विवादों से भरे वर्ल्ड कप के बीच और अमीर बनकर उभरा फीफा
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। वर्ल्ड कप से जुड़े एक और विवाद के शांत होने के साथ ही एक बात साफ हो गयी है कि फीफा के बॉस जियानी इन्फेंटिनो पहले से कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं। 2026 के टूर्नामेंट की लगभग हर पहलू से आलोचना हुई है, चाहे वह टिकट की कीमत हो, ईरान की टीम को बाहर रखना हो, सोमालिया के रेफरी पर रोक लगाना हो या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पहली बार फीफा शांति पुरस्कार देना हो।
पिछले कुछ दिनों में फीफा के प्रति नाराजगी तब चरम पर पहुंच गई जब ट्रंप के दबाव में एक सस्पेंडेड स्टार अमेरिकी खिलाड़ी को मैदान पर उतरने की इजाजत दी गई जिसकी गैर-अमेरिकी लोगों ने कड़ी आलोचना की। स्पोर्ट्स लॉयर निक डी मार्को ने कहा, अब मुद्दा यह नहीं है कि ओरिजिनल रेड कार्ड सही था या नहीं। मुद्दा यह है कि क्या फीफा ने वर्ल्ड कप की गरिमा और फुटबॉल के ग्लोबल रेगुलेटर के तौर पर अपनी अथॉरिटी को कमजोर किया है।
हालांकि, टूर्नामेंट खत्म होने के बाद ये शिकायतें शायद खत्म हो जायेंगी। बेल्जियम द्वारा वर को 4-1 से बुरी तरह हराने के बाद अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को खेलने की इजाजत देने से जुड़े विवाद की तीव्रता कम होने लगी है। इस बीच इन्फेंटिनो अपने सबसे अहम काम पैसा कमाने पर पूरी तरह से फोकस बनाये हुए हैं। फीफा को सत्ता और पैसे के साथ अपनी दूसरी जिम्मेदारी (खेल के नियमों और कानूनों को बनाये रखने) के बीच संतुलन बनाने में लगातार तनाव का सामना करना पड़ता है। पैसा जीत रहा है।
दुनिया के सबसे ज्यादा कमाई वाले खेल के 56 वर्षीय एडमिनिस्ट्रेटर के नेतृत्व में फीफा के 2026 वर्ल्ड कप से सीधे तौर पर लगभग $9 बिलियन कमाने की उम्मीद है, जो कतर में हुए 2022 एडिशन से लगभग $2 बिलियन ज्यादा है। एक दशक से कुछ समय पहले वर प्रॉसिक्यूटर द्वारा भ्रष्टाचार के मामले की जांच के बाद फीफा घोटालों का पर्याय बन गया था।
एक साल के भीतर इन्फेंटिनो को संगठन के नए चेहरे के तौर पर लाया गया। उन्होंने सुधारों की देखरेख की, पारदर्शिता में थोड़ी बढ़ोतरी की और फीफा के टूर्नामेंट्स (जिसमें ज्यादा कमाई वाला क्लब वर्ल्ड कप भी शामिल है) के साइज और दायरे को काफी बढ़ाया। लेकिन उन्होंने गवर्निंग बॉडी को पैसे, सत्ता और राजनीति को मिलाने के पुराने रास्ते पर भी आगे बढ़ाया है।