एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। सच कहा जाए तो इस कप्तानी के साये में अगर आप जसप्रीत बुमराह को भी ले आएं, तो शायद उनके भी चार ओवरों में पचास रन लुट जाएंगे! न्यूजीलैंड के खिलाफ इस पहले टी-20 मुकाबले में श्रेयस अय्यर का टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला ही गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है।
कप्तान साहब शायद यह भूल गए कि पिछले कुछ सालों में जब भी टीम इंडिया ने 200 से बड़े पहाड़ों जैसे लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदा है, तो उस अजेय रथ की धुरी सूर्यकुमार यादव ही हुआ करते थे। अब अगर इस भारी-भरकम लक्ष्य को पार करना है, तो खुद श्रेयस को ही मोर्चे से अगुवाई करते हुए कोई चमत्कारी पारी खेलनी होगी।
इस मैच ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि श्रेयस अय्यर फिलहाल टी-20 फॉर्मेट की कप्तानी के सांचे में बिल्कुल फिट नहीं बैठते। जरा मैदान पर उनके रणनीतिक फैसलों पर गौर कीजिए जिस भुवनेश्वर कुमार का टी-20 करियर ही डेथ ओवर्स में महंगी गेंदबाजी के चलते लगभग खत्म होने की कगार पर था, कप्तान उनसे वही पुरानी और घातक गलती फिर दोहराने को कह रहे हैं।
जब आपके पास अर्शदीप सिंह और एक्सप्रेस पेसर मयंक यादव जैसे धुरंधर मौजूद हों, तो पारी के अंतिम ओवरों का दबाव नीतीश रेड्डी जैसे युवा ऑलराउंडर पर डालना किसी भी क्रिकेट फैन की समझ से परे है। पावरप्ले में मयंक यादव से पहला ओवर न करवाने की यह रणनीतिक चूक टीम को बहुत भारी पड़ी।
अगर गेंदबाजों का रोटेशन सूझबूझ के साथ हुआ होता, तो कीवी टीम किसी भी हाल में 225 रनों के उस विशाल स्कोर तक नहीं पहुंच पाती। अभी हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में भी हमने उनकी कप्तानी की इसी रक्षात्मक सोच को करीब से देखा था, जहां बारिश ने एक मैच में टीम की लाज बचा ली थी।
अब क्रिकेट के जानकारों और फैंस के बीच यह तस्वीर बिल्कुल साफ हो चुकी है कि अगर टीम इंडिया को टी-20 में फिर से उसी बेखौफ और अजेय अंदाज में लौटना है, तो विश्व विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव को दोबारा कमान सौंपने में ही भलाई है।