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डेब्यू सीरीज़ में मैन ऑफ़ द सीरीज़ और फिर कैरियर खत्म, जानें कौन...

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डेब्यू सीरीज़ में मैन ऑफ़ द सीरीज़ और फिर कैरियर खत्म, जानें कौन...
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एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। डेब्यू सीरीज़ में मैन ऑफ़ द सीरीज़! फिर आँखों का ऑपरेशन हुआ, और वो गेंद देखना ही भूल गया! विजय भारद्वाज: वो चश्मे वाला ऑलराउंडर जिसका करियर डॉक्टर की टेबल पर खत्म हुआ! क्रिकेट में खराब फॉर्म से वापसी हो सकती है, चोट से भी वापसी हो सकती है। लेकिन अगर एक क्रिकेटर अपनी आँखें ही खो दे, तो क्या होगा? कर्नाटक के विजय भारद्वाज (विजय भारद्वाज) के साथ यही हुआ।

द ड्रीम डेब्यू (LG Cup 1999)

1999 में केन्या (LG Cup) में एक नया लड़का आया। आँखों पर चश्मा (Spectacles), शांत स्वभाव। उस सीरीज़ में साउथ अफ्रीका जैसी मजबूत टीम थी। विजय भारद्वाज ने कमाल कर दिया।

  1. विकेट: 10
  2. रन: मुश्किल समय में महत्वपूर्ण पारियां। उन्हें अपनी पहली ही सीरीज़ में मैन ऑफ़ द सीरीज़ चुना गया! सबने कहा—कपिल देव के बाद भारत को असली ऑलराउंडर मिल गया। उस साल उन्होंने रणजी ट्रॉफी में भी 1000+ रन और 40+ विकेट लिए थे (गोल्डन सीजन)।

द ट्रेजेडी (द सर्जरी गॉन रॉन्ग):

यहीं से कहानी ने भयानक मोड़ लिया। विजय को चश्मा लगाकर खेलने में थोड़ी दिक्कत होती थी। किसी ने सलाह दी- लेजर सर्जरी (लासिक) करवा लो, चश्मा हट जाएगा। उन्होंने सर्जरी करवाई। लेकिन सर्जरी फेल हो गई। उनकी आंखों का फोकस बिगड़ गया। जब वह मैदान पर गए, तो उन्हें गेंद की लाइन और लेंथ समझ ही नहीं आ रही थी। वह गेंद को ट्रैक नहीं कर पा रहे थे। सोचिए, एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर जिसे गेंद ही ठीक से न दिखे!

अंत

इसके बाद उनकी फॉर्म खराब तरह गिरी। सिर्फ 3 टेस्ट और 10 वनडे के बाद उन्हें टीम से ड्रॉप कर दिया गया। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में वापसी की कोशिश की, लेकिन वो नजर कभी वापस नहीं आया। एक सुपरस्टार का करियर सिर्फ एक गलत मेडिकल सलाह ने खत्म कर दिया। आज वह कोच और कमेंटेटर हैं, लेकिन उनकी कहानी भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी What If है।

द लॉस्ट ऑलराउंडर:

  1. धमाका: डेब्यू ODI सीरीज़ (1999) में मैन ऑफ़ द सीरीज़।
  2. पहचान: चश्मा पहनने वाला ऑलराउंडर।
  3. घरेलू रिकॉर्ड: एक रणजी सीज़न में 1000+ रन और 40 विकेट।
  4. कारण: आँख की सर्जरी फेल होने से उनकी नज़र खराब हो गई। क्या आपको विजय भारद्वाज का वो चश्मा और ऑफ़-स्पिन याद है?
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