- 2019 चुनाव के बाद कितनी बदली झारखंड की राजनीति
- चंपई सोरेन ने कैसे हासिल किया विश्वास मत
टीम एबीएन, रांची। झारखंड की सरकार ने सोमवार को विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया। चंपई सोरेन सरकार के पक्ष में 47 मत पड़े जबकि विपक्ष में 29 मत ही पड़े। तीन सदस्य अनुपस्थित रहे। इसके साथ ही राज्य में 31 जनवरी से चल रहे सियासी उठापटक का पटाक्षेप हो गया।
इससे पहले गठबंधन सरकार के सभी विधायक हैदराबाद में डेरा डाले हुए थे। इन तमाम घटनाक्रमों के केंद्र में पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का इस्तीफा रहा। भूमि घोटाले में ईडी द्वारा हेमंत की गिरफ्तारी के बाद राज्य में सियासी संकट खड़ा हो गया था।
पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे कैसे थे
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा के लिए पिछले चुनाव 30 नवंबर से 20 दिसंबर 2019 तक हुए थे। ये चुनाव पांच चरणों में कराए गए थे जिसमें कुल 65.18 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था। नतीजे 23 दिसंबर 2019 को घोषित किये गये। जब नतीजे सामने आये तो सत्ताधारी भाजपा को झटका लगा और वह 41 सीटों के जादुई आंकड़ों से पिछड़ गयी।
हेमंत सोरेन की पार्टी जेएमएम को सबसे ज्यादा 30 सीटें आयीं। इसके बाद भाजपा को 25 सीटें मिलीं। अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस के 16 विधायक, झाविमो के तीन और आजसू के दो विधायक जीते। इसके अलावा दो निर्दलीय विधायक जबकि राजद, सीपीआई (एमएल) और एनसीपी के एक-एक विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे।
राज्य में महागठबंधन की सरकार बनी
हार के बाद भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री रहे रघुबर दास ने इस्तीफा दे दिया। जेएमएम के नेतृत्व में राज्य में महागठबंधन की सरकार बनी। इस सरकार में जेएमएम को कांग्रेस, राजद, सीपीआई (एमएल) और एनसीपी का साथ मिला। इसके अलावा झाविमो प्रमुख और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी हेमंत सोरेन सरकार को अपनी पार्टी का समर्थन दे दिया। वहीं 24 दिसंबर 2019 को झामुमो विधायक दल का नेता हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
बाबूलाल मरांडी ने भाजपा में किया अपनी पार्टी का विलय
फरवरी 2020 में झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी घर वापसी करते हुए भाजपा में शामिल हो गके। इसके अलावा उन्होंने अपनी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) का भाजपा में विलय भी कर दिया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बाबूलाल मरांडी का पार्टी में स्वागत किया। उसी समय झारखंड विकास मोर्चा से निकाले गए दो विधायक प्रदीप यादव और बंधु तीर्की कांग्रेस में शामिल हो गये। झारखंड कांग्रेस के तत्कालीन प्रभारी आरपीएन सिंह की मौजूदगी में दोनों विधायकों ने कांग्रेस का हाथ थामा था।
कितनी सीटों पर हुए उपचुनाव
नवंबर 2020 में झारखंड में दो सीटों बेरमो और दुमका के लिए उपचुनाव हुए थे। सत्ताधारी गठबंधन ने दोनों ही विधानसभा सीटें बरकरार रखते हुए सफलता पाई थी। बेरमो में कांग्रेस के अनूप सिंह ने भाजपा के योगेश्वर महतो को हराया था। वहीं, दुमका में तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के छोटे भाई बसंत सोरेन ने भाजपा की लुईस मरांडी को शिकस्त दी थी।
इसके बाद मई 2021 में मधुपुर विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव हुआ था। इसमें झामुमो प्रत्याशी हफीजुल हसन अंसारी ने भाजपा के गंगा नारायण सिंह को पराजित किया था। झारखंड की मांडर विधानसभा सीट पर जून 2022 में उपचुनाव हुए थे। इसमें कांग्रेस प्रत्याशी शिल्पी नेहा तिर्की जीती थीं। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी गंगोत्री कुजूर को हराया था।
पिछले साल मार्च में रामगढ़ सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे सामने आए थे। इसमें एनडीए की तरफ से आजसू पार्टी की प्रत्याशी सुनीता चौधरी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के बजरंग महतो को हराया था।
राज्य में अंतिम उपचुनाव गिरिडीह जिले की डुमरी विधानसभा सीट के लिए हुआ था। सितंबर 2023 में आये नतीजे में झामुमो उम्मीदवार बेबी देवी ने आजसू पार्टी की उम्मीदवार यशोदा देवी को हराकर जीत हासिल की थी।