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संजय जाजू ने संभाला सूचना एवं प्रसारण सचिव का कार्यभार
Published / 2024-02-06 07:33:05
संजय जाजू ने संभाला सूचना एवं प्रसारण सचिव का कार्यभार

सूचना एवं प्रसारण सचिव के रूप में संजय जाजू ने संभाला कार्यभारएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी संजय जाजू ने सोमवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव के रूप में कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने अपूर्व चंद्र की जगह ली है, जिन्हें स्वास्थ्य सचिव नियुक्त किया गया है। तेलंगाना कैडर के 1992 बैच के आईएएस अधिकारी जाजू नवंबर 2022 से राज्य सरकार में सेवा दे रहे थे। जाजू इससे पहले रक्षा उत्पादन विभाग में अतिरिक्त सचिव और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम के निदेशक रह चुके हैं। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएट संजय जाजू के पास फाइनेंस बैकग्राउंड के साथ मैनेजमेंट की डिग्री भी है। जाजू एस्पेन इंस्टीट्यूट  से आईएलआई फेलो भी हैं।संजय जाजू ने शहरी, आदिवासी कल्याण और शिक्षा आदि क्षेत्रों में काम किया है। वह सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग में आंध्र प्रदेश सरकार के सचिव के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।रिपोर्ट्स के अनुसार, आठ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और भ्रष्टाचार विरोधी संस्था लोकपाल में नियुक्त किया गया है।

हम विकास की नीति पर काम करते हैं : पीएम मोदी
Published / 2024-02-04 15:47:10
हम विकास की नीति पर काम करते हैं : पीएम मोदी

पीएम मोदी ने असम में 11,600 करोड़ की परियोजनाओं की रखी नींवएबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम दौरे के दूसरे दिन रविवार को गुवाहाटी के खानापारा वेटनरी फील्ड में पहुंचे। यहां पीएम ने 11,600 करोड़ रुपए के परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इसके बाद पीएम ने यहां विशाल जनसभा को संबोधित किया। पीएम ने जनता से कहा कि जिन परियोजनाओं की आज उन्होंने नींव रखी है, उनसे आने वाले समय में काफी रोजगार बढ़ेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास और विरासत हमारी सरकार की नीति है। असम में डबल इंजन की सरकार सिर्फ विकास की नीति पर काम करती है।इससे पहले पीएम मोदी के यहां पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत हुआ। बड़ी संख्या में पहुंची भीड़ ने उनका जोरदार स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने भी सभी का हाथ हिलाकर उनका धन्यवाद किया। लोग उनकी एक झलक देखने के लिए ललायित दिखे।मोदी-मोदी के नारे से गूंज उठा खानापारा का वेटनरी फील्डगौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल शाम को असम के दो दिवसीय यात्रा पर गुवाहाटी पहुंचे थे, जहां पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूर्वोत्तर का सबसे हितैषी प्रधानमंत्री माना जाता है। वे मां कामाख्या कॉरडोर का भी शिलान्यास करेंगे।प्रधानमंत्री ने इन परियोजनाओं का उद्घाटन कियाअसम में बुनियादी ढांचे के विकास की उर्ध्वगामी यात्र के तहत 11,600 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।1,451 करोड़ की लागत से बने विश्वनाथ चारिआली से गोहपुर तक चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग का उद्गाटन किया। यह भारत सरकार के राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड द्वारा निर्मित यह राष्ट्रीय राजमार्ग तेजपुर से ईटानगर तक एक वैकल्पिक सड़क सुविधा प्रदान करके यातायत व्यवस्था में सुधार करेगा।592 करोड़ की लागत से बने डोलाबारी से जामुगुरी तक चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग का उद्घाटन किया। यह भारत सरकार के राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड द्वारा निर्मित यह राष्ट्रीय राजमार्ग तेजपुर शहर में भीड़भाड़ की समस्या समाधान करने के साथ ही असम के उत्तरी तट पर राजमार्गों की गुणवत्ता में सुधार करेगा।इन प्रोजेक्ट का शिलान्यास कियामां कामाख्या प्रवेश कॉरिडोर (पीएम दिव्यलोक परियोजना) के तहत 498 करोड़ का शिलान्यांस किया। यह तीर्थयात्रियों के लिए आवाजाही हेतु बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना तथा विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करना।गुवाहाटी चिकित्सा महाविद्यालय और अस्पताल का अवसंरचना विकास अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे सहित बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करना। इस पर 3,250 करोड़ की लागत से बनेगा।832 करोड़ की लागत से नेहरू स्टेडियम का विकास खेल प्रेमियों के लिए विश्व स्तरीय फीफा मानदंड फुटबॉल स्टेडियम उपलब्ध कराना।578 करोड़ की लागत से करीमगंज चिकित्सा महाविद्यालय इस क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना।300 करोड़ की लागत से चंद्रपुर स्टेडियम ती खेल प्रतिभाओं के लिए एस्ट्रो टर्फ फुटबॉल स्टेडियम सहित अंतरराष्ट्रीय मानक सुविधाएं प्रदान करना।358 करोड़ की लागत से लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, गुवाहाटी को जोड़ने वाली सड़क का चौड़ीकरण सड़कों का परिसर बढ़ाकर यातायात की भीड़ को कम करना।3,444 करोड़ की लागत से 38 पुलों सहित 43 सड़कों का उन्नयन। यह असम के सड़क नेटवर्क में क्रांतिकारी बदलाव लायेगा ताकि कोई भी गांव संपर्क से वंचित न रहे।297 करोड़ की लागत से यूनिटी मॉल का शिलान्या। यह देश के सभी राज्यों और असम के सभी जिलों के अनोखे संसाधनों के प्रदर्शन के लिए एक मंच प्रदान करेगा।

मेटा ने भारत में फेसबुक, इंस्टाग्राम से 26 मिलियन से अधिक खराब कंटेंट को हटाया
Published / 2024-02-03 22:20:00
मेटा ने भारत में फेसबुक, इंस्टाग्राम से 26 मिलियन से अधिक खराब कंटेंट को हटाया

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मेटा ने दिसंबर 2023 में भारत में फेसबुक की 13 नीतियों में 19.8 मिलियन से अधिक कंटेंट और इंस्टाग्राम के लिए 12 नीतियों में 6.2 मिलियन से अधिक कंटेंट को हटा दिया। मेटा ने कहा कि फेसबुक को 1-31 दिसंबर के बीच भारतीय शिकायत तंत्र के माध्यम से 44,332 रिपोर्टें प्राप्त हुईं। इसने 33,072 मामलों में यूजर्स को उनके मुद्दों को हल करने के लिए टूल्स प्रदान किये। मेटा ने अपनी मासिक रिपोर्ट में आईटी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के अनुपालन में कहा- इनमें विशिष्ट उल्लंघनों के लिए सामग्री की रिपोर्ट करने के लिए पूर्व-स्थापित चैनल, सेल्फ-रेमेडिएशन प्रवाह जहां वे अपना डेटा डाउनलोड कर सकते हैं, अकाउंट हैक किये गये मुद्दों को संबोधित करने के तरीके आदि शामिल हैं। मेटा ने कहा, अन्य 11,260 रिपोर्टों में से जहां विशेष समीक्षा की जरूरत थी, हमने अपनी नीतियों के अनुसार सामग्री की समीक्षा की, और कुल 6,578 रिपोर्टों पर कार्रवाई की। शेष 4,682 रिपोर्टों की समीक्षा की गयी, लेकिन, हो सकता है कि उन पर कार्रवाई न की गई हो। मेटा ने कहा कि इंस्टाग्राम पर कंपनी को भारतीय शिकायत तंत्र के माध्यम से 19,750 रिपोर्टें प्राप्त हुईं। इनमें से, हमने 9,555 मामलों में यूजर्स को उनके मुद्दों को हल करने के लिए टूल्स प्रदान किये। अन्य 10,195 रिपोर्टों में से जहां विशेष समीक्षा की जरूरत थी, मेटा ने सामग्री की समीक्षा की और कुल 6,028 रिपोर्टों पर कार्रवाई की। शेष 4,167 रिपोर्टों की समीक्षा की गयी। लेकिन, हो सकता है कि उन पर कार्रवाई न की गयी हो। नये आईटी नियम 2021 के तहत 5 मिलियन से अधिक यूजर्स वाले बड़े डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को मासिक अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करनी होगी। मेटा ने कहा कि हम सामग्री के उन हिस्सों की संख्या मापते हैं (जैसे पोस्ट, फोटो, वीडियो या कमेंट्स) जिन पर हम अपने मानकों के विरुद्ध जाने पर कार्रवाई करते हैं। कार्रवाई करने में फेसबुक या इंस्टाग्राम से सामग्री का एक हिस्सा हटाना या उन फोटो या वीडियो को कवर करना शामिल हो सकता है जो कुछ दर्शकों को चेतावनी के साथ परेशान कर सकते हैं। नवंबर 2023 में, मेटा ने फेसबुक के लिए 13 नीतियों में 18.3 मिलियन से अधिक सामग्री और इंस्टाग्राम के लिए 12 नीतियों में 4.7 मिलियन से अधिक सामग्री हटा दी।

डीके सुरेश की धमकी पर देश से माफी मांगे कांग्रेस
Published / 2024-02-03 22:13:49
डीके सुरेश की धमकी पर देश से माफी मांगे कांग्रेस

हृदयनारायण दीक्षित एबीएन एडिटोरियल डेस्क। राहुल गांधी इस समय भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर हैं। इसके पहले इस कार्यक्रम का नाम उन्होंने भारत जोड़ो रखा था। लेकिन उनकी पार्टी के ही बेंगलुरु से सांसद और कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री शिव कुमार के भाई डीके सुरेश ने भारत तोड़ने की बात की है। उनका वक्तव्य आहतकारी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि दक्षिण भारतीय राज्यों का धन उत्तर भारतीय राज्यों को दिया जा रहा है। वे ताजा केन्द्रीय बजट पर टिप्पणी कर रहे थे। बजट प्रावधानों की निन्दा, समर्थन और आलोचना सभी दलों का अधिकार है। उनका यह बयान संसद में भी चर्चा का विषय है। उन्होंने धमकी दी है कि यह प्रवृत्ति जारी रही तो अलग देश की मांग उठायी जायेगी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को इस बयान पर कांग्रेस का दृष्टिकोण प्रस्तुत करना चाहिए। वक्तव्य सीधे भारतीय राष्ट्र राज्य पर हमला है। सभी दलों को अपनी विचारधारा और अपनी रणनीति के अनुसार विषय रखने का अधिकार है। लेकिन देश तोड़ने की बात और अलग देश की मांग करने की धमकी का समर्थन कोई भी सामाजिक, राजनैतिक कार्यकर्ता या देश का नागरिक नहीं कर सकता। भारत संप्रभु राष्ट्र राज्य है। राष्ट्र की सम्प्रभुता असीम है, अविभाजित है और अखण्ड है। भारत किसी जन पंचायत या किसी समझौते का परिणाम नहीं है। यह स्वयंभू है और सांस्कृतिक दृष्टि से दुनिया का प्राचीनतम राष्ट्र है। भारतीय संस्कृति सनातन प्रवाह है। भारत इसी संस्कृति से निर्मित राष्ट्र है। भारत के सभी राज्य संविधान की कृपा प्रसाद से अस्तित्व में है। सब भारतवासी भारत के प्रति निष्ठावान हैं। संविधान में केन्द्र और राज्यों के अधिकार सुस्पष्ट हैं। भारतीय राज्य खूबसूरत संवैधानिक रचना हैं। संविधान की यह व्यवस्था भारतीय जन गण मन ने मुक्त मन से गढ़ी है। सभी संवैधानिक संस्थाओं के अधिकार और कर्तव्य सुपरिभाषित हैं। भारतीय राष्ट्र की मूल इकाई हम भारत के लोग है। भारत जन गण मन के आनंद से प्रतिबद्ध एक अनुराग है। विश्व कल्याण से प्रतिबद्ध एक निष्ठावान प्रीति है। देश के सभी लोगों की सुख, स्वस्ति और समग्र वैभव भारत का ध्येय है। इस ध्येय में विश्व शान्ति और विश्व कल्याण के आधारभूत तथ्य भी संविधान का भाग हैं। इसलिए भारत भारत के लोगों के लिए एक अखंड श्रद्धा है। भारत की रिद्धि, सिद्धि, समृद्धि और उपलब्धि समग्र भारत के लोगों के कर्मतप का परिणाम है। भारत की विश्व प्रतिष्ठा देश के सभी राज्यों और राज्यों के निवासियों के साझे कर्मफल का परिणाम है। उत्तर दक्षिण या पूरब पश्चिम के आधार पर विचार करना व्यर्थ हैं। सुब्रमण्यम भारती विश्व प्रसिद्ध तमिल कवि थे। उन्होंने सम्पूर्ण भारत के गीत गाए हैं। हिन्दी अनुवाद संकलन की पहली कविता का नाम वन्दे मातरम है। भारती कहते हैं- पराधीन जीवन पर लज्जित सारा भारत एक साथ है/हम सब यह संकल्प करेंगे/कभी नहीं परतंत्र रहेंगे/हम वन्दे मातरम् कहेंगे। भारती दक्षिण के थे। पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। भारती के हृदय में वन्दे मातरम् है। भारती की कविताओं में सप्तसिंधु भी है और भूगोल की दृष्टि से यह उत्तर पश्चिम में है। भारती को दक्षिण भारतीय कहा जा सकता है। यह सही भी है। लेकिन भारती के हृदय और बुद्धि में अखिल भारतीय अनुराग है। उनके मन में उत्तर की गंगा बहती हैं और दक्षिण की कावेरी भी। ज्ञान को उत्तर दक्षिण में नहीं विभाजित किया जा सकता। वे दक्षिण के कांचीपुरम में बैठकर काशी के विद्वानों का संवाद सुनना चाहते हैं कि ऐसे यंत्र बनायेंगे/कांचीपुरम में बैठकर/काशी के विद्वतजन का संवाद सुनेंगे। भारती लिखते हैं कि मुख में वेदों का वास/हाथ में तीक्ष्ण असि शोभित मंगलकारी। विश्व प्रसिद्ध दर्शन शास्त्री अद्वैत दर्शन के प्रचारक आचार्य शंकर भी भौगोलिक दृष्टि से केरल के थे। कह सकते हैं दक्षिण के। लेकिन वे भारतीय दर्शन के शीर्ष व्याख्याता हैं। उन्होंने चारधामों की स्थापना की। केवल दक्षिण में नहीं। उत्तर में बद्रीनाथ। दक्षिण में रामेश्वरम। पश्चिम में द्वारिका और पूरब में जगन्नाथ। विशिष्टाद्वैत के प्रवर्तक रामानुजाचार्य भी दक्षिण के थे। रामकथा विश्व की अमूल्य निधि है। इसकी प्रारंभिक घटनाएं उत्तर भारत की हैं। तमिल कवि कम्ब नमस्कारों के योग्य हैं। उन्होंने तमिल में रामकथा लिखी। तमिल में लिखी गयी उनकी रामायण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहती है। देश के किसी भी तत्ववेत्ता और सृजक ने उत्तर दक्षिण की बात नहीं की है। डॉ राधाकृष्णन दक्षिण के थे। दर्शन के पाठ के लिए सभी विद्वान राधाकृष्णन पर निर्भर हैं। देश तोड़ने की धमकी प्रत्येक दृष्टि से अपराध है। इसे विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार नहीं माना जा सकता। संविधान अनुच्छेद (19) में विचार अभिव्यक्ति की आजादी पर अनेक मयार्दाएं अधिरोपित की गई हैं। कांग्रेस स्वयं में देश के स्वाधीनता संग्राम और भारतीय स्वतंत्रता का श्रेय लेती है। स्वाधीनता संग्राम का प्रमुख जीवन मूल्य राष्ट्रीय एकता था। एकता की धारक और प्रचारक कांग्रेस के जिम्मेदार लोग अलग राष्ट्र की मांग उठाने की धमकी दे रहे हैं। इसी तरह की धमकी इसके पहले तमिलनाडु में सत्तासीन पार्टी द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम ने भी दी थी। तब डीएमके के सांसद ए राजा ने कहा था कि केन्द्र सरकार तमिलनाडु को और अधिकार दे वरना अलग देश के लिए लड़ाई होगी। ऐसी अलगाववादी मांगें असंवैधानिक तो हैं ही राष्ट्रद्रोह की सीमा में भी आती हैं। आश्चर्य है कि सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ सदस्य नेता की खतरनाक टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। राजनैतिक अभियान की भाषा मर्यादित ही होनी चाहिए। वक्तव्यों और भाषणों से लाभ उठाना अलग बात है लेकिन राष्ट्रीय एकता अखण्डता और सम्प्रभुता के प्रश्नों पर कठोर अनुशासन की आवश्यकता है। राजनैतिक अभियानों की आदर्श भाषा से लोकतंत्र की प्रतिष्ठा बढ़ती है। अलग देश की मांग की धमकी किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। दक्षिण भारत के सैकड़ों विद्वानों ने राष्ट्रीय एकता के गीत गाये हैं। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने करोड़ों नौजवानों को प्रेरित किया था। मूलभूत प्रश्न है कि क्या डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को भी उत्तर दक्षिण की सीमा में विवेचन का विषय बनाया जाये? क्या प्रख्यात शिक्षाविद राजगोपालाचारी को भी दक्षिण तक सीमित कर दिया जाए? क्या शंकराचार्य और रामानुज को भी दक्षिण की सीमा में ही गिना जाये? यह आश्चर्यजनक है कि स्वाधीनता के 76 वर्ष बाद भी हमारे राजनेता धौंस धमकी की भाषा बोलते हैं और राष्ट्रीय एकता संप्रभुता को ठेंगे पर रखते हैं। राष्ट्रीय एकता और सम्प्रभुता को लेकर एक दृष्टि कांग्रेस और डीएमके की है और एक दृष्टि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की है। कांग्रेसी दृष्टि में अलग देश की धमकी का अपराध भी राजनीतिक कार्यवाही है। वही मोदी की उपस्थिति में काशी में लगभग डेढ़ हजार तमिल भाषी विशिष्टजनों के समागम का आयोजन किया गया था। प्रधानमंत्री ने अपने सम्बोधन में राष्ट्रीय एकता की बात कही थी। काशी प्राचीन ज्ञान परम्परा का महत्वपूर्ण शक्ति केन्द्र है। कांग्रेस को ध्यान रखना चाहिए कि देश की राष्ट्रीय एकता का मूल तत्व सांस्कृतिक एकता है। समूचे देश के लोग इस धमकी से गुस्से में हैं। कांग्रेस को इस बयान के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। (लेखक, उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हैं।)

देश तोड़ने की मांग करने वाले हैं कौन
Published / 2024-02-03 22:03:50
देश तोड़ने की मांग करने वाले हैं कौन

आरके सिन्हा एबीएन एडिटोरियल डेस्क। निस्संदेह बजट प्रस्तावों की तीखी आलोचना करने में कोई बुराई भी नहीं है। आप देश के सामान्य नागरिक हों या फिर सांसद,आपको केन्द्रीय बजट पर अपनी बेबाक राय रखने का पूरा हक है। पर इस बात को देश का कोई नागरिक कैसे स्वीकार कर सकता है कि कोई इंसान सिर्फ इसलिए ही अलग देश बनाने की मांग करने लगे, क्योंकि उसे बजट प्रस्ताव पसंद नहीं आये। यह पूर्णत: अस्वीकार्य है। कांग्रेस सांसद डीके सुरेश ने यही किया। केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किये गये अंतरिम बजट पर सुरेश ने दक्षिण भारत के लिए अलग देश बनाने की ही मांग कर डाली। धिक्कार है ऐसे सांसद का। अपमान है भारतीय संविधान का, जिसकी शपथ लेकर वे चुने गये और पुन: संसद में वही शपथ लेकर बैठे। उन्होंने कहा है कि अगर विभिन्न करों से एकत्रित धनराशि के वितरण के मामले में दक्षिणी राज्यों के साथ हो रहे अन्याय को ठीक नहीं किया गया तो दक्षिणी राज्य एक अलग राष्ट्र की मांग करने के लिए मजबूर हो जायेंगे। लेकिन, उन्होंने यह बताने से परहेज किया कि अन्याय क्या हो रहा है? केंद्रीय करों से एकत्रित राशि के बंटवारे का एक सर्वसम्मति से तैयार एक नियम होता है जो केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर तय करती हैं और उसी तय नियम के अनुसार करों से प्राप्त धनराशि का बंटवारा होता है। शायद, कांग्रेस के विद्वान सांसद को यह जानकारी नहीं होगी। यह बेहद गंभीर मामला है। भारत को फिर से तोड़ने के बारे में कोई सोचने का भी दुस्साहस भी कैसे कर सकता है। सुरेश बजट प्रस्तावों की जितनी चाहते आलोचना कर सकते थे। उसे सुना जाता। उस पर एक्शन भी लिया जाता यदि उनकी मांगें वाजिब होती। पर वे तो सीमा ही लांघ गये। वे कह रहे हैं कि भारत के दक्षिणी राज्यों से एकत्रित टैक्स की धनराशि को उत्तर भारत में वितरित किया जा रहा है और दक्षिण भारत को उसका उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। कायदे से कांग्रेस आलाकमान को सुरेश के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए थी, पर यह नहीं हुआ। कांग्रेस का इतिहास फूट डालो और राज करो का सदा से ही रहा है। उनके सांसद फिर वही चाल चल रहे हैं। वो उत्तर और दक्षिण को बांटना चाहते हैं। आपको याद होगा कि असम और तमाम पूर्वोत्तर प्रदेशों को देश से तोड़कर अलग करने का आह्वान जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्र शरजील इमाम ने भी किया था। वह तब से जेल में बंद है। देश जान ले कि यहां शरजील इमाम जैसे कई और भी तत्व पाए जाते हैं। ये सब के सब आस्तीन के सांप हैं। देश को तोड़ने की चाहत रखने वालों के खिलाफ पूरे देश को कमर कस कर लामबंद होना होगा और इन आस्तीन के सांपों को पकड़-पकड़ कर पूरी तरह से कुचलना होगा। अखंड भारत की अवधारणा को चरम पर पहुंचाने वाले सम्राट चंद्रगुप्त और अशोक की धरती बिहार की किस्मत में अब कैसे-कैसे गद्दार पलने लगे हैं। शरजील इमाम पटना पास के ही जहानाबाद का ही रहनेवाला है। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और राष्ट्रकवि दिनकर की धरती शरजील इमाम जैसे गद्दारों को कैसे जन्म देने लगी? शरजील इमाम जैसे देश द्रोहियों के कारण महात्मा गांधी की आत्मा भी दुखी अवश्य होगी। करमचंद गांधी को महात्मा गांधी बिहार की धरती चंपारण आंदोलन से ही बनाया था। खैर, देश को कांग्रेस सांसद सुरेश से यह पूछने का हक है कि उन्होंने भारत को बांटने संबंधी बयान क्यों दिया? सुरेश कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के छोटे भाई हैं। वह कर्नाटक की बेंगलुरु ग्रामीण सीट से सांसद हैं। कर्नाटक से वही कांग्रेस के इकलौते सांसद हैं। उनके जैसे गैरजिम्मेदार नेताओं के कारण ही कर्नाटक जैसे प्रगतिशील राज्य में समय-समय पर भारत विरोधी ताकतें सक्रिय होने लगती हैं। आपको याद होगा कि भारत की आईटी राजधानी बेंगलुरु में 2020 में एक छोटी सी बात को लेकर बहुत बड़ी सांप्रदायिक हिंसा की घटना हो गई थी। सबसे अहम बात यह है कि सारी दुनिया में उस हिंसा को लेकर बेहद गलत संदेश गया। बेंगलुरु जैसे आधुनिक महानगर में उपद्रवियों ने जगह-जगह गाड़ियों को आग लगाई थी और एटीएम तक में तोड़फोड़ की थी। दरअसल बेंगलुरु में एक विधायक के एक कथित रिश्तेदार ने पैगंबर मोहम्मद को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ अपमानजनक पोस्ट किया था, जिसकी प्रतिक्रिया में ही सुनियोजित हिंसा हुई थी। बेंगलुरु की उस घटना से साफ हो गया था कि देश में धार्मिक कठमुल्लापन ने बहुत गंभीर रूप ले लिया है। अपने को कट्टर मुसलमान कहने वाले बात-बात पर सड़कों पर उतरने को तैयार रहते हैं। ये अपने मजहब के नाम पर कट्टरता फैला रहे हैं। इससे जाहिलपन बढ़ता जा रहा है। बेंगलुरु में कठमुल्लों ने ईश निंदा के नाम पर गरीब बस्तियों में मुसलमानों को उकसाया-भड़काया। नतीजा यह हुआ कि उन्मादी भीड़ ने जमकर तोड़फोड़ की। घंटों यह हिंसक उन्माद चला। कर्नाटक में हिंदी का भी सियासत के नाम पर अकारण विरोध होने लगा है। वहां पर कुछ समय पहले हिंदी का विरोध करते हुए बेंगलुरु मेट्रो के दो स्टेशनों पर हिंदी में लिखे गए नामों पर कालिख पोती गई थी। यह काम कर्नाटक रक्षणा वेदिके (केआरवी) नामक संगठन ने किया था। केआरवी ने ही बेंगलुरु मेट्रो से उसके सभी स्टेशनों से हिंदी साइन बोर्ड को हटा देने की मांग की थी। संगठन ने हिंदी की घोषणाओं को भी बंद कर देने की मांग रखी थी। अपनी मांग के समर्थन में उसका तर्क था कि केरल और महाराष्ट्र की मेट्रो ट्रेनों में हिंदी भाषा का इस्तेमाल नहीं होता तो बेंगलुरु मेट्रो ऐसा क्यों कर रहा है। उसकी इस मांग का कर्नाटक के कुछ राजनीतिक दल भी समर्थन कर रहे थे। बेंगलुरु मेट्रो केंद्र और कर्नाटक सरकार की संयुक्त परियोजना है। इसके चलते उस पर केंद्र सरकार का त्रिभाषा सूत्र अपने आप लागू हो जाता है। इसके तहत कन्नड़, हिंदी और अंग्रेजी में सूचनाएं लिखने और प्रकाशित करना जरूरी है। कर्नाटक में हिंदी का विरोध तब सही माना जा सकता था यदि वहां कन्नड़ की अनदेखी हो रही होती। कर्नाटक में कन्नड़ भाषा के साथ भेदभाव तो हो नहीं रहा है। दरअसल राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया हिंदी विरोध का प्रत्यक्ष और परोक्ष समर्थन करके कन्नड़-भाषियों की पहचान की लड़ाई को हवा देने का खतरनाक खेल खेलते रहे हैं। अब कांग्रेस के सांसद डीके सुरेश ने भारत को तोड़ने जैसा बेहद गंभीर बयान दिया तो भी सिद्धारमैया चुप हैं। (लेखक, वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार और पूर्व सांसद हैं।)

भारत रत्न मेरे आदर्शों और सिद्धांतों का सम्मान : आडवाणी
Published / 2024-02-03 21:10:32
भारत रत्न मेरे आदर्शों और सिद्धांतों का सम्मान : आडवाणी

भारत रत्न मिलने पर आडवाणी ने राष्ट्रपति और पीएम का जताया आभारएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किए जाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह न केवल उनका, बल्कि उनके आदर्शों और सिद्धांतों का भी सम्मान है। प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को घोषणा की कि आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित किया जायेगा। इस घोषणा के बाद आडवाणी (96) ने कहा कि यह एक व्यक्ति के रूप में न केवल उनका, बल्कि उन आदर्शों और सिद्धांतों का भी सम्मान है, जिनका पालन करने का उन्होंने प्रयास किया।राष्ट्रपति और पीएम को धन्यवाद देता हूं भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) में शामिल होने के बाद से जीवन में मुझे जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे निभाते हुए अपने प्रिय देश की समर्पित और निस्वार्थ सेवा करने में ही मुझे खुशी मिली। उन्होंने कहा- मुझे भारत रत्न देने के लिए राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी को हार्दिक धन्यवाद देता हूं। इससे पहले, मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि हमारे समय के सबसे सम्मानित नेताओं में शामिल आडवाणी का भारत के विकास में महान योगदान है। उन्होंने अपने जीवन में जमीनी स्तर पर काम करने से शुरूआत कर उप प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा की। मेरे लिए एक बहुत ही भावुक क्षण प्रधानमंत्री ने कहा कि आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना मेरे लिए एक बहुत ही भावुक क्षण है। उन्होंने कहा, आडवाणी जी ने अपने सार्वजनिक जीवन में दशकों तक सेवा करते हुए पारदर्शिता और अखंडता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता जतायी और राजनीतिक नैतिकता में एक अनुकरणीय मानक स्थापित किया। उन्होंने राष्ट्र की एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को आगे बढ़ाने की दिशा में अद्वितीय प्रयास किये हैं। मोदी ने कहा कि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना मेरे लिए बहुत भावुक क्षण है। मैं इसे हमेशा अपना सौभाग्य मानूंगा कि मुझे उनके साथ बातचीत करने और उनसे सीखने के अनगिनत अवसर मिले।प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि आडवाणी (96) को यह सम्मान दिया जाएगा। सरकार ने पिछले महीने समाजवादी नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कर्पूरी ठाकुर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की घोषणा की थी।

एयर एंबुलेंस से देहरादून भेजे गये जगदगुरु रामभद्राचार्य
Published / 2024-02-03 12:52:25
एयर एंबुलेंस से देहरादून भेजे गये जगदगुरु रामभद्राचार्य

डॉक्टरों की निगरानी में आईसीयू में भर्तीएबीएन सेंट्रल डेस्क। तुलसी पीठाधीश्वर जगदगुरु रामभद्राचार्य महाराज को शुक्रवार रात आगरा से एयर एंबुलेंस के माध्यम से देहरादून ले जाया गया। उन्हें सीने में सिनर्जी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। पूर्व में भी उनकी इस हॉस्पिटल में उनकी देखभाल होती रही है, इसलिए शिष्यों के जोर देने पर उन्हें यहां से देहरादून शिफ्ट किया गया। पड़ोसी जिले हाथरस में रामकथा कह रहे जगदगुरु रामभद्राचार्य की आज सुबह तबीयत बिगड़ गयी थी, सीने में दर्द की शिकायत पर उनको आगरा के पुष्पांजलि हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों की टीम तुरंत उनके इलाज में जुट गयी। आते ही कुछ देर के लिए उन्हें ऑक्सीजन भी दी गयी, जिसे बाद में हटा लिया गया। कई जांच की गईं जिनमें उनके सीने में संक्रमण का पता चला। डॉक्टरों ने आईसीयू में पूरी तरह अपनी निगरानी में रखा और जांच के बाद उनकी हालत को खतरे से बाहर बताया। मेडिकल ऑफिसर डॉ राकेश शर्मा और डॉ नवनीत शर्मा अपने सहयोगियों के साथ उपचार में जुटे रहे। जगदगुरू के शिष्यों के अनुरोध पर उन्हें देहरादून ले जाने के लिए दिल्ली में एयर एंबुलेंस का इंतजाम किया गया। रात करीब आठ बजे और एंबुलेंस आगरा पहुंची।पुष्पांजलि हॉस्पिटल की प्रबंधक एचआर माधवी सिंह राना ने बताया कि इसके तुरंत बाद करीब सवा आठ बजे उन्हें पुष्पांजलि हॉस्पिटल से एंबुलेंस द्वारा हवाई अड्डे ले जाया गया, जहां से एयर एंबुलेंस उन्हें लेकर देहरादून के लिए रवाना हो गयी।एयर एंबुलेंस में चिकित्सकीय स्टाफ मौजूद था, तथापि एहतियातन पुष्पांजलि हॉस्पिटल के भी दो चिकित्सकों डा गौरव शर्मा और डॉ पुनीत मित्तल को एयर एंबुलेंस में उनके साथ भेजा गया। जगद्गुरु रामभद्राचार्य जितने समय पुष्पांजलि हॉस्पिटल में भर्ती रहे उनके शुभचिंतकों की भीड़ लगी रही।हॉस्पिटल स्टाफ को इस भीड़ को संभालने में कड़ी मेहनत करनी पड़ी। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी को फोन करके उनका हालचाल जाना। बताया गया है कि रामभद्राचार्य महाराज की चार साल पहले बाईपास सर्जरी हो चुकी है। पुष्पांजलि हॉस्पिटल के संचालक वीडी अग्रवाल ने बताया कि हालांकि फिलहाल खतरे की कोई बात नहीं थी, लेकिन उनके शिष्यों का कहना था कि महाराज का पहले भी देहरादून के सिनर्जी हॉस्पिटल में इलाज हो चुका है इसलिए वे उन्हें वहीं ले जाना चाहते हैं। उनके अनुरोध पर ही देहरादून ले जाने का निर्णय लिया गया।

झारखंड के मुद्दे पर आज गरमायेगा संसद
Published / 2024-02-02 13:29:29
झारखंड के मुद्दे पर आज गरमायेगा संसद

संसद की कार्यवाही शुरू, विपक्ष संसद में उठायेगा झारखंड मुद्दा एबीएन सेंट्रल डेस्क। संसद के बजट सत्र का आज तीसरा दिन है। आज भाजपा सांसद कविता पाटीदार राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पेश करेंगी। धन्यवाद प्रस्ताव में राज्यसभा सदस्यों की तरफ से राष्ट्रपति को अभिभाषण के लिए धन्यवाद दिया जायेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 31 जनवरी 2024 को बजट सत्र की शुरुआत में संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए अभिभाषण दिया था, जिसमें उन्होंने सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया था। संसद के बजट सत्र में आज केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव संचार और आईटी तकनीक की संसद की स्थायी समिति की 45वीं रिपोर्ट पर अपनी बात रखेंगे। केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश भी वाणिज्य मामलों की संसद की स्थायी समिति की 182वीं रिपोर्ट में सुझायी गई सिफारिशों की स्थिति की जानकारी देंगे। विपक्षी गठबंधन ने आज संसद में झारखंड मुद्दा उठाने का फैसला किया है। वहीं ईडी की हेमंत सोरेन और दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कार्रवाई पर केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है...हमारे संविधान निर्माताओं ने कानून का शासन तय किया है। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हो गई है। लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा भी शुरू हो गया है। फिलहाल लोकसभा में प्रश्नकाल चल रहा है।

बजट में गरीब, महिला, युवा, अन्नदाता पर सरकार का फोकस
Published / 2024-02-01 12:12:24
बजट में गरीब, महिला, युवा, अन्नदाता पर सरकार का फोकस

बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा- गरीब, महिला, युवा, अन्नदाता पर सरकार का विशेष ध्यानएबीएन सेंट्रल डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश कर रहीं हैं जिसपर पूरे देश की नजर है। आपको बता दें कि नरेंद्र मोदी सरकार का यह अंतरिम बजट है। इसका अर्थ है कि चुनाव तक देश के खर्च का लेखा-जोखा इस बजट में है।अंतरिम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार किसानों और गरीबों के लिए काम कर रही है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने कहा कि गरीब, महिला, युवा, अन्नदाता पर सरकार का विशेष ध्यान है।अंतरिम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने जीडीपी को गवर्नमेंट, डेवलपमेंट और परफॉर्मेंस का नया अर्थ दिया है, समावेशी विकास पर विशेष ध्यान है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने 7 IIT, 16 IIIT, 7 IIM, 15 AIIMS और 390 विश्वविद्यालयों की स्थापना की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति परिवर्तनकारी सुधारों की शुरुआत कर रही है। मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने वाले कदमों से इसे निर्धारित दायरे तक लाने में मदद मिली है।अंतरिम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हम प्रणालीगत असमानताओं को दूर कर रहे हैं। हम परिणामों पर ध्यान केंद्रित करते हैं ताकि सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन लाया जा सके। देश के 1.4 करोड़ युवाओं को कौशन भारत मिशन का लाभ मिला है। पीएम मुद्रा योजना के तहत 30 करोड़ कर्ज महिला उद्यमियों को बांटे गये। पीएम मुद्रा योजना के तहत 22.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया है।

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