वाह रे झारखंड की शिक्षा व्यवस्था
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में इस बार का बजट शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और किसानों के नाम रहा। सरकार का दावा है कि झारखंड में शिक्षा की स्थिति को बेहतर किया जा चुका है और इसपर बड़ी मात्रा में बजट का हिस्सा खर्च होना है। लेकिन हाय रे झारखंड की शिक्षा व्यवस्था जहां स्कूल में शिक्षक नहीं हैं और सरकार को लग रहा है कि पैसा दे देने से बच्चे पढ़ लेंगे।
झारखंड सरकार ने इस बार अपने बजट में स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के नाम कुछ भी नहीं किया है। न ही शिक्षकों की बहाली को लेकर ही कोई नया रास्ता खोला गया है। बता दें कि प्रदेश में 2015-16 के बाद से अभी तक प्रारंभिक कक्षाओं के लिए शिक्षकों की नियुक्ति तक नहीं हुई है।
बता दें कि राज्य के 6300 से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं, जहां एक शिक्षक के दम पर पूरी शिक्षा व्यवस्था है। वहीं 12 हजार से ज्यादा ऐसे स्कूल हैं जो दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में अगर शिक्षक अवकाश पर गये तो इन स्कूलों की हालत का अंदाजा आप स्वतः लगा सकते हैं। सरकार की तरफ से जहां उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की बात की जा रही है।
वहां स्कूलों के ऐसे हालात को देखकर नहीं लगता की झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में तत्काल कोई सुधार होनेवाला है। बजट में प्राथमिक स्कूल में बच्चों को मातृभाषा में पढ़ाने की बात कही जा रही है, जबकि उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं है।
2016 में राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा के जो 53 हजार पास अभ्यर्थी हैं उन्हें आज तक किसी नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल तक नहीं होने का मौका मिला है। 2013 में टेट पास 48 हजार युवकों को अभी नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होने का मौका मिलेगा। इस सब के लिए शिक्षकों की नियुक्ति की घोषणा की जरूरत है जो अभी तक सरकार की तरफ से की ही नहीं गयी है। राज्य में प्रारंभिक स्कूलों के 50 हजार शिक्षकों के पद पर नियुक्ति होनी है। लेकिन यह प्रक्रिया आज तक शुरू नहीं हो पायी है।