशेष कार्ययोजना तैयार की जाय, जहां हमारे आदिवासी भाई-बहन अपने जल-जंगल-जमीन के साथ अपने आप को समग्र विकास की कड़ियों से जोड़ सके।
ये भी हुआ...
- प्रमुख सरकारी योजनाओं का प्रसार सुनिश्चित करने के लिए विकसित भारत संकल्प यात्रा का शुभारंभ
- प्रधानमंत्री विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह मिशन शुरू, मिशन में करीब 24 हजार करोड़ व्यय होगा
- प्रधानमंत्री-किसान योजना की 15वीं किस्त जारी
- 7200 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास
इनका हुआ उद्घाटन...
- आईआईएम रांची का नया परिसर, आईआईटी आईएसएम धनबाद का नया छात्रावास
- बोकारो में पेट्रोलियम आयल और लूब्रिकेंट (पीओएल) डिपो
- हटिया-पकरा सेक्शन, तलगरिया-बोकारो सेक्शन और जारंगडीह-पतरातू सेक्शन डबल लेन।
इनकी रखी गयी आधारशिला..
एनएच 133 के महगामा-हंसडीहा सेक्शन का फोर लेन कार्य (52 किमी), एनएच 114ए के बासुकीनाथ-देवघर सेक्शन का फोर लेन कार्य (45 किमी), केडीएच-पूर्णाडीह कोल हैंडलिंग प्लांट और आईआईआईटी रांची के नए शैक्षणिक और प्रशासनिक भवन की आधारशिला।
49 हजार करोड़ की जनजातीय कल्याण एवं विकास परियोजनाओं का शुभारंभ/ लोकार्पण/ शिलान्यास और विकसित भारत संकल्प यात्रा का शुभारंभ हुआ।
मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन, केंद्रीय जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा, शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी, पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष सह पद्म भूषण से सम्मानित कड़िया मुंडा, राजधनवार विधायक बाबूलाल मरांडी, खूंटी विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा, विधायक कोचे मुंडा एवं अन्य उपस्थित थे।