एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन से जारी युद्ध के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर आज रूस की दो दिनों के दौरे पर जायेंगे। अपनी इस यात्रा के दौरान वह रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और डिप्टी प्राइम मिनिस्टर डेनिस मंटुरोव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। उनकी अधिकतर बैठकें मंगलवार को निर्धारित हैं। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जयशंकर के दौरे की जानकारी दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया था कि रूस दौरे के दौरान जयशंकर अपने समकक्ष के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत करेंगे। जयशंकर की यह यात्रा 15-16 नवंबर को बाली में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन से कुछ दिन पहले हो रही है। यूक्रेन में युद्ध छिड़ने के बाद यह पहला मौका होगा, जब रूसी राष्ट्रपति पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन सहित कई देशों के नेता एक ही टेबल पर होंगे। जयशंकर की रूस यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह दौरा यूक्रेन के साथ जंग के बीच हो रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि विदेश मंत्री अपनी बैठकों में युद्ध की शांतिपूर्ण समाप्ति की बात जरूरी उठायेंगे। जयशंकर ने आखिरी बार जुलाई 2021 में रूस का दौरा किया था।
वाशिंगटन पोस्ट ने सप्ताहांत में बताया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से फोन पर बात की थी और शांति वार्ता पर मदद की पेशकश की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, जेलेंस्की ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। जेलेंस्की के कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, जेलेंस्की ने उनसे कहा कि यूक्रेन पुतिन के साथ कोई बातचीत नहीं करेगा। हालांकि यूक्रेन बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। बयान में कहा गया कि रूस ने जानबूझकर बातचीत के प्रयासों को कमजोर किया है।
यूक्रेन में जारी संघर्ष के बीच जयशंकर की रूस यात्रा हो रही है। पिछले कुछ महीनों में कई पश्चिमी देशों द्वारा दबाव बनाये जाने के बावजूद भारत ने रूस से रियायती कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है। फरवरी में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से जयशंकर और लावरोव चार बार मिल चुके हैं। रूस के विदेश मंत्री ने अप्रैल में भारत का दौरा किया था। इस दौरे के दौरान लावरोव ने जयशंकर के साथ व्यापक बातचीत की थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पिछले साल दिसंबर में भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आये थे।