केंद्रीय मंत्री बनने के बाद पहली बार रांची पहुंचे संजय सेठ और अन्नपूर्णा देवीभाजपा कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से किया स्वागतटीम एबीएन, रांची। केंद्रीय मंत्री बनने के बाद पहली बार संजय सेठ और अन्नपूर्णा देवी रांची पहुंचे। भाजपा कार्यकर्ताओं ने संजय सेठ और अन्नपूर्णा देवी का जोरदार स्वागत किया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने फूल माला लेकर और ढोल नगाड़े के साथ दोनों केंद्रीय मंत्री का स्वागत किया। एयरपोर्ट से दोनों नेताओं का काफिला भाजपा प्रदेश कार्यालय की ओर बढ़ गया है। वहीं भाजपा महिला कार्यकर्ताओं का कहना है कि पहली बार रांची संसदीय क्षेत्र से किसी को मंत्री बनाया गया है। हम सभी लोकसभा क्षेत्र वासियों को दोनों मंत्रियों से बहुत उम्मीद है। वहीं, बता दें कि मंत्री बनने के बाद से संजय सेठ का यह पहला रांची दौरा है। वह 3 दिनों तक राज्य के दौरे पर रहेंगे।बता दें कि लोकसभा चुनाव जीतने के बाद रांची के सांसद संजय सेठ और अन्नपूर्णा देवी को केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया है। अन्नपूर्णा देवी मोदी कैबिनेट 2.0 में भी केंद्रीय राज्य मंत्री रह चुकी है।जबकि संजय सेठ पहली बार केंद्रीय मंत्री बने हैं। सांसद संजय सेठ ने 2019 में पहली बार रांची लोकसभा से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में जीत के बाद उन्हें 2024 में भी टिकट दिया गया। इस जीत के साथ सांसद संजय सेठ को अब पीएम मोदी की कैबिनेट में जगह दी गयी है।
अर्जुन मुंडा को लेकर भाजपा में मंथनकेंद्रीय संगठन में हो सकते हैं शामिलबाबूलाल मरांडी को हो सकती है परेशानीटीम एबीएन, रांची। पूर्व केंद्रीय मंत्री और बड़े आदिवासी नेता अर्जुन मुंडा की हार से भाजपा का नेतृत्व चिंतित है। अर्जुन मुंडा के राजनीतिक भविष्य और उनकी भूमिका को लेकर भाजपा में मंथन शुरू हो गया है। अर्जुन मुंडा का कहां किस स्तर पर उपयोग किया जाए इस पर विचार विमर्श चल रहा है। झारखंड में इसी साल के अंत में विधानसभा का चुनाव भी होना है। इसलिए अर्जुन मुंडा के दायित्व को लेकर चिंता बढ़ गयी है। पार्टी में रांची से लेकर दिल्ली तक हलचल है। सूत्र बताते हैं कि फिलहाल अर्जुन मुंडा को केंद्रीय संगठन में शामिल किया जायेगा। उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है। भाजपा में नये अध्यक्ष पर मंथन तेज है। जल्दी घोषणा की जायेगी। नयी टीम में अर्जुन मुंडा को शामिल किये जाने की संभावना है। झारखंड से अभी केंद्रीय टीम में कोई नेता नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास उपाध्यक्ष और आशा लकड़ा सचिव थी। रघुवर दास ओडिशा के राज्यपाल बना दिये गये और आशा लकड़ा अनुसूचित जनजाति आयोग में सदस्य हैं। ऐसे में अर्जुन मुंडा को महासचिव या उपाध्यक्ष का दायित्व दिया जा सकता है। अर्जुन मुंडा खूंटी से चुनाव हार चुके हैं। लेकिन भाजपा नेतृत्व ने जिस तरह से राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में नया प्रयोग करते हुए अधिकांश बड़े व कद्दावर नेताओं को विधानसभा चुनाव में उतारा था। इसी तरह अर्जुन मुंडा को भी विधानसभा चुनाव लड़ाया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में पक्के तौर पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। अर्जुन मुंडा पर निर्भर करता है कि वह खुद चुनाव लड़ेंगे या किसी को अपनी सीट खरसावां से मैदान में उतारेंगे। अर्जुन मुंडा को लेकर केंद्रीय नेतृत्व इसलिए भी चिंतित है कि वह नहीं चाहता है कि झारखंड में पार्टी गुटों में बटी रहे। भाजपा नेतृत्व ने बाबूलाल मरांडी के हाथों में पार्टी की कमान सौंप कर उन्हें खुली छूट दे रखी है।मरांडी को किसी बड़े नेता से चुनौती न मिले इसी उद्देश्य से पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को ओडिशा का राज्यपाल बना राज्य की राजनीति से अलग कर दिया गया। रघुवर दास की विदाई के बाद उनका गुट खुद समाप्त होगा। रघुवर दास की अच्छी पैठ रहने के बावजूद राज्य की राजनीति से उन्हें अलग कर दिया गया।अर्जुन मुंडा को लेकर केंद्रीय नेतृत्व की चिंता इसलिए भी अधिक है कि अर्जुन मुंडा भी आदिवासी समुदाय से आते हैं और बड़े नेता हैं। कार्यकर्ताओं में अभी सबसे अधिक लोकप्रिय हैं। और उनको चाहने वाले अधिक हैं। ऐसे में यदि वह राज्य की राजनीति में सक्रिय रहेंगे तो बाबूलाल मरांडी के लिए चुनौती पैदा करेंगे।बाबूलाल को यदि फ्री हैंड देना हैं तो अर्जुन मुंडा को केंद्रीय टीम में रखना होगा नहीं तो फिर बाबूलाल मरांडी की परेशानी बढ़ जायेगी। राज्य में राजनीति के दो केंद्र बन जायेंगे बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा। ऐसे में अधिक समर्थन अर्जुन मुंडा को मिलना तय है। हालांकि यह भी सच है कि बाबूलाल मरांडी भी आदिवासी वोटरों को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं। भाजपा का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।सूत्र बताते हैं कि अर्जुन मुंडा को यह आभास था कि खूंटी से चुनाव जीतना मुश्किल है। इसलिए वह लोकसभा के बजाय राज्यसभा की सीट चाहते थे। जिस सीट से प्रदीप वर्मा चुने गये उस पर मुंडा की नजर थी। लेकिन पीएम मोदी ने साफ कर दिया था कि पार्टी के सभी बड़े नेता इस बार लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। इसलिए अर्जुन मुंडा को न चाहते हुए भी चुनाव लड़ना पड़ा और परिणाम सबके सामने है। अर्जुन मुंडा को लेकर पार्टी की दुविधा बढ़ गयी है।
सीएम चंपाई सोरेन का अधिकारियों को निर्देशटीम एबीएन, रांची। सीएम चंपाई सोरेन ने गुरुवार को सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने को लेकर अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। सीएम चंपाई ने इस दौरान चयन प्रक्रिया को समय सीमा के अंदर पूरी करने का निर्देश दिया। सीएम ने बैठक में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं की जानकारी ली।सीएम चंपाई सोरेन ने कहा कि युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। ऐसे में सरकारी विभागों में जो भी रिक्तियां हैं और जिन पदों पर नियुक्ति की जानी है, उसकी चयन प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू की जाये। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी नियुक्तियों में सरकार की नियुक्ति नियमावली और रोस्टर का पालन होना चाहिए।सीएम चंपाई सोरेन ने कहा कि जेएसएससी द्वारा जो भी प्रतियोगिता परीक्षाओं का आयोजन हो, उसमें पूरी गोपनीयता और पारदर्शिता बरती जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए बोला कि किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जायेगी। अगर पेपर लीक जैसी घटनाएं होती है तो जो भी दोषी पाये जायेंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी।सीएम चंपाई सोरेन ने पुलिस महानिदेशक और जेएसएससी के अध्यक्ष से कहा कि झारखंड उत्पाद आरक्षी प्रतियोगिता परीक्षा के जरिए 580 पद और झारखंड आरक्षी प्रतियोगिता परीक्षा के 4919 पदों पर प्रक्रिया अविलंब शुरू की जाये। पुलिस महानिदेशक ने बताया कि झारखंड उत्पाद आरक्षी प्रतियोगिता परीक्षा के अभ्यर्थियों का शारीरिक दक्षता परीक्षण इसी माह शुरू हो जायेगा। इसकी प्रक्रिया पूरी होने पर सफल अभ्यर्थियों की सूची जेएसएससी को उपलब्ध करा दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि झारखंड उत्पाद सिपाही और झारखंड आरक्षी प्रतियोगिता परीक्षा के अभ्यार्थियों के शारीरिक दक्षता परीक्षण में पारदर्शिता और निगरानी के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में सिर्फ दो तरह के लोग रहते हैं। पहला, जिन्हें झारखंड से प्यार है और दूसरे, जो झारखंड में सिर्फ माल बटोरने आते हैं। झारखंड का दायित्व संभालने आये कुछ लोगों को ही देखिये न, जब आते हैं तो सिर्फ कुर्ता- पैजामा और दीन हीन अवस्था, चेहरे से गरीबी और विनम्रता। लेकिन जब जाते हैं तो भौकाल टाईट। हाथ में महंगी घड़ी, महंगी गाड़ियां, बैंक बैलेंस, अपने राज्य में कई जगहों पर प्लॉट और कभी- कभी कमर्शियल कॉम्प्लेक्स। कुछ दिन तो गुजारो झारखंड में...जाहिर है, ये सब झारखंड में कुछ दिन गुजारने का ही परिणाम है। फिलहाल तो मीडिया में चारों ओर चर्चा थार गाड़ी की है। कई लोग रीडो घड़ी की भी बातें कर रहे हैं।। तो कुछ टिकट के नाम पर एडवांस पेमेंट की...यहां भी हनी और ट्रैप दोनों है, पर वो गुजरे जमाने की बात है, अपने गृह प्रदेश की, लेकिन कुछ लोग पुरानी चीजों को भी सहेज कर रखते हैं। पता नहीं क्यों? वाह! क्या संस्कार हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय होते तो दौड़कर गले लगा लेते। मेरे छुपे हुए कोहिनूर, कहां थे अबतक?तो कहानी ये है कि भाई साहब ने बयाना एडवांस में उठा लिया। शादी का सट्टा जानते हैं ना, यहां पर इसे विधानसभा का एडवांस बुकिंग समझ लीजिए। टिकट दिला दूंगा, इस नाम पर कई जगहों से एडवांस ले चुके हैं। एडवांस तो लोकसभा चुनाव के लिए भी था। पर काम नहीं करवा सके। एडवांस की रकम में से थार तो चली गईं गृह प्रदेश... अब वो तो वापस हो नहीं सकती, कम से कम पैसे तो दे देते। अब जिसने दिया, वो छटपटा रहे थे, पता नहीं पैसे वापस मिले या नहीं, पूछ कर बताना पड़ेगा। भाई साहब की कहानी इतने पर ही खत्म नहीं होती।यूपी के दो छोरे का जलवा राहुल गांधी-अखिलेश यादव तक ही नहीं है, बल्कि यहां तक आ पहुंची है।तू मुझे खुजा, मैं तुझे खुजाऊं मेरे दिलबर जानी...कौन है वो, कैसी है वो तेरे सपनो की रानी...दोनों छोरे एक दूसरे की हर मुमकिन मदद करते हैं । और तो और माल कहां से बटोरा जा सकता है, उसमें भी एक दूसरे के सीक्रेट पार्टनर हैं।इसी लोक सभा चुनाव में पता करवा लीजिए न, कोल्हान से लेकर संथाल तक जलवा-जलवा, बस तेरा जलवा गाने की गूंज थी। एक कैंडिडेट ने तो झुंझलाकर बहस भी कर लिया, कहां से लाऊं इतना पैसा", "किस बात के लिए दूं पैसा ...जिलाध्यक्षों की हालत तो पूछिये मत। पर सफलता के रास्ते में ये सब थोड़ा बहुत चलता रहता है। बैठकों में खुलेआम कहते हैं कि झारखंड के कुछ दो कौड़ी के पत्रकार बिना तथ्य के कुछ भी लिखते हैं, उन्हें फॉलो या लाइक किया तो संगठन के कार्यकर्ताओं की खैर नहींजब पत्रकार दो कौड़ी का हो, और वो तथ्यहीन बातें करता है तो फिर रिएक्ट क्या करना? कम से कम पद के बराबर कद तो होना ही चाहिए वैसे भी बेईमान को ज्यादा डर लगता है, ईमानदार निडर और निश्चिंत रहता है। भाई साहब के कारनामों की पुरी कुंडली, फाइल बनाकर ऊपर पहुंच चुकी है। मैंने नहीं, पार्टी के लोगों ने ही पहुंचायी है। जो होना है, वो तो होगा ही। बस वक्त का इंतजार है...नमस्ते सदा वत्सले...(वरिष्ठ पत्रकार पंकज प्रसून के फेसबुक वॉल से साभार)
विधानसभा की 33 सीटों पर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस, प्रदेश प्रभारी ने दिये ये निर्देशटीम एबीएन, रांची। झारखंड में इस साल नवंबर या दिसंबर में विधानसभा का चुनाव होना है, जिसके चलते कांग्रेस विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गयी है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस विधानसभा की 33 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने पार्टी के पदाधिकारियों को इसके निर्देश दिये हैं। मीर ने कहा कि लोकसभा चुनाव में आये परिणामों की समीक्षा के लिए लोकसभावार कमेटी बनायी जा रही है। यह कमेटी 15 दिनों में लोकसभा वार रिपोर्ट देगी। इसमें जिन सीटों पर जीत नहीं मिल सकी उसके कारण तलाशेंगी। किस विधानसभा या किस बूथ पर कितने वोट कम मिले उसे भी देखा जायेगा। गुलाम अहमद मीर ने कहा कि कांग्रेस झारखंड विधानसभा सीटों पर जहां चुनाव लड़ी थी, उन बुनियादी सीटों पर तैयारी शुरू कर रही है। पार्टी यहां देखेगी कि हम कहां मजबूत हैं और कहां कमजोर हैं। कमियों को दूर किया जायेगा और सशक्त बनाया जायेगा। गौरतलब है कि 2019 में कांग्रेस ने 31 सीटों पर चुनाव लड़ा था।
रांची के सांसद सह केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ का सम्मान समारोह 16 जून को महाराजा अग्रसेन भवन मेंटीम एबीएन, रांची। नयी दिशा के तत्वाधान में 16 जून दिन रविवार को अपराह्न समय- 12:15 बजे से 1:15 तक महाराजा अग्रसेन भवन रांची में सम्मान समारोह कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम संयोजक मुकेश काबरा ने बताया कि रांची के लोकप्रिय सांसद संजय सेठ को भारत सरकार मे रक्षा मंत्रालय में रक्षा राज्य मंत्री का महत्वपूर्ण पद मिला है। रक्षा राज्य मंत्री बनने के बाद पहली बार सांसद संजय सेठ का आगमन रांची हो रहा है। जिनके सम्मान में नयी दिशा की ओर से महाराजा अग्रसेन भवन में सम्मान समारोह रखा गया है। जिसमें रांची के सभी सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं को आमंत्रित किया गया है। सभी के सहमति से एक ही जगह इस सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें सभी संस्थाओं के प्रतिनिधि अपने प्रिय सांसद संजय सेठ का अभिनंदन एवं स्वागत कर सके। उन्होंने कहा कि रांची के सांसद को रक्षा राज्य मंत्री का विशिष्ट स्थान मिलना पूरे झारखंड के लिए गौरव की बात है। तथा देश के लिए कार्य करने का उन्हें बहुत बड़ा मौका मिला है। उन्होंने सर्व समाज के सभी प्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि सांसद के सम्मान समारोह कार्यक्रम मे समय पर अवश्य पधारे। उक्त जानकारी नयी दिशा के कार्यक्रम प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, सोनाहातु। सोनाहातु प्रखंड अंतर्गत बांकू ग्राम निवासी समाजसेवी रविन्द्र नाथ महतो का कल हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे और पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। श्री महतो पत्नी भवेश्वरी देवी समेत दो पुत्र और चार पुत्रियों का भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं। उल्लेखनीय है कि श्री महतो पंचायत सेवक के पद से सेवानिवृत होने के बाद रांची के तत्कालीन सांसद रामटहल चौधरी के साथ जुड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और जीवन पर्यन्त समाजसेवा करते रहे। श्री महतो के निधन पर ज्योति प्रसाद कोईरी, चौधरी महतो, डा राजाराम महतो, ब्रजेंद्र नाथ महतो, मृत्युंजय प्रसाद आदि ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
झारखंड नगर निकाय चुनाव में होगा और विलंब, जानें क्या है वजहटीम एबीएन, रांची। झारखंड में ट्रिपल टेस्ट कराकर निकाय चुनाव कराने का मामला एक बार फिर लटक सकता है। झारखंड राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा मध्य प्रदेश की तर्ज पर पिछड़े वर्ग के लिए वार्ड आरक्षित करने की अनुशंसा की गयी थी। इसका फॉर्मेट नगर विकास विभाग को नौ मई को ही भेजा गया था। वहीं दूसरी ओर विभाग ने अब कहा है कि ट्रिपल टेस्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह थ्री लेयर सर्वे कराने की बात कही थी, उसी तर्ज पर किया जाना उचित होगा। ताकि बाद में कोर्ट में कोई इसे चुनौती नहीं दे सके। पिछले दिनों ट्रिपल टेस्ट के अध्ययन के लिए झारखंड राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की चार सदस्यीय टीम मध्य प्रदेश गयी थी। वहां मतदाता सूची में ओबीसी की संख्या जांची गयी और उसके आधार पर वार्डों को ओबीसी के लिए आरक्षित कर दिया गया था। इसे नगर विकास विभाग ने नकार दिया है। विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत थ्री लेयर टेस्ट कराने का सुझाव दिया है।इसके तहत पिछड़े वर्ग की संख्या का परीक्षण और उसका सत्यापन किया जाना है। इसमें यह भी ध्यान रखना है कि एसटी, एससी और ओबीसी मिलाकर किसी भी हाल में 50% से अधिक सीट आरक्षित नहीं हो। इसमें पिछड़ेपन की प्रकृति भी तय करते हुए अन्य जातियों के अनुपात में सीटों को आरक्षित किया जाना है। आयोग के सूत्रों ने बताया कि राज्य में पिछड़ों की वास्तविक संख्या जानने के लिए जातीय जनगणना ही सही माध्यम है। इससे स्पष्ट होगा कि किस क्षेत्र में पिछड़े अधिक हैं और अन्य जातियों की संख्या का अनुपात क्या है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने अब चार सदस्यीय टीम को बिहार भेजने का फैसला किया है। वहां निकाय चुनावों में किस तरह ट्रिपल टेस्ट कराकर सीट आरक्षित किये गये थे। इसकी रिपोर्ट तैयार की जायेगी। इसके बाद सरकार को अनुशंसा भेजी जायेगी। बताया गया कि 19 जून को चार सदस्यीय टीम बिहार जायेगी। बिहार से रिपोर्ट आने के बाद ही अब आगे की कार्रवाई हो सकेगी। जनवरी में हाइकोर्ट के तीन हफ्ते में चुनाव कराने का आदेश भी फेल निकाय चुनाव कराने के मामले की सुनवाई झारखंड हाइकोर्ट में चल रही है। जनवरी में ही हाइकोर्ट ने तीन हफ्ते में चुनाव कराने का आदेश दिया था। पर सरकार ने हलफनामा दायर कर कहा था कि ट्रिपल टेस्ट के बाद ही यह संभव हो सकेगा। फिलहाल मामला लंबित है।
टीम एबीएन, रांची। शिक्षा ही सामाजिक उन्नति का आधार है। राज्य के सभी वर्गों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। बच्चों में शिक्षा का अलख जगाना हमारी सरकार की जिम्मेदारी है। आने वाले समय में सभी प्रखंड में सीएम स्कूल आॅफ एक्सीलेंस स्थापित किये जायेंगे। सभी सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस में रेगुलर टीचर की नियुक्ति करें। राज्य में संचालित सभी सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई सुनिश्चित करें। सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस विद्यालयों में 100% रिजल्ट हो, इस हेतु सभी आवश्यक प्रयास किया जाये। शिक्षा में किसी भी प्रकार से कोताही नही बरतें अधिकारी। सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस राज्य सरकार का एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। विद्यार्थियों की उपस्थिति शत प्रतिशत दर्ज हो यह सुनिश्चित करें अधिकारी। 10वीं और 12वीं वर्ग की परीक्षाओं में विद्यार्थियों का प्रदर्शन बेहतर हो, इस पर करें काम। जिलों के उपायुक्त सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस में मिल रही सभी सुविधाओं का निरंतर मोनिटरिंग करें। राज्य के भीतर वर्तमान में संचालित 80 सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस को बेहतर निजी विद्यालयों के अनुरूप अपग्रेड करें।
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