क्यों सुप्रीम कोर्ट ने बताया असंवैधानिक? जानिये सबकुछ सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने चुनावी बॉन्ड को जारी करने वाले बैंक एसबीआइ को तत्काल प्रभाव से इसपर रोक लगाने का भी निर्देश दिया। एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी 15 फरवरी को मोदी सरकार की उस योजना को अवैध करार दिया है जिसे वह साल 2018 में लेकर आयी थी? जिसके जरिये राजनीतिक तरफ से बिना किसी के नाम को उजागर किये डोनेशन के नाम पर पैसे ले सकती थीं। इसके साथ ही देश की टॉप कोर्ट ने स्टेट बैंक आॅफ इंडिया (एसबीआइ) को तुरंत प्रभाव से कोई भी नया चुनावी बॉन्ड जारी न करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आज के फैसले में चुनावी बॉन्ड को लेकर रइक को और भी निर्देश दिये हैं और बॉन्ड की वैधानिकता पर कई सवाल उठाये हैं। इस बीच आइये जानते हैं सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा चुनावी बॉन्ड के बारे में और क्या था एसबीआइ के लिए निर्देश? लेकिन, इससे पहले ये जानना जरूरी है कि चुनावी बॉन्ड होता क्या है? केंद्र सरकार इसे क्यों लेकर आयी थी और मोदी सरकार की इसे लाने के पीछे क्या सोच थी? क्या है चुनावी बॉन्ड? साल 2017 के यूनियन बजट में सरकार चुनावी बॉन्ड लेकर आयी थी, उस समय देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली थे। इसके बाद, कई विरोधों के बावजूद सरकार ने इसे 2 जनवरी, 2018 को नोटिफाई कर दिया और राजनीतिक पार्टियों को डोनेशन प्राप्त करने के लिए नकद के बजाय बॉन्ड का आप्शन दे दिया। सरकार का कहना था कि चुनावी बॉन्ड से ज्यादा पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी क्योंकि जो भी रकम राजनीतिक पार्टियों को मिलेगी, वह बैंक खाते से होकर आयेगी और काले धन में कमी आयेगी। इस योजना के तहत यह भी नियम है कि जो भी पैसा राजनीतिक पार्टियों को जा रहा है और जो भी व्यक्ति या संस्था उस रकम को भेज रही है उसकी जानकारी केवल एसबीआइ को रहेगी। इसके अलावा, कोई भी व्यक्ति या पार्टी इसकी जानकारी नहीं प्राप्त कर सकेगी। चुनावी बॉन्ड के जरिये कैसे पार्टियों को मिलता है पैसा? अगर आप किसी राजनीतिक पार्टी को पैसे दान देना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको कुछ चुनिंदा और केवल भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) की ब्रांच जाना पड़ेगा। वहां आप बैंक को पैसा देंगे और जिस पार्टी को पैसा देना होगा उसकी जानकारी देंगे। इसके बाद रइक आपको पैसे लेकर उसकी जगह उतनी ही रकम की एक बॉन्ड जारी कर देगी। अब आप वह बॉन्ड लेकर उस पार्टी के पास जायेंगे और वह बॉन्ड जमा कर देंगे। इसके बाद वह पार्टी उस रकम को 15 दिन के अंदर-अंदर भुना लेगी। अगर यह टाइम लिमिट पार हो जाती है तो वह पैसा पार्टी के खाते में नहीं जायेगा बल्कि पूरी रकम प्रधानमंत्री राहत कोष के खाते में चला जाता है। चुनावी बॉन्ड के जरिये कितनी रकम की जा सकती है डोनेट? वित्त मंत्रालय की आर्थिक मामलों के विभाग की तरफ से जारी नोटिस के मुताबिक, चुनावी बॉन्ड के जरिये कितनी भी रकम डोनेट की जा सकती है, उसे लेकर कोई लिमिट नहीं लगायी गयी है। हालांकि यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इसके आप अपनी पूरी मनमर्जी से पैसे नहीं दान दे सकते। यह रकम कुछ निश्चित गुणक में ही दी जा सकती है, जैसे- एक हजार, दस हजार, एक लाख, दस लाख, एक करोड़, दस करोड़। इसके जरिये किये जाने वाले डोनेशन में बिलकुल भी टैक्स नहीं लगता है, यानी यह बिलकुल टैक्स फ्री होता है। चुनावी बॉन्ड के जरिये अब तक किस पार्टी को मिली कितनी रकम? भारतीय चुनाव आयोग के डेटा के मुताबिक, साल 2022-23 में सबसे ज्यादा डोनेशन पाने वाली पार्टी भाजपा रही। भाजपा को इस दौरान करीब 1294.14 करोड़ रुपये की डोनेशन प्राप्त हुई। वहीं, दूसरे नंबर पर रहने वाली कांग्रेस को करीब 171.02 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा आम आदमी पार्टी को 45.45 करोड़ रुपये मिले। सुप्रीम कोर्ट के 15 फरवरी के फैसले से पहले केंद्र ने 5 फरवरी को लोकसभा में बजट सेशन के दौरान बताया था कि अब तक रइक के जरिये 30 किश्तों में 16,518 करोड़ रुपये के चुनावी बांड बेचे गये हैं। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में, वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा, भारतीय स्टेट बैंक से खरीदे गए चुनावी बांड (फेड- क से फेज-30) का कुल मूल्य करीब 16,518 करोड़ रुपये है। कैसे शुरू हुआ विवाद? साल 2018 में जब ये योजना लागू की गई तो उसके पहले कुछ कानूनी बदलाव भी किए गए, जैसे कंपनी एक्ट, इनकम टैक्स एक्ट, विदेशों से आने वाली रकम के लिए कानून- फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट और रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया एक्ट। योजना के लागू होते ही कई राजनीतिक पार्टियां चुनावी बॉन्ड की पारदर्शिता पर सवाल उठाने लगीं जिसके बाद, कांग्रेस नेता डॉ जया ठाकुर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और एसोसिएशन फॉर डेमोके्रटिक रिफॉर्म्स ने इस योजना को यह तर्क देकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी कि इसके जरिये राजनीतिक पार्टियां अनगिनत पैसा कमा सकती हैं।इसके अलावा, यह योजना सूचना के अधिकार का भी उल्लंघन करती है, जो कि भारतीय संविधान के मुताबिक, मूल अधिकार का हनन है। बता दें कि अऊफ चुनाव से संबंधित कई तरह के आंकड़े समय-समय पर पेश करता रहता है जैसे- किस पार्टी को कितना पैसा मिला आदि। दूसरी ओर, सरकार ने इस योजना को पारदर्शी बताते हुए बचाव किया और कहा कि राजनीतिक डोनेशन में गुमनामी की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अन्य राजनीतिक दलों से बदले की कोई आशंका न हो। मोदी सरकार ने यह भी तर्क दिया गया कि यह योजना सुनिश्चित करती है कि सफेद धन का उपयोग उचित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से राजनीतिक फंडिंग के लिए किया जाये। इसके बाद साल 2023 में 31 अक्टूबर से लेकर 2 नवंबर तक इस मामले की सुनवाई हुई। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की संवैधानिक पीठ ने 2 नवंबर को इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया और 15 फरवरी, 2024 को इसे अवैध करार दे दिया। चुनावी बॉन्ड क्यों असंवैधानिक? आज यानी 15 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि चुनावी बॉन्ड की यह योजना सूचना के अधिकार का उल्लंघन करती है और इससे बदले की भावना पैदा हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना को आर्टिकल 19(1) का उल्लंघन माना। चुनावी बांड योजना काले धन पर अंकुश लगाने वाली एकमात्र योजना नहीं है। इसके अलावा, अन्य विकल्प भी हैं। टॉप कोर्ट ने यह भी कहा कि कॉरपोरेट राजनीतिक फंडिंग की परमिशन देने वाली आॅर्टिकल 182 कंपनी अधिनियम में संशोधन भी असंवैधानिक है। सुप्रीम कोर्ट का एसबीआइ को भी निर्देश सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने चुनावी बांड को जारी करने वाले बैंक यानी एसबीआइ को इसे जारी करने पर तुरंत रोक लगाने का भी निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बैंक से यह भी कहा कि वह चुनावी बांड के जरिये प्राप्त डोनेशन की डिटेल और 6 मार्च, 2024 तक डोनेशन प्राप्त करने वाले राजनीतिक दलों का डिटेल भी दे।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो डोनेशन बॉन्ड के रूप में पार्टियों को सौंपे जा चुके हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें अभी कैश में नहीं बदलवाया है उसे बैंक को वापस कर दिए जाएं और वह पैसा फिर से उन लोगों के खाते में डाल दिया जाये, जिन्होंने रकम दान दी थी। चुनाव आयोग जारी करेगा डिटेल सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 31 मार्च, 2024 तक चुनाव आयोग अपनी आॅफिशियल वेबसाइट पर चुनावी बाॉन्ड की डिटेल जारी करे।
कांग्रेस और वाम दलों ने 16 फरवरी को प्रस्तावित ग्रामीण बंद को दिया समर्थनएबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस की झारखंड इकाई और वाम पार्टियों ने 16 फरवरी को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी ग्रामीण बंद का बुधवार को समर्थन देने का फैसला किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने पार्टी के सभी जिला अध्यक्षों और पदाधिकारियों को शुक्रवार को बंद का समर्थन करने का निर्देश दिया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर हमने झारखंड में बंद का समर्थन करने का फैसला किया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की झारखंड इकाई ने भी लोगों से 16 फरवरी के ग्रामीण बंद को सफल बनाने की अपील की। संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्रीय मजदूर संघों के साथ मिलकर देशव्यापी ग्रामीण बंद और हड़ताल का आह्वान किया है। राजेश ठाकुर ने दावा किया कि देश अराजकता के दौर से गुजर रहा है और किसान अपनी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी के लिए सड़कों पर हैं, जबकि देश के युवा रोजगार और रोजगार के लिए प्रदर्शन करने को मजबूर हैं एवं अग्निवीर योजना से लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस देश के किसानों द्वारा कथित अन्याय के खिलाफ उठाये गये कदमों के साथ खड़ी है।
16 फरवरी 2024 को भारत बंदएबीएन सेंट्रल डेस्क। कल यानी 16 फरवरी 2024 को भारत बंद को लेकर लोगों के जेहन में कई सवाल तैर रहे हैं, क्या स्कूल और बैंक भी बंद रहेंगे। बता दें कि, देशभर के किसान संगठन पिछले 3-4 दिनों से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अपनी मांगों को लेकर डंटे हुए हैं। इसी बीच 16 फरवरी को संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ मिलकर केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांगों को रखने के लिए 16 फरवरी को ग्रामीण भारत बंद (देशव्यापी हड़ताल) का आह्वान किया है। यह देशव्यापी हड़ताल 16 फरवरी को सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगी। भारत बंद के अलावा, आंदोलनकारी किसान दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक मुख्य सड़कों पर बड़े पैमाने पर चक्का जाम में भी शामिल होंगे। ऐसे में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लोगों को यातायात संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि 16 फरवरी को स्कूल और बैंक बंद रहेंगे या नहीं? लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक अभी राज्यों ने स्कूलों को बंद करने की घोषणा नहीं की है। वहीं, सीबीएसई, आईसीएसई और अन्य बोर्डों ने अपनी वार्षिक परीक्षाएं भी शुरू कर दी हैं। ऐसे में बोर्ड एग्जाम के बीच स्कूलों को बंद करने की घोषणा कम है। अगर छात्रों को स्कूल बंद से जुड़ी सूचना में किसी प्रकार का भ्रम है, तो वे स्कूलों से संपर्क कर सकते हैं। फिलहाल, सीबीएसई बोर्ड की 10वीं-12वीं की परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। स्टूडेंट्स समय पर एग्जाम सेंटर पहुंच सकें, इसको लेकर बोर्ड ने बीते कल यानी कि 14 फरवरी को ही स्टूडेंट्स और पैरेंट्स के लिए एक नोटिस जारी किया था।
मुस्लिम संगठनों की याचिका खारिज, जानें कोर्ट का फैसलाएबीएन सेंट्रल डेस्क। इस समय बड़ी खबर राजस्थान से आ रही है। मुस्लिम संगठनों को राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने 15 फरवरी से स्कूलों में सूर्य नमस्कार कराने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।इस दौरान कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम फोरम एक रजिस्टर्ड संस्थान नहीं है, ऐसे में वह कोर्ट में याचिका दाखिल नहीं कर सकता है। हाईकोर्ट में याचिका के सवाल पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन सूर्य नमस्कार धार्मिक क्रिया नहीं हैं।उन्होंने कहा कि विश्व के कई देशों ने इसे स्वीकार किया है। इसलिए 21 जून को योग दिवस मनाया जाता है। सूर्य नमस्कार एक तरह का सर्वांग योग हैं। इसमें सभी तरह के योग समाहित हैं।जमियत उलेमा-हिन्द ने प्रस्ताव पास करके मुस्लिम समुदाय से स्कूलों मे सूर्य सप्तमी के उपलक्ष्य में हो रहे सूर्य नमस्कार के आय़ोजन के बहिष्कार की अपील की है। संगठन का कहना है कि इस तरह का आदेश धार्मिक मामलों में खुला हस्तक्षेप और संविधान में दी गयी धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंखन है।
राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा के 7 उम्मीदवारों ने दाखिल किया नामांकनसीएम योगी समेत मौजूद रहे ये दिग्गज नेताएबीएन सेंट्रल डेस्क। राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा के सात उम्मीदवारों ने बुधवार को यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया। इनमें सुधांशु त्रिवेदी, आरपीएन सिंह, अमरपाल मौर्य, तेजवीर सिंह, नवीन जैन, साधना सिंह और संगीता बलवंत बिंद शामिल हैं। नामांकन के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक और भाजपा के उप्र चुनाव प्रभारी बैजयंत पांडा मौजूद थे। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 15 फरवरी है। मतदान 27 फरवरी को होगा और नतीजे उसी दिन घोषित किये जायेंगे।
चुनाव आयोग की टीम ने जिला स्तरीय स्वीप नोडल पदाधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक भारत में चुनाव को लोकतंत्र के महापर्व के तौर पर पूरे देश में मनाया जाता है : संतोष अजमेरा, स्वीप निदेशक, भारत निर्वाचन आयोग विभिन्न जिलों के पदाधिकारियों द्वारा किये जा रहे अच्छे कार्यों का दूसरे जिलों द्वारा अनुसरण हो : के. रवि कुमार, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी। टीम एबीएन, रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में आज पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत जिला स्तरीय स्वीप नोडल पदाधिकारियों के समीक्षा हुयी। इस कार्यक्रम में भारत निर्वाचन आयोग से आये स्वीप के निदेशक श्री संतोष अजमेरा ने सभी जिलों से आये स्वीप के नोडल पदाधिकारियों द्वारा आगामी लोक सभा चुनाव 2024 हेतु किये जा रहे कार्यों एवं तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने जिलों से आये पदाधिकारियों को स्वीप के क्षेत्र में और बेहतर किस प्रकार कार्ययोजना बनाकर लोगों के बीच चुनाव के प्रति जागरूकता फैलाई जाए इसके सुझाव भी दिये। कार्यक्रम में संतोष अजमेरा ने कहा कि झारखण्ड से ही स्वीप का आरंभ हुआ और स्वीप आज पूरे देश में चुनाव के प्रति लोगों को सजग करने का माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत में स्वीप के जरिये निर्वाचन के महत्व का पेंटिंग, सेल्फी, नाटक, गीत आदि के माध्यम से प्रचार हुआ है। चुनाव को लोकतंत्र के महापर्व के तौर पर पूरे देश में मनाया जाता है, इस महा आयोजन में स्वीप चार चांद लगा देता है। उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के कारण अन्य देश भी हमारी चुनाव प्रणाली में मतदाताओं, नेताओं एवं निर्वाचन पदाधिकारियों के कार्यकलापों पर नजर रखते हैं और हमारी प्रणाली का अनुसरण करते हैं। उन्होंने कहा कि हम सब को अधिक से अधिक नागरिकों को एक सुदृढ़ कार्ययोजना बनाकर अपने मताधिकार के इस्तेमाल के लिए उत्प्रेरित करना है। इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कहा कि आज के इस बैठक को केवल समीक्षा बैठक के तौर पर न लें अपितु यहां आए विभिन्न जिलों के पदाधिकारियों द्वारा किये जा रहे अच्छे कार्यों को नोट डाउन करें एवं अपने जिलों में भी उसका अनुप्रयोग करें। इस अवसर पर सभी जिलों से आये पदाधिकारियों द्वारा अपने जिले में चल रहे स्वीप के कार्यों को पीपीटी के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। जिसपर भारत निर्वाचन आयोग के पदाधिकारियों ने उनके द्वारा चलाये जा रहे कार्यों की समीक्षा की एवं उचित दिशा निर्देश भी दिये। बैठक में भारत निर्वाचन आयोग से स्वीप के सचिव संतोष कुमार, मुख्य निर्वाचन कार्यालय से अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी नेहा अरोड़ा, संयुक्त सचिव सुबोध कुमार, अवर सचिव मंत्रिमंडल निर्वाचन देव दास दत्ता, भारत निर्वाचन आयोग से स्वीप के एसओ नवीन कुमार यादव के अतिरिक्त राज्य के सभी जिलों से आये जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी, स्वीप के नोडल पदाधिकारी, सहायक जन संपर्क पदाधिकारी एवं सोशल मीडिया पब्लिसिटी आफिसर उपस्थित रहे।
पैतृक गांव में हुआ अंतिम संस्कारएबीएन न्यूज नेटवर्क, हरिहरगंज, पलामू। पलामू जिले के हरिहरगंज थाना क्षेत्र के अररूआ खुर्द निवासी 45 वर्षीय जितेंद्र विश्वकर्मा की संबलपुर जंक्शन के समीप ट्रेन से गिरकर मौत हो गयी। वह अपने अन्य साथियों के साथ मजदूरी करने के लिए शुक्रवार को विशाखापट्टनम जा रहा था। रविवार को मृतक का शव उसके पैतृक आवास पर पहुंचा। शव परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बाद में बटाने नदी घाट पर मृतक का अंतिम संस्कार किया गया।परिजनों ने बताया कि वह घर का एकमात्र कमाऊ सदस्य था। गरीबी के कारण मजदूरी करने अजय यादव नामक ठेकेदार के बुलावे पर विशाखापट्टनम जा रहा था। स्थानीय लोगों ने पलामू उपायुक्त से मृतक के आश्रितों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
भाजपा ने जारी की राज्यसभा उम्मीदवारों की लिस्टएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा के 14 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। भाजपा ने एक बार फिर प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। इसके साथ ही विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए आरपीएन सिंह को राज्यसभा भेजा जायेगा।भाजपा की ओर से बिहार से 2, छत्तीसगढ़ से 1, हरियाणा से 1, कर्नाटक से 1, उत्तर प्रदेश से 7, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल 1-1 से उम्मीदवारों को उतारा है। बता दें कि राज्यसभा से 8 मंत्रियों समेत 68 सांसद रिटायर हो रहे हैं।
पुस्तक मेले में नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी की किताब सपनों की रोशनी का लोकार्पणएबीएन सेंट्रल डेस्क (नई दिल्ली)। प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में रविवार को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी की प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तक सपनों की रोशनी का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर प्रख्यात गीतकार एवं कवि आलोक श्रीवास्तव ने भी चर्चा में हिस्सा लिया। सपनों की रोशनी नोबेल विजेता द्वारा 50 साल पहले 17 वर्ष की उम्र में लिखी गई डायरी पर आधारित है जिसे अब उन्होंने किताब की शक्ल में पिरोया है। इस किताब के नौ अध्यायों में सफलता के नौ सूत्र हैं।सत्यार्थी ने इस अवसर पर कहा, यह किताब 17 साल से लेकर 70 साल की उम्र तक सपनों की खेती के अनुभवों और सीखों पर आधारित है। इसका मतलब यह हुआ कि यह हर उम्र के पाठकों के काम आ सकती है। यह उनके लिए तो है ही, जो सपने देख सकते हैं, उन लोगों के लिए भी हैं जिन्हें सपना देखने का मौक़ा तक नहीं मिला। उनके लिए भी, जो सपने पूरे हो जाने पर घमंड में चूर होकर ख़ुद का नुक़सान कर लेते है, और जो उनके टूट जाने पर निराशा के अंधेरे में डूब जाते हैं। सभी को पीछे छोड़ तेज़ी से भाग कर सफलता की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचकर बिलकुल अकेले पड़ गए लोग भी शायद इसमें लिखी बातों का फ़ायदा उठा सकते हैं। और वे भी जो मैदान में उतरने से घबराते हैं।उन्होंने कहा, इस किताब में कोई उपदेश नहीं हैं। इसमें मेरी और मेरे आसपास के लोगों की ऐसी ढेरों कहानियां हैं, जिनमें आशा और निराशा, स्पष्टता और असमंजस, सफलता और असफलता, ख़ुशी और दुख, आसानी और मुश्किलें, चिंताएं और मस्ती जैसे सारे अनुभव शामिल हैं। आज की वास्तविकताओं तथा चुनौतियों के संदर्भ में लगभग आधी शताब्दी पहले के मेरे विचार कितने प्रासंगिक हैं, तब से अब तक क्या बुनियादी बदलाव आए या नहीं आये, इन की चर्चा निजी अनुभवों के आधार पर की गयी है।सत्यार्थी ने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा, खूब सपने देखें, बड़े सपने देखें। आप सभी के भीतर एक विराट शक्ति है। उस पर विश्वास कर अपने सपनों को पूरा करने के रास्ते पर बढ़ें। इस किताब के लिखने का उद्देश्य ही है कि लोग सपने देखने का साहस कर सकें। सपने देखने वाला व्यक्ति कभी बूढ़ा नहीं होता। इसीलिए मैं 70 साल की उम्र में करुणा के वैश्वीकरण का सपना देख रहा हूं। प्रख्यात गीतकार एवं कवि आलोक श्रीवास्तव ने किशोरावस्था में विदिशा में अस्पृश्यता के खिलाफ कैलाश सत्यार्थी के संघर्षों पर रोशनी डालते हुए बताया कि कैसे सफाईकर्मियों के हाथों बना खाना खाने के लिए लोगों को न्योता देने की वजह से वे अपने ही घर में अस्पृश्य हो गये। इस एक घटना ने कैलाश के कालांतर मे कैलाश सत्यार्थी बनने में अहम भूमिका निभायी। उन्होंने कहा कि यह किताब सपनों को साकार करने का दस्तावेज है। इस अवसर पर किताब के प्रकाशक प्रभात पब्लिकेशन के निदेशक प्रभात कुमार ने कहा, कैलाश सत्यार्थी न तो मोटिवेशनल स्पीकर हैं और न व्यावसायिक लेखक। यह एक कर्मयोगी की अपने सपनों, संघर्षों और अनुभवों की कहानी है। इसमें उपदेश नहीं बल्कि अनुभवसिद्ध सत्य हैं। एक छोटे शहर और सामान्य परिवेश से निकलकर नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय ख्याति के व्यक्ति बनने तक के लेखक के अनुभवों पर आधारित यह पुस्तक पाठकों के लिए एक बेशकीमती उपहार साबित होगी।
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