Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
लाइव: 25
होम ई-पेपर देश झारखंड खेल समाचार राज काज कानून व्यवस्था करियर बिजनेस वर्ल्ड हेल्थ विचार ज्ञान विज्ञान समाज वन और पर्यावरण मनोरंजन बिहार विज्ञापन
राज काज

जानें डिजिटल रुपये के फायदे और ट्रांजेक्शन का तरीका...

शेयर करें: WhatsApp Facebook X Back to ePaper
जानें डिजिटल रुपये के फायदे और ट्रांजेक्शन का तरीका...
विज्ञापन
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में डिजिटल करेंसी यानि वर्चुअल करेंसी की एक नवंबर से शुरुआत हो गई है। रिजर्व बैंक ने 01 नवंबर 2022 को अपनी डिजिटल करेंसी को लॉन्च कर दिया है। इसे सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी के नाम से भी जाना जाता है। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट में सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के करीब 9 बैंकों को जोड़ा गया है। हालांकि, अभी इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। अभी होलसेल ट्रांजेक्शन में इस्तेमाल किया जायेगा। 1 महीने के अंदर इसका रिटेल इस्तेमाल भी शुरू हो जायेगा। बता दें कि डिजिटल रूपी ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा। इसका इस्तेमाल उसी तरह से होगा, जैसे क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल होता है। आरबीआई के अनुसार यह पेमेंट का माध्यम होगा, जो सभी नागरिक, बिजनेस, सरकार और अन्य के लिए एक लीगल टेंडर के तौर पर जारी किया जायेगा। इसकी वैल्यू सेफ स्टोर वाले लीगल टेंडर नोट (मौजूदा करेंसी) के बराबर ही होगी। देश में आरबीआई की डिजिटल करेंसी (ई-रुपये) आने के बाद आपको अपने पास कैश रखने की जरूरत कम हो जायेगी। आरबीआई द्वारा रेगुलेट किए जाने से यह सेफ होगा। सीबीडीसी देश का डिजिटल टोकन होगा। रिजर्व बैंक ने 1 नवंबर से बड़े ट्रांजैक्शन के लिए इस्तेमाल होने वाले डिजिटल रुपी के लिए कुल 9 बैंकों का चयन किया है। इन बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, यस बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एचएसबीसी शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट की कामयाबी के बाद इसमें और बैंकों को भी जोड़ा जायेगा। एक नवंबर से डिजिटल रुपी का इस्तेमाल होलसेल ट्रांजेक्शन के लिए किया जायेगा। रिजर्व बैंक के मुताबिक, इसका इस्तेमाल सरकारी सिक्योरिटीज की खरीद बिक्री के लिए होगा। लेकिन एक महीने के अंदर रिटेल ट्रांजेक्शन के लिए भी इसको इस्तेमाल लाया जायेगा। रोजमर्रा के लेनदेन में होगी आसानी : डिजिटल रुपी के 2 फॉर्म हैं। पहला रिटेल (सीबीडीसी-आर) और दूसरा होलसेल (सीबीडीसी-डब्ल्यू) इस्तेमाल के लिए। रिटेल सीबीडीसी सभी कंज्यूमर यानी प्राइवेट सेक्टर, नॉन फाइनेंशियल कंज्यूमर्स और बिजनेस के लिए होगा। जबकि होलसेल सीबीडीसी सेलेक्टेड फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के लिए होगा। रिटेल सीबीडीसी रिटेल ट्रांजेक्शन का ही इलेक्ट्रॉनिक वर्जन है। इसका इस्तेमाल लोग रोजमर्रा के लेनदेन के लिए भी कर सकेंगे। जिससे लोगों को कैश ले जाने से राहत मिलेगी। इसके साथ ही कई समस्याओं से भी छुटकारा मिल जायेगा।
विज्ञापन