अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा के दिन मुंबई में मोदी राज में हार्दिक पत्रिका का विमोचनएबीएन सेंट्रल डेस्क (मुंबई)। देश आजादी का 75वां अनमोल महोत्सव मना रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कई ऐसे कार्य किये हैं। जिनकी चर्चा विश्व स्तर पर है। हार्दिक हुंडिया ने कहा कि स्टार रिपोर्ट द्वारा खास विशेषांक मोदी राज में हार्दिक का विमोचन अयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन किया गया। नरेंद्र मोदी के 75 कार्यों को हमने व्यंग चित्र (कार्टून) द्वारा देश की जनता के सामने मैगजीन द्वारा लाया हैं। विद्या की देवी मां सरस्वती को रविवार को मोदी राज में हार्दिक समर्पित किया। दूसरी प्रति जोगेश्वरी नेशनल हाईवे पर भगवान राम के मंदिर जाकर भगवान राम के चरणों में विमोचन किया। भगवान राम की अलौकिक मूर्ति को प्रतिदिन गुलाब चढ़ा कर भगवान को तिरंगा खेस भी पहनाया। हार्दिक हुंडिया ने कहा मेरे लिए ये अनमोल पल था। मोदी राज में हार्दिक की तीसरी प्रति देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित किया। हार्दिक हुंडिया ने कहा कि 75 व्यंग चित्र जो व्यंग चित्रकार राज पाटिल ने तैयार किये हैं। विश्व को सकारात्मक संदेश देने वाले ये अनमोल व्यंग चित्र एक से बढ़कर एक हैं। इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से भारत सरकार के मंत्री अनुराग ठाकुर, कपिल पाटिल, महाराष्ट्र भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावन कुले, स्मिता सालस्कर, तारक मेहता का उल्टा चश्मा के निमार्ता आसित मोदी, हीरा बाजार के मैन आफ द मिलेनियम भरत शाह, फिल्म और भवन निमार्ता आनंद पंडित, युवा उद्योग पति मौलिक शाह, आशीष कोठारी, वरिष्ठ सरकारी अधिकार समीर वानखेड़े, वरिष्ठ धाराशास्त्री पंकज बाफना, फिल्म अभिनेता मुकेश ऋषि, वरिष्ठ पत्रकार प्रेम शुक्ला, बाला कृष्णन, ब्राइट वाले योगेश लखानी, समाज सेवी राकेश कोठारी सहित अन्य मौजूद रहे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उच्चतम न्यायालय को भारत के जीवंत लोकतंत्र को निरंतर सशक्त बनाने और संविधान निर्माताओं के सपनों को साकार करने का लगातार प्रयास करने वाला बताते हुए रविवार को कहा कि केंद्र सरकार समाज के हर तबके तक सुलभ तरीके से न्याय पहुंचाने के लक्ष्य के तहत शीर्ष अदालत के साथ-साथ अन्य न्यायालयों में ढांचागत आधुनिक सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में हर संभव मदद करेगी।श्री मोदी ने उच्चतम न्यायालय के हीरक जयंती के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के संविधान निर्माताओं ने स्वतंत्रता, समानता और न्याय के सिद्धांतों वाले स्वतंत्र भारत का स्वप्न देखा था। भारत के उच्चतम न्यायालय ने इन सिद्धांतों के संरक्षण का निरंतर प्रयास किया है।श्री मोदी ने कहा- अभिव्यक्ति की आजादी हो, व्यक्तिगत स्वतंत्रता हो, सामाजिक न्याय, सर्वोच्च न्यायालय ने भारत की जीवंत लोकतंत्र को निरंतर सशक्त किया।प्रधानमंत्री ने सशक्त न्याय व्यवस्था को विकसित भारत का आधार बताते हुए कहा कि न्यायालयों में आधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ-साथ अन्य ढांचागत आधुनिक सुविधाएं बढ़ाना उनकी सरकार की प्राथमिकता रही है। इसी दिशा में पिछले कुछ वर्षों में 7000 करोड़ से अधिक की राशि दी गयी। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह 800 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी मंत्रिमंडल ने दी।इस राशि से उच्चतम न्यायालय की सुविधाओं के विस्तार करने में खासी मदद मिलेगी।प्रधानमंत्री ने कहा कि इज ऑफ जस्टिस को ध्यान में रखते हुए ई-कोर्ट के लिए उपलब्ध धनराशि लगातार बढ़ायी जा रही है। पिछली स्वीकृत परियोजना के मुकाबले चार गुना राशि बढ़ाई गयी है।श्री मोदी ने न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने के प्रयासों का जिक्र करते हुए अदालतों में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल बढ़ने पर खुशी व्यक्त की और डिजिटल सुविधाएं, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जिक्र करते हुए कहा कि इससे आम लोगों तक न्याय की पहुंच आसान होगी। उन्होंने प्रौद्योगिकी की मदद से कानूनी कार्यवाहियों को आसान भाषा में लिखने और लोगों तक पहुंचने को सुखद बताया।उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय के अलावा के अन्य अदालत में भी जल्दी ही लोगों को प्रौद्योगिकी का लाभ मिलना शुरू हो जायेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि कार्यपालिका, न्यायपालिका समेत देश की सभी संस्थाएं अगले 25 वर्षों में बदलाव के लक्ष्य के साथ काम कर रही है।उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की आज की आर्थिक नीतियां कल के उज्जवल भविष्य की नींव साबित होंगी। पूरी दुनिया की नजर भारत पर है और उसका भरोसा बढ़ रहा है। हमें इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए।
तैयारी लोकसभा चुनाव की भाजपा ने नियुक्त किये 23 चुनाव प्रभारी, बैजयंत पांडा को मिली यूपी की जिम्मेदारी एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर शनिवार को 23 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए चुनाव प्रभारी नियुक्त किये। पार्टी के एक बयान के अनुसार, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को बिहार का चुनाव प्रभारी बनाया गया है, जबकि भाजपा के राज्यसभा सदस्य और झारखंड इकाई के पूर्व अध्यक्ष दीपक प्रकाश सह-प्रभारी होंगे। तावड़े बिहार में भाजपा के राजनीतिक मामलों के प्रभारी हैं।बैजयंत पांडा को मिली यूपी की कमान भाजपा ने उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा को उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम को उत्तराखंड का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। बयान में कहा गया है कि भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेयी झारखंड के चुनाव प्रभारी होंगे। इसमें कहा गया है कि आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने नियुक्तियां की हैं। भाजपा के राज्यसभा सदस्य और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को हरियाणा का चुनाव प्रभारी बनाया गया है, जबकि भाजपा नेता सुरेंद्र नागर सह प्रभारी होंगे। बिहार के पूर्व मंत्री और पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी मंगल पांडे को राज्य का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है। भाजपा नेता अमित मालवीय और आशा लाकड़ा सह प्रभारी होंगे। महेंद्र सिंह को मिली मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी जेपी नड्डा ने उत्तर प्रदेश के विधान परिषद सदस्य और राज्य के पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह को मध्य प्रदेश के लिए भाजपा का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है, जबकि सतीश उपाध्याय सह प्रभारी नियुक्त किये गये हैं। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब के भाजपा प्रभारी विजय रूपाणी को राज्य का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है।जबकि भाजपा के राष्ट्रीय सचिव नरिंदर सिंह को राज्य में चुनाव के लिए सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। रूपणी को चंडीगढ़ का भी चुनाव प्रभारी बनाया गया है। भाजपा ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री श्रीकांत शर्मा को हिमाचल प्रदेश का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है, जबकि संजय टंडन सह प्रभारी होंगे। राधा मोहन को कर्नाटक की मिली जिम्मेदारी भाजपा ने राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय महासचिव राधा मोहन दास अग्रवाल को कर्नाटक का चुनाव प्रभारी और सुधाकर रेड्डी को सह प्रभारी बनाया है। जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक मामलों के लिए भाजपा के सह-प्रभारी आशीष सूद को गोवा का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है।गुजरात के विधायक पूर्णेश मोदी को दमन और दीव का चुनाव प्रभारी और दुष्यंत पटेल को सह प्रभारी बनाया गया है। पार्टी नेता अशोक सिंघल को अरुणाचल प्रदेश का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और अंडमान एवं निकोबार में राजनीतिक मामलों के प्रभारी वाई सत्य कुमार को केंद्र शासित प्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाया गया है। प्रकाश जावड़ेकर केरल के बने चुनाव प्रभारीभाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, जो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में राजनीतिक मामलों के लिए पार्टी के प्रभारी हैं, को दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के लिए चुनाव प्रभारी नामित किया गया है। उत्तर प्रदेश से पार्टी के राज्यसभा सदस्य विजयपाल सिंह तोमर को ओडिशा का चुनाव प्रभारी बनाया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ की विधायक लता उसेंडी सह-प्रभारी होंगी। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को केरल का चुनाव प्रभारी बनाया गया है, जबकि भाजपा के राष्ट्रीय सचिव अरविंद मेनन को तमिलनाडु का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है। पुडुचेरी में राजनीतिक मामलों के लिए भाजपा की प्रभारी निर्मला कुमार सुराणा को चुनाव प्रभारी भी बनाया गया है। बिहार के भाजपा नेता और विधान परिषद सदस्य दिलीप जायसवाल को सिक्किम का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है।
मध्य प्रदेश सरकार का नेक इरादा, राज्य को 2030 तक बाल विवाह मुक्त बनाने का वादाएबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर मध्य प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग ने बाल विवाह मुक्त भारत के साथ एक दिवसीय कार्यशाला में बाल विवाह की रोकथाम और मध्य प्रदेश से 2030 तक बाल विवाह के खात्मे के उपायों पर गहन मंथन किया। बाल विवाह मुक्त भारत को इसमें अपने गठबंधन सहयोगी बचपन बचाओ आंदोलन का सहयोग मिला। बाल विवाह मुक्त भारत 160 से भी ज्यादा गैरसरकारी संगठनों का गठबंधन है जो 2030 तक देश से बाल विवाह के खात्मे के लिए बाल विवाह की ज्यादा दर वाले देश के 300 जिलों में जमीनी स्तर पर अभियान चला रहे हैं। इस कार्यशाला में मध्य प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि बाल विवाह मुक्त मध्य प्रदेश बनाने के लिए गैरसरकारी संगठनों के साथ सहयोग के साथ जनसहभागिता बढ़ाना जरूरी है ताकि बाल विवाह के मामलों का समय रहते पता लगाया जा सके और इसे रोका जा सके। इस कार्यशाला में भूरिया के अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी, संयुक्त निदेशक प्रज्ञा अवस्थी, संयुक्त निदेशक सुरेश तोमर, संयुक्त निदेशक विशाल नादकर्णी, आयुक्त डा राम राव भोंसले, डीजीपी के प्रमुख स्टाफ अधिकारी डॉ विनीत कपूर के अलावा पुलिस, पंचायती राज एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। बाल विवाह के उन्मूलन के प्रयासों में हरसंभव सहयोग का आश्वासन देते हुए राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा, शिक्षा के मामले में राज्य में स्थिति बेहतर हुई है। हमारे दूरदराज के गांवों की लड़कियां भी अब आगे बढ़ रही हैं और पढ़ाई कर रही हैं। अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम सुनिश्चित करें कि बेहतर जीवन की तलाश में इन लड़कियों को हमारी तरफ से हर तरह की मदद मिले और कोई भी बालिग होने से पहले जोर जबरदस्ती से इन्हें विवाह के बंधन में नहीं बांध सके। राज्य सरकार मध्य प्रदेश को 2030 तक बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सभी हितधारक साथ आये ताकि बाल विवाह मुक्त मध्य प्रदेश का सपना हकीकत बन सके। भूरिया ने जागरूकता के प्रसार पर जोर देते हुए कहा कि एक ऐसे परिवेश के निर्माण के लिए जहां बाल विवाह फल-फूल नहीं सके, ज्ञान एक जरूरी औजार है। बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई में राज्य सरकार ने जिस तरह से अपने प्रयासों को मजबूती दी है, उसकी प्रशंसा करते हुए बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकारी निदेशक धनंजय टिंगल ने कहा, मध्य प्रदेश सरकार ने जिस गंभीरता से इस मुद्दे को लिया है, वह उम्मीद जगाने वाला है। बाल विवाह मुक्त अभियान को समाज के हर वर्गों से मिले अभतपूर्व समर्थन के बाद अगले महत्वपूर्ण कदम के तौर पर इस तरह की कार्यशालाएं और विचार विमर्श बाल विवाह के खात्मे के लिए सभी हितधारकों को साथ लाने और हर राज्य के लिए उसके अनुरूप योजनाएं बनाने के लिए अहम हैं। नीतियों और प्रयासों के संम्मिलन और बहुआयामी रणनीतियों से ही हम 2030 तक बाल विवाह के खात्मे में सफल हो सकते हैं। हमारा उद्देश्य इस तरह के विचार मंथन के माध्यम से सभी हितधारकों को साथ लाना है ताकि हम आपसी तालमेल और साझा प्रयासों से इस अपराध का मुकाबला कर सकें। बचपन बचाओ आंदोलन जिसे एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए) के नाम से भी जाना जाता है, महिला कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में चल रहे राष्ट्रव्यापी बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का गठबंधन सहयोगी है। पूरे देश में सभी राज्य सरकारों और उनके विभिन्न विभागों और तमाम हितधारकों ने पिछले वर्ष 16 अक्टूबर को बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को हरसंभव सहयोग और समर्थन दिया। इस दौरान पूरे देश में लोगों ने बाल विवाह के खिलाफ शपथ ली। मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल कल्याण विभाग, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और मध्य प्रदेश पुलिस ने 16 अक्टूबर के कार्यक्रम में भागीदारी के लिए अधिसूचनाएं जारी की। इस पहल के नतीजे में लाखों लोगों ने 2030 तक बाल विवाह के खात्मे के लिए शपथ ली। यह कार्यशाला भी उसी अभियान का हिस्सा है जिसका उद्देश्य मध्य प्रदेश में सभी हितधारकों को एक मंच पर लाना और राज्य से बाल विवाह के खात्मे के लिए कार्ययोजना तैयार करना है। दिन भर चली इस कार्यशाला में बाल विवाह की रोकथाम में चुनौतियां और समाधान, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत राज्य नियमों में जरूरी संशोधन, बाल विवाह एवं बाल यौन शोषण की रोकथाम, पॉक्सो पर अमल की स्थिति, बाल विवाह के परिप्रेक्ष्य में अदालती निदेर्शों के तहत पॉक्सो के क्रियान्वयन जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके बाल यौन शोषण व बाल विवाहों की रोकथाम के लिए जिला स्तर पर किए गए सफल प्रयोगों पर भी चर्चा की गयी और इसे अन्य जिलों में लागू करने पर विचार किया गया। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (एनएफएचएस 2019-21) के आंकड़े बताते हैं कि देश में 20 से 24 के आयु वर्ग की 23.3 प्रतिशत लड़कियों का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले ही हो गया था जबकि मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा 23.1 प्रतिशत है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कि वैधानिक उम्र से पूर्व किसी भी बच्ची का विवाह नहीं हो पाये, अपने प्रयासों को लगातार धार दे रही है। इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए संजय परमार (8595950825) से भी संपर्क कर सकते हैं।
रामलला के दर्शनप्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली सुबह मंदिर के बाहर भक्तों का हुजूम, तड़के तीन बजे से लगी कतारएबीएन सेंट्रल डेस्क। प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद पहली सुबह श्री राम लला की पूजा करने और दर्शन करने के लिए श्री राम मंदिर के मुख्य द्वार पर भक्त सुबह तीन बजे से ही बड़ी संख्या में जुटने शुरू हो गये। आज से रामलला आम श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। सभी भक्तों के लिए नव्य राम मंदिर के द्वार खुल जायेंगे। गर्भगृह में विराजमान आराध्य के साथ नवीन विग्रह को भी श्रद्धालु निहार सकेंगे। भीड़ बढ़ने पर रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट दर्शन की अवधि को विस्तार देगा। अस्थायी मंदिर में विराजमान रामलला के दर्शन 20 जनवरी की सुबह से बंद कर दिये गये थे। प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियों को फाइनल टच देने के उदेश्य से ट्रस्ट ने यह निर्णय किया था। इस बीच रविवार की रात विराजमान रामलला के विग्रह को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नव्य मंदिर में स्थापित करने के लिए पुजारियों को सौंपा। नवीन विग्रह की स्थापना के बाद मंगलवार से राम मंदिर में दोनों विग्रहों के दर्शन सभी श्रद्धालुओं को सुलभ हो सकेंगे।दर्शन की शुरुआत सुबह सात बजे से होगी। पहली पाली में पूर्वाह्न 11:30 बजे तक दर्शन हो सकेंगे। इसके बाद दूसरी पाली में दोपहर दो बजे से शाम 6:30 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। यदि भक्तों की भीड़ बढ़ी तो दर्शन की अवधि को बढ़ा दिया जायेगा। इस बीच सोमवार को भी आम श्रद्धालु रामलला के दर्शन नहीं कर सके। प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद सिर्फ विशिष्ट अतिथियों को ही दर्शन कराया गया।
22 जनवरी को ढाई बजे के बाद खुलेगा स्टॉक मार्केटप्राण प्रतिष्ठा को लेकर किया गया बड़ा ऐलानएबीएन सेंट्रल डेस्क। अयोध्या में राम मंदिर में भगवान राम की मूर्ति को स्थापित कर दिया गया है। 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जायेगी। इस बीच खबर आ रही है कि 22 जनवरी को स्टॉक मार्केट ढाई बजे के बाद खुलेगा। इससे पहले सरकार की ओर से सभी सरकारी बैंकों और बीमा कंपनियों को ढाई बजे तक बंद रखने का ऐलान किया गया।वहीं, केंद्र सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के कारण 22 जनवरी को देश भर में केंद्र सरकार के सभी कार्यालय आधे दिन के लिए बंद रखने का ऐलान किया। राम मंदिर के गर्भगृह में राम लला की नयी मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा समारोह सोमवार को निर्धारित है। यह समारोह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया जाना तय है।मंत्रालय ने केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों को जारी आदेश में कहा, अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का जश्न 22 जनवरी 2024 को पूरे भारत में मनाया जाएगा। इस उत्सव में कर्मचारी भाग ले सकें, इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि पूरे भारत में केंद्र सरकार के सभी कार्यालय, केंद्रीय संस्थान और केंद्रीय औद्योगिक प्रतिष्ठान 22 जनवरी 2024 को अपराह्न ढाई बजे तक आधे दिन के लिए बंद रहेंगे।केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने ताया कि यह निर्णय लोगों के जबर्दस्त उत्साह को देखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर देशभर में जनता की काफी मांग थी। 22 जनवरी को केंद्र सरकार के कार्यालयों को आधे दिन के लिए बंद करने का निर्णय जनभावनाओं को देखते हुए लिया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कर्नाटक राज्य बाल अधिकार सुरक्षा आयोग (केएससीआरपीसी) द्वारा जनवरी से नवंबर 2023 तक के बीच बाल गर्भावस्था से संबंधित जारी आंकड़ों को गंभीर स्वास्थ्य संकट करार देते हुए गैर सरकारी संगठनों के गठबंधन चाइल्ड मैरेज फ्री इंडिया (सीएमएफआई) ने कहा कि इन आंकड़ों को बाल विवाह के तौर पर देखने की जरूरत है और इसे सिर्फ बच्चों के साथ बलात्कार के रूप में देखा जाना चाहिए। आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक में जनवरी से नवंबर 2023 तक नाबालिग यानी 18 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों के गर्भवती होने के 28,657 मामले सामने आये। इनमें सबसे ज्यादा मामले बंगलुरु, बेलगावी और विजयपुर जिलों से सामने आये।आंकड़ों के अनुसार राज्य में नाबालिग बच्चियों के गर्भवती होने के सबसे ज्यादा 2,815 मामले बंगलुरु में सामने आये जबकि 2,754 मामलों के साथ बेलगावी दूसरे और 2,004 मामलों के साथ विजयनगर तीसरे स्थान पर है।इस बात पर जोर देते हुए कि बाल विवाह के तमाम प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दुष्परिणामों के नतीजो में न सिर्फ बच्चों की एक पूरी पीढ़ी बल्कि इन बच्चों के बच्चे भी खतरे के दलदल में फंस जाते हैं, चाइल्ड मैरेज फ्री इंडिया के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा- बाल विवाह बच्चों से बलात्कार है और कर्नाटक में नाबालिग बच्चियों के गर्भवती होने के मामले इसका सबूत हैं। जब बच्चों के बच्चे होते हैं तो इसका मतलब है कि यह उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ा संकट है।बच्चियों के गर्भवती होने से जुड़े इन आंकड़ों पर चिंता जताते हुए भुवन ऋभु ने कहा कि इन 28,000 बच्चियों के गर्भवती होने को हमें सिर्फ एक गंभीर स्वास्थ्य संकट के तौर पर ही नहीं देखना चाहिए। यह इन 28,000 बच्चियों के साथ बलात्कार है जिसका नतीजा इन बच्चियों के गर्भवती होने के रूप में सामने आया है। हम बाल विवाह के खात्मे के लिए कर्नाटक सरकार से पिकेट रणनीति पर अमल की मांग करते हैं।बाल विवाह के खात्मे के लिए देश के तमाम गैरसरकारी संगठन पिकेट रणनीति पर अमल कर रहे हैं। यह बाल विवाह के उन्मूलन के समग्र रणनीति की वकालत करती है जिसमें नीतियां, संस्थानों में निवेश, सभी हितधारकों में समन्वय व संमिलन, ज्ञान आधारित दृष्टिकोण, तकनीक का उपयोग और एक ऐसी पारिस्थितिकी का निर्माण जिसमें बाल विवाह के फलन फूलने की कोई गुंजाइश नहीं हो, जैसी चीजें शामिल हैं। यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि सभी देशों ने उचित, न्यायसंगत और दीर्घकालिक विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों पर अमल की सहमति जतायी है। इसके तहत सभी देशों ने बाल विवाह और जबरन विवाह पर 2030 तक पूरी तरह रोक लगाने पर सहमति जताई है। लेकिन दुनिया में जब तक बाल विवाह जारी हैं तब तक सतत विकास लक्ष्यों के 17 में से 11 लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकते।चाइल्ड मैरेज फ्री इंडिया बाल विवाह की उच्च दर वाले देश के 300 से ज्यादा जिलों में बाल विवाह के खात्मे के लिए काम कर रहे 160 से भी अधिक गैरसरकारी संगठनों का छतरी संगठन है जिसने 2030 तक देश से बाल विवाह के खात्मे के लिए पिकेट रणनीति के तहत समग्र और समन्वित राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की है।राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (एनएचएफएस 2019-21) के अनुसार देश में 20 से 24 आयुवर्ग की 23.3 फीसदी युवतियों का विवाह उनके 18 वर्ष की होने से पहले ही हो गया था जबकि कर्नाटक में यह आंकड़ा 21.2 प्रतिशत है। हालंकि राज्य के यादगीर (33.2), गुलबर्गा (29.8), गडग (27.7), कोप्पल (27.1) और कोलार (26.7) में बाल विवाह की दर राज्य ही नहीं, राष्ट्रीय औसत से भी खासी ज्यादा है। सर्वे के अनुसार 15 से 19 वर्ष के बीच मां बनने वाली या गर्भवती होने वाली किशोरियों की संख्या 6.8 प्रतिशत थी। यद्यपि देश में बाल विवाह की दर बहुत ज्यादा है लेकिन राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार 2022 में देश में बाल विवाह के सिर्फ 1002 मामले दर्ज किये गये।देश में हर मिनट तीन बच्चों का बचपन बाल विवाह के नर्क में झोंक दिया जाता है जबकि गिनती के मामलों की शिकायत दर्ज हो पाती है। देश को 2030 तक बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए हमें एक समग्र, लक्ष्य केंद्रित, समयबद्ध और टिकाऊ रणनीति की आवश्यकता है।
राहुल रविवार को मणिपुर से शुरू करेंगे भारत जोड़ो न्याय यात्राएबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा रविवार को मणिपुर के विख्यात ऐतिहासिक स्थल खोंगजोम से शुरू होगी।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे थौबल जिले के खोंगजोम युद्ध स्मारक से रैली को हरी झंडी दिखायेंगे। श्री खड़गे, श्री गांधी और कुछ अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री दिन में इंफाल हवाई अड्डे पर उतरेंगे और सीधे कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना होंगे।मणिपुर सरकार ने हप्ता कांगजीबुंग से यात्रा शुरू करने के अनुरोध को अनुमति देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद कांग्रेस को यात्रा स्थल बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा। थौबल जिला प्रशासन ने आदेश दिया है कि यात्रा में भाग लेने वालों की संख्या 3000 तक सीमित रहेगी।सभी नेता यात्रा की शुरुआत से पहले खोंगजोम में युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इस युद्ध स्मारक की स्थापना 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध के नायकों की याद में की गयी है।कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने यात्रा की पूर्व संध्या पर कल यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह यात्रा देश के सामने मौजूद तानाशाही, ध्रुवीकरण तथा आर्थिक असमानता को बढ़ाने तथा लोकतंत्र को एकतंत्र में बदलने की नीतियों के खिलाफ शुरू की जा रही है। न्याय यात्रा पूर्वोत्तर के पांच राज्यों में 11 दिन तक रहेगी और यात्रा में दौरान श्री गांधी हर दिन एक जनसभा को संबोधित करेंगे।श्री रमेश ने कहा कि मोदी सरकार के 10 साल के कार्यकाल के दौरान देश की जनता ने अन्याय सहन किया है और अब अमृत काल के सुनहरे सपने दिखाकर एक दशक के अन्याय को नजर अंदाज करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी अन्याय के खिलाफ देश के लोगों को जोड़ने तथा लोकतंत्र, संविधान और इसकी प्रस्तावना की रक्षा करने के उद्देश्य से श्री गांधी के नेतृत्व में शुरू की जा रही न्याय यात्रा 66 दिन तक चलेगी और इस दौरान 6200 किलोमीटर की यात्रा तय की जायेगी। कांग्रेस नेता ने कहा कि मणिपुर में पूरी तरह अराजकता बनी हुई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी तक राज्य का दौरा नहीं किया है।मणिपुर कांग्रेस के अध्यक्ष के. मेघचंद्र ने कहा कि यात्रा को 10 राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त होगा। यात्रा मार्ग में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी है और रैली को सफल बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं।
डॉ आशीष वशिष्ठएबीएन एडिटोरियल डेस्क। दिल्ली शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को कोर्ट जमानत नहीं दे रहा। मतलब अदालत यह समझती है कि इन दोनों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, अगर इनको जमानत दी गयी तो ये लोग जांच को प्रभावित कर सकते हैं।इन दिनों देश में दो मुख्यमंत्री कानून और जांच एजेंसियों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। इनमें पहले मुख्यमंत्री दिल्ली के अरविंद केजरीवाल और दूसरे झारखंड के हेमन्त सोरेन हैं। दोनों मुख्यमंत्रियों को भ्रष्टाचार से जुड़े अलग-अलग मामलों में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी कई दफा नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुला चुकी है। लेकिन दोनों ईडी के सामने पेश न होने के बहाने बना रहे हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत को ईडी सात बार और केजरीवाल को तीन बार समन भेजी चुकी है। लेकिन दोनों पूरी ढिठाई और बेशर्मी से इस मामले में पॉलिटिकल विक्टिम कार्ड का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। दोनों ईडी की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हैं। और केंद्र की मोदी सरकार पर अपने विरोधियों को दबाने के लिए जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हैं। असल में राजनीतिक आरोपों के आड़ में ये दोनों खुले तौर पर कानून और जांच एजेंसियों का मजाक उड़ा रहे हैं।बीती 3 जनवरी को अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब नीति में कथित घोटाला केस में ईडी ने तीसरा नोटिस देकर बुलाया था। लेकिन केजरीवाल ने ईडी के सामने पेश होने से इंकार कर दिया। उन्होंने ईडी को जवाब भेजकर समन को अवैध करार दिया। जिस शराब घोटाले में केजरीवाल से पूछताछ होनी है, उस मामले में उनके दो बड़े नेता मनीष सिसौदिया और संजय सिंह महीनों से तिहाड़ में बंद हैं। मामला गंभीर है। जांच में केजरीवाल का नाम सामने आने के बाद से यह साफ है कि एजेंसी के पास उनके खिलाफ ठोस सुबूत होंगे। इस मामले में सीबीआई उनसे पूछताछ कर चुकी है। केजरीवाल अक्सर मीडिया और सार्वजनिक मंचों से छाती ठोककर खुद अपने को ईमानदारी का प्रमाण पत्र देते हैं। दस साल पुरानी आम आदमी पार्टी के दिल्ली और पंजाब के लगभग 20 नेता विभिन्न मामलों में जेल की सैर कर चुके हैं। इन दोनों राज्यों में आप की सरकार है।झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से ईडी को जमीन घोटाले और अवैध खनन मामले में पूछताछ करनी है। ईडी उन्हें सात समन भेज चुकी है। लेकिन हेमंत लगातार पूछताछ से भाग रहे हैं। ईडी ने अपने सातवें समन में मुख्यमंत्री से यह पूछा था कि वो स्वयं पूछताछ के लिए जगह तिथि व समय बता दें, ताकि पूछताछ की जा सके। लेकिन मुख्यमंत्री ने जो जवाब भेजा है उसमें जगह तिथि व समय का जिक्र नहीं है।केजरीवाल और सोरेन ही नहीं विपक्ष के जिस नेता के यहां जांच एजेंसियां पहुंचती हैं, वो इसे राजनीति से प्रेरित बताकर राजनीतिक ड्रामा करने लगता है। बीते दिनों झारखंड से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के ठिकानों से इनकम टैक्स की छापेमारी के दौरान 353 करोड़ से ज्यादा की नगदी बारामदगी हुई है। इस मामले पर भी जमकर राजनीति हुई। पश्चिम बंगाल में बीती जुलाई में, टीएमसी नेता एवं राज्य के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी को स्कूल नौकरी घोटाले से जुड़े एक मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था।इस साल की शुरुआत में, टीएमसी सांसद और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी से पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग भर्ती और कोयला तस्करी मामलों के संबंध में पूछताछ की गई थी। राशन वितरण घोटाले में ममता सरकार के राज्य मंत्री मलिक को ईडी ने गिरफ्तार किया था।फरवरी 2019 में सीबीआई की एक टीम कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से शारदा चिट फंड घोटाले में पूछताछ करने आई तो सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र की मोदी सरकार पर सीबीआई का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया और धरने पर बैठ गई थी। शारदा समूह ने पश्चिम बंगाल में कई पोंजी योजनाओं के जरिये कथित तौर पर लाखों लोगों को ठगा। इसमें तृणमूल कांग्रेस नेताओं के नाम सामने आये थे। सीबीआई उसकी जांच कर रही है तो राज्य सरकार ने राजनीतिक कारणों से उसे रोकने का काम किया।बिहार में लालू यादव और उनके परिवार के सदस्य भ्रष्टाचार के मामले में जांच का सामना कर रहा है। भ्रष्टाचार और अपराध में लिप्त पक्ष और विपक्ष के तमाम नेता जांच एजेंसियों के राडार पर हैं। कई नेता जेल की सजा भी काट रहे हैं। सीधी-सी बात है अगर किसी का दामन पाक साफ है तो उसे जांच एजेंसी पूछताछ के लिए क्यों बुलाएगी? अगर कोई बेगुनाह है तो उसे अदालत सजा क्यों देगी? अदालत या जज किसी पार्टी के कार्यकर्ता या नेता नहीं हैं।दिल्ली शराब घोटाले में सिसोदिया और संजय सिंह को कोर्ट जमानत नहीं दे रहा। मतलब अदालत यह समझती है कि इन दोनों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, अगर इनको जमानत दी गई तो ये लोग जांच को प्रभावित कर सकते हैं। यूपी में समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री आजम खां, उनकी पत्नी और बेटा जेल में बंद हैं। लालू प्रसाद यादव चारे घोटाले में सजायाफ्ता हैं। क्या बिना किसी कसूर के अदालत ने उन्हें सजा सुनाई है।भ्रष्टाचार के एक मामले में बीती 22 दिसंबर को यूपी में बसपा सरकार में शिक्षा मंत्री रहे राकेश धर त्रिपाठी को 3 साल कैद की सजा हुई है। बीती 21 दिसंबर को मद्रास हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले में डीएमके नेता और तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री के पोनमुडी को दोषी ठहराते हुए तीन साल की कैद और 50 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। पोनमुडी की पत्नी विशालाक्षी को भी दोषी ठहराया गया है।सवाल यह है कि, क्या इन नेताओं को अदालत से मिली सजा राजनीति से प्रेरित है? वास्तव में, राजनीतिक भ्रष्टाचार पर राजनीतिक दलों के बीच गजब का आपसी तालमेल और सहमति का इतिहास रहा है। सार्वजनिक मंचों से एक दूसरे के खिलाफ चाहे कितना भी कीचड़ उछाला जाए, लेकिन चुनाव बाद भ्रष्टाचार की बात नहीं होती थी। लेकिन 2014 में केंद्र की मोदी सरकार आने के बाद से भ्रष्टाचार खासकर राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ चली आ रही सहमति और तालमेल पर जोरदार प्रहार किया गया। नतीजतन, आज कई भ्रष्ट नेता और प्रभावशाली लोग जेल की रोटियां खा रहे हैं।जब कानून के हाथ तथाकथित प्रभावशाली लोगों और नेताओं की गर्दन तक पहुंचने लगते हैं, तो वो जांच एजेंसियों के दुरुपयोग और राजनीतिक प्रतिशोध का बाजा बजाने लगते हैं। जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग कानून और जांच एजेंसियों से बचने के लिए जब तरह—तरह के हथकंडे अपनाते हैं तो इससे समाज में गलत संदेश जाता है। इससे आम आदमी के मन में कानून और जांच एजेंसियों के प्रति अनादर का भाव उपजता है और कानून का राज स्थापित करने में कठिनाइयां आती हैं।राजनीतिक दल और नेता अपनी गिरेबां में झांकने की बजाय सत्ता पक्ष पर जांच एजेंसियों के दुरूपयोग का आरोप लगाते हैं। एजेंसियां का दुरुपयोग हर दल की सरकार करती है, यह कड़वी हकीकत है। बीते साल यूटयूबर मनीष कश्यप को वीडियो बनाने के लिए राजद्रोह और अन्य गंभीर मामलों में जेल में ठूंसकर बिहार और तमिलनाडु की सरकारों ने किस तरह जांच एजेंसियों और पुलिस का दुरुपयोग किया, उसे पूरे देश ने देखा। 2012 में महाराष्ट्र कांग्रेस की सरकार ने कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के एक कार्टून से नाराज होकर उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल भेजा था। जांच एजेंसियों और पुलिस के दुरुपयोग के तमाम उदाहरण हैं।केजरीवाल और सोरेन का ईडी के सामने पेश न होना उन्हें संदेह के घेरे में खड़ा करता है। अगर वो पाक-साफ हैं तो उन्हें ईडी के समाने अपना पक्ष रखना चाहिए। ये दोनों एजेंसी के सामने पेश होने की बजाय इस बात की तैयारी कर रहे हैं कि गिरफ्तारी के बाद वो अपने परिवार के किसी सदस्य को सीएम की कुर्सी पर कैसे बिठा सकते हैं। फिलवक्त केजरीवाल और सोरेन की राजनीति और बयानबाजी इस ओर इशारा कर रही है कि उन्हें अपने भविष्यफल का ज्ञान है। ईडी को इस मामले में उचित कार्रवाई करके मिसाल स्थापित करनी चाहिए। कानून के राज की स्थापना के लिए भी यह जरूरी है। (लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं।)
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