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आईपीएल की शुरुआत मार्च-मई के बदले जनवरी में हो : ललित मोदी

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आईपीएल की शुरुआत मार्च-मई के बदले जनवरी में हो : ललित मोदी
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मार्च-मई के बजाय जनवरी में शुरू हो आईपीएल

ललित मोदी ने सुझायी नयी विंडो, मैचों की संख्या बढ़ाने पर दिया जोर 

एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। आईपीएल के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने टूर्नामेंट के आयोजन की मौजूदा समयसीमा में बदलाव करने की वकालत की है। उन्होंने आईपीएल के लिए मार्च से मई के बजाय अक्तूबर से अप्रैल के बीच का समय तय करने का सुझाव दिया है। ललित मोदी के मुताबिक, टूर्नामेंट की शुरुआत जनवरी से की जा सकती है और टीमों की संख्या के हिसाब से मैचों की संख्या बढ़ाकर 94 की जा सकती है। 

ललित मोदी ने फुटबॉल लीग का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह फुटबॉल प्रतियोगिताएं कई महीनों तक चलती हैं, उसी तरह आईपीएल के आयोजन के लिए भी लंबी अवधि तय की जा सकती है। उन्होंने आईसीसी चेयरमैन जय शाह से भी इस दिशा में पहल करने और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कैलेंडर को व्यवस्थित करने में मदद करने की अपील की। 

मोदी ने कहा कि जब 2008 में आईपीएल की शुरुआत हुई थी, तब अप्रैल-मई का समय ही उपलब्ध था। उस समय कई तरह की चुनौतियां और विरोध भी थे, लेकिन उन्होंने ऐसे समय में टूर्नामेंट शुरू किया, जब इसे लेकर काफी संदेह जताया जा रहा था। क्रिकबज के अनुसार मोदी ने कहा है कि आज आईपीएल को देखकर उस समय की परिस्थितियों का आकलन नहीं किया जा सकता, जब मैंने इसकी शुरुआत की थी। 

उस समय अप्रैल-मई का समय उपलब्ध था। इसका मतलब यह नहीं था कि भारतीय क्रिकेट के लिए हमेशा यही सबसे उपयुक्त समय रहेगा। हमने आठ टीमों और 59 मैचों के साथ शुरुआत की थी। बाद में बीसीसीआई ने टीमों की संख्या बढ़ाकर 10 कर दी। उन्होंने आगे कहा कि 10 टीमों के बीच पूरी होम और लीग कराने के लिए 90 लीग मैच और चार प्लेआॅफ मुकाबले जरूरी होंगे। 

इस तरह कुल मैचों की संख्या 94 हो जायेगी, जो शुरुआती प्रारूप से 35 मैच अधिक है। यानी मैचों की संख्या में करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। ललित मोदी ने कहा कि मैचों की संख्या बढ़ने के साथ खिलाड़ियों, दर्शकों और टूर्नामेंट से जुड़े अन्य लोगों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में आईपीएल के आयोजन का समय और मैचों का कार्यक्रम इस तरह तय होना चाहिए, जिससे सभी को बेहतर अनुभव मिल सके। 

उन्होंने कहा कि परिवारों के लिए छुट्टियों का समय आईपीएल देखने के लिहाज से सुविधाजनक जरूर रहा है, लेकिन दर्शक सिर्फ दो महीने तक ही क्रिकेट देखने में रुचि नहीं रखते। वे अपनी पसंदीदा टीमों और खिलाड़ियों को पूरे सीजन में खेलते देखना चाहते हैं। इसलिए सप्ताहांत के मुकाबलों, बेहतर समय और स्टेडियम में आरामदायक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर कार्यक्रम तैयार किया जाना चाहिए। साथ ही स्कूलों की छुट्टियों का भी ध्यान रखना जरूरी है।

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